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सेहत की बात: अक्सर बनी रहती है पाचन की समस्या? कहीं यह डायबिटीज का संकेत तो नहीं, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

Thu, 18 Aug 2022 04:34 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पाचन तंत्र की समस्या के लक्षण - फोटो : pixabay
मधुमेह मौजूद समय की सबसे तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ने के कारण होने वाली यह समस्या शरीर को कई प्रकार से प्रभावित कर सकती है। जिन लोगों का ब्लड शुगर लेवल अक्सर अनियंत्रित बना रहता है, ऐसे लोगों में किडनी, आंख सहित शरीर के अन्य अंगों में भी कई तरह की दिक्कतों का जोखिम काफी बढ़ जाता है। डायबिटीज या मधुमेह मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है- टाइप-1 डायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज। इन स्थितियों में शरीर इंसुलिन नामक हार्मोन्स का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता है।

टाइप-2 डायबिटीज में शरीर या तो पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता है या  इंसुलिन का प्रतिरोध करता है। यह स्थिति रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ा देती है, जिससे तरह की जटिलताएं हो सकती हैं।

सामान्यतौर पर घाव न भरने, कमजोरी, धुंधला दिखाई देने जैसे लक्षणों के आधार पर डायबिटीज की समस्या का पहचान किया जाता है, पर क्या आप जानते हैं कि पेट में गड़बड़ी की समस्या भी डायबिटीज की तरफ संकेत हो सकती है? आइए जानते हैं कि डायबिटीज में पाचन की किस तरह की समस्याएं हो सकती हैं, किन लक्षणों के आधार पर इस समस्या का निदान किया जा सकता है?
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डायबिटीज और पाचन की समस्याएं - फोटो : iStock
क्या डायबिटीज के कारण पाचन की भी हो सकती हैं दिक्कतें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, डायबिटीज की समस्या को मुख्यरूप से किडनी, आंखों की दिक्कतों वाला माना जाता रहा है, पर यह आपके पाचन तंत्र की सेहत को भी प्रभावित कर सकती है। शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ना जठरांत्र संबंधी मार्ग को प्रभावित कर सकता है, जिसके कारण पेट से संबंधित कई तरह की दिक्कतों का जोखिम बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि ब्लड शुगर का बढ़ना तंत्रिकाओं को भी क्षति पहुंचाता है, ऐसे में यह गैस्ट्रोइंटस्टाइनल समस्याओं का कारण बनती है।

अध्ययनों से पता चलता है कि जब हाई डायबिटीज के कारण तंत्रिकाएं प्रभावित हो जाती है तो इस स्थिति में पेट के अंग और अन्नप्रणाली ठीक तरीके से काम नहीं कर पाती है जिसके कारण कई तरह की दिक्कतों का जोखिम बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि इन स्थितियों में किस तरह की दिक्कतें हो सकती हैं?
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डायबिटीज और गैस्ट्रोपेरेसिस की समस्या - फोटो : iStock
पाचन की गड़बड़ी

जिन लोगों का ब्लड शुगर लेवल अक्सर बढ़ा रहता है ऐसे लोगों में पाचन की गड़बड़ी की समस्या अधिक देखी जाती है, मेडिकल की भाषा में इसे गैस्ट्रोपेरेसिस कहा जाता है। यह स्थिति आपके भोजन को पचाने के तरीके को प्रभावित करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हाई ब्लड शुगर की स्थिति में तंत्रिका क्षति के कारण पाचन तंत्र से संबंधित मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इससे भोजन लंबे समय तक पेट में बना रह सकता है। यह स्थिति भोजन से पोषक तत्वों के अवशोषण को भी बाधित कर देती है। 

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पेट की दिक्कतों पर दें ध्यान - फोटो : iStock
ऐसे लक्षणों को लेकर बरतें सावधानी

जिन लोगों को हाई ब्लड शुगर के कारण गैस्ट्रोपेरिसिस की दिक्कत होती है, उनमें पेट से संबंधित कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। सभी लोगों को ऐसे लक्षणों को लेकर भी सावधानी बरतते रहने चाहिए। लगातार इस तरह की समस्याओं का बने रहना भी दर्शाता है कि आप डायबिटीज के शिकार हैं। ऐसे लोगों में मतली और उल्टी, पेट में जलन, भूख कम लगना, पेट में सूजन या दर्द जैसी दिक्कतों का अक्सर अनुभव होता रह सकता है।
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मधुमेह में होने वाली अन्य स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : iStock
डायबिटीज में  पाचन समस्या हो तो क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं जिन लोगों को डायबिटीज में  पाचन की समस्या होती है, उन्हें आहार पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। इसके लिए भोजन को थोड़ा-थोड़ा करके तीन-चार बार में खाना चाहिए। इससे आपके पेट में कम भोजन रहेगा और इसका पाचन सिस्टम से गुजरना आसान होगा। इसके अलावा नरम, अधिक तरल रूप भोजन करना ज्यादा अच्छा माना जाता है। सबसे जरूरी बात, ब्लड शुगर लेवल की जांच करते रहें और इसे कंट्रोल में रखने के उपाय करें। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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