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Stress-Anxiety: मानसिक तनाव और एग्जाइटी में क्या अंतर है? कहीं आप भी इसे एक नहीं समझते हैं

Fri, 13 Feb 2026 09:10 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Stress vs Anxiety Differences: आज के दौर में मेंटल हेल्थ को लेकर बहुत से लोग जागरूक हो रहे हैं। मगर बहुत से लोग मानसिक तनाव और एग्जाइटी को एक ही समझ लेते हैं। इसलिए आइए इस लेख में इसी के बीच के बारीक अंतर के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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मानसिक तनाव और एग्जाइटी में अंतर - फोटो : Freepik.com
How to Manage Mental Stress Naturally: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में 'मानसिक तनाव' और 'एंग्जायटी' शब्द हमारे दैनिक बोलचाल का हिस्सा बन गए हैं। अक्सर लोग इन दोनों स्थितियों को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान के नजरिए से इनमें एक बहुत ही बारीक और महत्वपूर्ण अंतर है। मानसिक तनाव आमतौर पर किसी बाहरी कारण या परिस्थिति की प्रतिक्रिया होती है, जैसे ऑफिस का काम, कोई डेडलाइन या परिवार में अनबन। जैसे ही वह परिस्थिति खत्म होती है, तनाव भी धीरे-धीरे कम हो जाता है। 

वहीं दूसरी ओर एंग्जायटी एक आंतरिक प्रतिक्रिया है जो बिना किसी स्पष्ट बाहरी कारण के भी बनी रह सकती है। यह भविष्य की अज्ञात चिंताओं और डर से जुड़ी होती है, जो परिस्थिति खत्म होने के बाद भी व्यक्ति का पीछा नहीं छोड़ती। तनाव को प्रबंधित किया जा सकता है, लेकिन यदि एंग्जायटी पर ध्यान न दिया जाए, तो यह 'एंग्जायटी डिसऑर्डर' का रूप ले सकती है।

इन दोनों के बीच के अंतर को समझना इसलिए जरूरी है ताकि सही समय पर सही उपचार और थेरेपी का चुनाव किया जा सके। आपकी मानसिक सेहत आपके शारीरिक स्वास्थ्य जितनी ही महत्वपूर्ण है, इसलिए इसके लक्षणों को गहराई से जानना ही बचाव की पहली सीढ़ी है।
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स्ट्रेस, मेंटल हेल्थ - फोटो : Adobe Stock Photo
पहले तनाव के बारे में जानें
तनाव तब होता है जब शरीर पर बाहरी दबाव बढ़ता है। इसे 'फाइट या फ्लाइट' रिस्पॉन्स के रूप में जाना जाता है। इसमें सांसें तेज होना और मांसपेशियों में खिंचाव जैसे लक्षण दिखते हैं। तनाव का एक सकारात्मक पक्ष भी हो सकता है, जो हमें समय पर काम पूरा करने के लिए प्रेरित करता है। मगर तनाव हफ्तों या महीनों तक बना रहे, तो यह थकान और हाई बीपी का कारण बन सकता है।

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स्ट्रेस - फोटो : adobe stock images
अब एंग्जायटी के बारे में जानें
एंग्जायटी तनाव की तुलना में अधिक जटिल है क्योंकि इसमें डर का कोई स्पष्ट स्रोत नहीं होता। इसमें व्यक्ति को हर समय कुछ बुरा होने का अहसास होता रहता है। इसके शारीरिक लक्षणों में पसीना आना, हाथ-पैर कांपना और सोने में कठिनाई होना शामिल है। एंग्जायटी अक्सर तब भी बनी रहती है जब कोई वास्तविक खतरा मौजूद नहीं होता, जिससे दैनिक कामकाज प्रभावित होने लगता है।

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स्ट्रेस - फोटो : Adobe Stock
कैसे पहचानें इन दोनों के बीच का बारीक अंतर?
तनाव और एंग्जायटी के बीच मुख्य अंतर उनकी 'अवधि' और 'कारण' में है। तनाव एक समय बाद खत्म होता है, जैसे ही तनावपूर्ण स्थिति (जैसे परीक्षा या प्रोजेक्ट) समाप्त होती है, आप राहत महसूस करते हैं। इसके विपरीत, एंग्जायटी एक 'मेंटल लूप' की तरह है जो बार-बार उन्हीं नकारात्मक विचारों को दिमाग में घुमाता रहता है। अगर आपका डर वास्तविकता से बहुत अधिक बड़ा है, तो यह एंग्जायटी का संकेत है।
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तनाव, स्ट्रेस - फोटो : Freepik.com
सही पहचान और उपचार है अनिवार्य
यह सब जानने के बाद एक बात तो तय कि मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना आज के दौर में बहुत जरूरी हो गया है। तनाव के लिए गहरी सांस लेना, योग और व्यायाम काफी प्रभावी होते हैं। लेकिन अगर आपको लगता है कि आपकी चिंताएं नियंत्रण से बाहर हो रही हैं, तो किसी मनोचिकित्सक से परामर्श लेने में संकोच न करें। ध्यान रखें कि मानसिक उलझनों को साझा करना कमजोरी नहीं, बल्कि मजबूती की निशानी है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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