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Health Alert: धुंधला दिखना केवल आंख ही नहीं, कई गंभीर समस्याओं का भी हो सकता है संकेत; रहें सावधान

Thu, 19 Jun 2025 06:11 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • आंखों से कम या धुंधला दिखना आज के समय की आम समस्या है। इसपर समय रहते ध्यान देना बहुत आवश्यक हो जाता है।
  • हर बार धुंधला दिखाई देना आंखों की ही समस्या हो ऐसा जरूरी नहीं है।
  • अगर आपको भी धुंधला दिखना शुरू हो गया है तो इसे अनदेखा न करें। समय रहते इसका सही निदान और इलाज करा लें, ताकि आप गंभीर दिक्कतों से बचे रह सकें।
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धुंधला दिखाई देने के कारण - फोटो : Freepik.com
आंखों से संबंधित समस्याओं के मामले सभी उम्र के लोगों में देखे जा रहे हैं। 20 से कम उम्र, यहां तक कि बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं। आंखों से कम या धुंधला दिखना आज के समय की आम समस्या है हालांकि इसपर समय रहते ध्यान देना बहुत आवश्यक हो जाता है। इस तरह के लक्षणों को अनदेखा करना कई बार गंभीर समस्याओं, यहां तक कि आंखों की रोशनी जाने का भी कारण हो सकता है।

पर क्या आप जानते हैं कि हर बार धुंधला दिखाई देना आंखों की ही समस्या हो ऐसा जरूरी नहीं है। हाई डायबिटीज जैसी कई अन्य गंभीर समस्याओं के कारण भी इस तरह की दिकक्तें महसूस हो सकती हैं। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर आपको कुछ समय से कम दिखना या धुंधला दिखना शुरू हो गया है तो इसे अनदेखा न करें।

समय रहते इसका सही निदान और इलाज करा लें, ताकि आप गंभीर दिक्कतों से बचे रह सकें।
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आंखों की समस्या - फोटो : Freepik.com
आंखों की समस्याएं और गंभीर बीमारियों का संबंध

जब आपकी दृष्टि धुंधली हो जाती है, तो इसके चलते स्पष्ट रूप से देखना मुश्किल हो जाता है। चीजों को साफ और स्पष्ट रूप से देखने के लिए आप बार-बार पलकें झपकाते, आंखों को सिकोड़ते या अपनी आंखें रगड़ते हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आंखों की स्थिति हर बार आंखों से संबंधित हो ऐसा होना जरूरी नहीं है। शरीर की कई अन्य गंभीर समस्याओं के कारण भी आपको धुंधला दिखने की समस्या हो सकती है। यही कारण है कि आंखों की इस समस्या को बिल्कुल अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।

आइए जानते हैं कि किन कारणों से आपको धुंधला दिखने लगता है? किन गंभीर बीमारियों में ये लक्षण दिखाई देते हैं?
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डायबिटीज के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
डायबिटीज के कारण भी हो सकती है ये समस्या

आंखों से धुंधला दिखने लगा है तो एक बार शुगर की भी जांच करा लीजिए। धुंधली दृष्टि और मधुमेह के बीच गहरा संबंध हो सकता है।

हाई डायबिटीज की स्थिति समय के साथ आपकी दृष्टि को नुकसान पहुंचाने लगती है। डायबिटिक रेटिनोपैथी  मधुमेह के कारण होने वाली आंखों की बीमारी है। इसमें समय के साथ, हाई शुगर के कारण आपके रेटिना की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है।

डायबिटिक रेटिनोपैथी आंखों में रक्त के संचार को प्रभावित करने वाली समस्या हो सकती है जिसके कारण आपको धुंधला दिखने लगता है। इस समस्या का अगर समय पर इलाज न हो पाए तो आपकी दृष्टि को स्थाई नुकसान भी हो सकती है। ब्लड शुगर कंट्रोल न रहना इसके जोखिमों को और भी बढ़ाता जाता है।

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स्ट्रोक और इसके कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
कहीं ये स्ट्रोक का संकेत तो नहीं?

धुंधला दिखना या दृष्टि बाधित होने की समस्या कई बार स्ट्रोक का संकेत हो सकती है। स्ट्रोक में आपके मस्तिष्क का वो हिस्सा भी प्रभावित हो जाता है जो आपकी दृष्टि को नियंत्रित करता है। यही कारण है कि आपको अचानक से धुंधला दिखने को अनदेखा नहीं करना चाहिए। स्ट्रोक जानलेवा स्थिति है जिसका समय रहते इलाज जरूरी हो जाता है।

स्ट्रोक के कारण धुंधला दिखने के अलावा आपको चक्कर आने, चेहरा लटकने, शरीर का संतुलन खोने, बोलने में दिक्कत, गंभीर सिरदर्द की भी समस्या हो सकती है। इन स्थितियों पर गंभीरता से ध्यान देते रहें।
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गर्भावस्था में होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
प्रीक्लेम्पसिया की स्थिति

अगर आप गर्भवती हैं, तो आपको धुंधली दृष्टि को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह प्रीक्लेम्पसिया का संकेत हो सकता है, जो एक खतरनाक स्थिति है जिसमें रक्तचाप और आपके मूत्र में प्रोटीन का स्तर काफी बढ़ जाता है। प्रीक्लेम्पसिया उन महिलाओं में होता है जिन्हें पहले कभी उच्च रक्तचाप नहीं हुआ है। यह आमतौर पर गर्भावस्था के अंत में 20 सप्ताह के बाद होता है। यह महिला और बच्चे के लिए गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।

प्रीक्लेम्पसिया में धुंधला दिखने के साथ सांस लेने में तकलीफ, दिल की धड़कन तेज होने या भ्रम, पेट-कंधे या पीठ के निचले हिस्से में दर्द और अचानक वजन बढ़ने की भी दिक्कत हो सकती है।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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