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Diabetes Retinopathy: डायबिटीज के किन मरीजों में होता है आंखों की रोशनी जाने का खतरा, यहां जानें

Fri, 09 Jan 2026 07:33 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • Diabetic Retinopathy: आंखों से दिखाई न देना अपने आप में एक बहुत बड़ा अभिशाप है।
  • मगर बहुत कम लोगों को मालूम है कि डायबिटीज के मरीजों की आंखों की रोशनी जाने का जोखिम बहुत अधिक होता है। 
  • इस समस्या को डायबिटिक रेटिनोपैथी कहते हैं, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।
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डायबिटीज - फोटो : Amar Ujala
High Blood Sugar Effects on Eyes: डायबिटीज यानी मधुमेह आज एक ऐसी बीमारी बन चुकी है जो शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित करती है, लेकिन सबसे गंभीर प्रहार यह हमारी आंखों पर करती है। 'डायबिटिक रेटिनोपैथी' एक ऐसी स्थिति है जिसे अक्सर "साइलेंट किलर" कहा जाता है, क्योंकि यह बिना किसी दर्द के धीरे-धीरे आंखों की रोशनी चुरा लेती है। जब खून में शुगर का लेवल लंबे समय तक अनियंत्रित रहता है, तो यह रेटिना (आंख के पिछले हिस्से) की सूक्ष्म ब्लड वेसेल्स को क्षतिग्रस्त कर देता है। 

दुनिया भर में लाखों लोग इस स्थिति के कारण अपनी दृष्टि खो रहे हैं, और सबसे दुखद बात यह है कि शुरुआती चरणों में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। अगर आप या आपके परिवार में कोई मधुमेह से पीड़ित है, तो यह खबर आपके लिए जीवन रक्षक साबित हो सकती है। अपनी आंखों को धुंधलेपन और अंधेरे से बचाने के लिए यह समझना जरूरी है कि कौन से मरीज सबसे ज्यादा जोखिम में हैं और समय रहते इससे कैसे बचा जा सकता है।
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आंखें - फोटो : Freepik.com
क्या होते हैं डायबिटीज रेटिनोपैथी के लक्षण?
डायबिटीज के कारण आंखों के अंदर होने वाले बदलाव काफी जटिल होते हैं, जो दृष्टि को बाधित करते हैं-
  • हाई शुगर के कारण रेटिना की नसें कमजोर होकर खून या तरल पदार्थ का रिसाव करने लगती हैं।
  • रेटिना के मध्य भाग (मैकुला) में सूजन आ जाती है, जिससे बारीक चीजें देखना मुश्किल हो जाता है।
  • शरीर डैमेज नसों की जगह नई नसें बनाने की कोशिश करता है, जो बहुत कमजोर होती हैं और ब्लीडिंग का कारण बनती हैं।
  • नजर में काले धब्बे (फ्लोटर्स) दिखना या अचानक दृष्टि का कम हो जाना।
 
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डायबिटीज - फोटो : Adobe Stock
यह जोखिम किन मरीजों में सबसे ज्यादा है?
हर डायबिटीज रोगी को रेटिनोपैथी नहीं होती, लेकिन कुछ कारक इस जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं:
  • जो लोग 10-15 साल से अधिक समय से शुगर के मरीज हैं, उनमें खतरा सबसे अधिक होता है।
  • जिनका HbA1c लेवल लगातार अधिक रहता है, उनकी आंखों की नसें जल्दी डैमेज होती हैं।
  • ये दोनों स्थितियां आंखों की रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं।
  • गर्भकालीन मधुमेह या पहले से शुगर होने पर गर्भावस्था के दौरान रेटिनोपैथी तेजी से बढ़ सकती है।
 
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आंखें - फोटो : Freepik.com
क्या परमानेंट अंधे होने का भी डर रहता है?
अकर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो इसके परिणाम काफी गंभीर और स्थायी हो सकते हैं-
  • रेटिना के पूरी तरह डैमेज होने या डिटैच होने पर रोशनी वापस लाना असंभव हो जाता है।
  • आंखों के अंदर दबाव बढ़ने से काला मोतियाबिंद हो सकता है, जो ऑप्टिक नर्व को नष्ट कर देता है।
  • बाद के चरणों में लेजर सर्जरी या आंखों में महंगे इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है जो आर्थिक बोझ बढ़ाते हैं।
  • दृष्टि खोने से व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता खो देता है और दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाता है।
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डायबिटीज - फोटो : Freepik.com
इससे बचने के लिए क्या करें?
डायबिटिक रेटिनोपैथी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है 'निवारण'। डायबिटीज के मरीजों को साल में कम से कम एक बार आंखों की विस्तृत जांच करानी चाहिए। एक्सपर्ट्स के मुताबिक शुगर कंट्रोल करना केवल अंगों को बचाने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया को देखने की क्षमता को बचाए रखने के लिए जरूरी है। डायबिटिक रेटिनोपैथी को हल्के में न लें, वर्तमान का एक छोटा सा चेकअप आपके भविष्य को रोशन रख सकता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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