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हेल्थ अलर्ट: पैरों में होता है सुई चुभने जैसा एहसास, कहीं ये हाई शुगर की वजह से तो नहीं?

सार

Diabetic Neuropathy: डायबिटीज में पैरों की झनझनाहट अक्सर डायबिटिक न्यूरोपैथी के कारण होती है। लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर लेवल नसों को नुकसान पहुंचाता है। इसके कारण आपको पैरों में जलन, सुन्नपन और दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। शुगर कंट्रोल करना, नियमित जांच और पैरों की देखभाल डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत जरूरी है।
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पैरों में झनझनाहट की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
डायबिटीज की समस्या दुनियाभर में तेजी से बढ़ती हुई देखी जा रही है। बड़ी संख्या में लोग इसका शिकार देखे जा रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि दुनियाभर में 20 से 79 वर्ष की आयु के लगभग 58.9 करोड़ वयस्क मधुमेह के साथ जी रहे हैं। लगातार बढ़ी रहने वाली ब्लड शुगर की स्थिति धीरे-धीरे हार्ट, किडनी और आंखों सहित नसों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाने वाली हो सकती है।

डायबिटीज के कई मरीजों को पैरों में झनझनाहट, जलन, सुन्नपन या सुई चुभने जैसा एहसास होता रहता है। क्या आप भी इस समस्या के शिकार हैं? इस समस्या को डायबिटिक पेरिफेरल न्यूरोपैथी कहा जाता है। हालांकि, पैरों में झनझनाहट होने का कारण हमेशा डायबिटीज नहीं होता। कई अन्य स्थितियां और विटामिन्स की कमी के कारण भी लोगों को ये दिक्कत हो सकती है।

आइए जानते हैं कि डायबिटीज के मरीजों को पैरों में ये दिक्कतें क्यों होती हैं?
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डायबिटिक न्यूरोपैथी के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock
डायबिटीज में पैरों में झनझनाहट क्यों होती है?

डायबिटिक न्यूरोपैथी की समस्या डायबिटीज के मरीजों में पैरों में झनझनाहट का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है। लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने से नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इससे नसें सही तरीके से संकेत नहीं भेज पातीं और पैरों में जलन, दर्द या झनझनाहट महसूस होने लगती है।
 
  • इसके अलावा, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और धूम्रपान से भी नसों को नुकसान पहुंचता है, जिसके कारण दर्द, झनझनाहट और जलन जैसी समस्याएं होती हैं। 
  • कुछ मरीजों में विटामिन बी12 की कमी भी इसकी वजह बनती है। इसलिए झनझनाहट होने पर केवल हाई शुगर को जिम्मेदार मानने के बजाय डॉक्टर से सही कारण का पता लगवाना जरूरी है।
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पैरों में झनझनाहट की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
पैरों में झनझनाहट के साथ होती हैं ये दिक्कतें

डायबिटिक न्यूरोपैथी के लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं। आमतौर पर शुरुआत में इसमें कोई खास दिक्कत नहीं होती है, लेकिन समय के साथ ये समस्या बढ़ती जाती है।
 
  • समस्या बढ़ने के कारण पैरों के तलवों और उंगलियों में जलन, सुई चुभने जैसी दिक्कत, सुन्नपन और दर्द हो सकता है।
  • इसके अलावा नसों की समस्याओं के कारण कुछ लोगों को पैरों में गर्म या ठंडे का एहसास कम हो सकता है। 
  • नसों पर असर पड़ने से चलने में संतुलन बिगड़ सकता है और चोट लगने का पता भी नहीं चलता। ऐसे में छोटा-सा कट, छाला या घाव भी गंभीर हो सकता है। 
  • यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ डायबिटीज के सभी मरीजों को निरंतर अपने  पैरों की खुद से जांच करते रहने की सलाह दी जाती है।
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पैरों में होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
अगर पैरों में झनझनाहट लगातार बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए है। नसों को नुकसान पहुंचने से पैरों की संवेदना कम हो सकती है। ऐसे में चोट लगने, जलने या जूते से होने वाले घाव का पता भी समय रहते नहीं चल पाता। डायबिटीज में घाव भरने में भी ज्यादा समय लगता है, जिससे संक्रमण होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।

पैरों में झनझनाहट से कैसे बचें?

पैरों की नसों को नुकसान पहुंचने का खतरा कम करने के लिए सबसे जरूरी है कि अपने ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लें, नियमित जांच कराएं और संतुलित खानपान का पालन करें। इसके साथ रोज पैरों के तलवों, उंगलियों और एड़ियों को ध्यान से देखें, ताकि किसी कट, छाले या घाव का समय पर पता चल सके।
 
  •  डायबिटिक न्यूरोपैथी वाले मरीजों को नंगे पैर चलने से बचना चाहिे और आरामदायक जूते पहनना चाहिए जिनसे पैरों पर रगड़ न लगे। 
  • न्यूरोपैथी वाले मरीजों को साल में एक बार डॉक्टर की सलाह पर पैरों की संवेदना और नसों की जांच भी करानी चाहिए। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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