पैरों में होने वाली दिक्कतें
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अगर पैरों में झनझनाहट लगातार बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए है। नसों को नुकसान पहुंचने से पैरों की संवेदना कम हो सकती है। ऐसे में चोट लगने, जलने या जूते से होने वाले घाव का पता भी समय रहते नहीं चल पाता। डायबिटीज में घाव भरने में भी ज्यादा समय लगता है, जिससे संक्रमण होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
पैरों में झनझनाहट से कैसे बचें?
पैरों की नसों को नुकसान पहुंचने का खतरा कम करने के लिए सबसे जरूरी है कि अपने ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लें, नियमित जांच कराएं और संतुलित खानपान का पालन करें। इसके साथ रोज पैरों के तलवों, उंगलियों और एड़ियों को ध्यान से देखें, ताकि किसी कट, छाले या घाव का समय पर पता चल सके।
- डायबिटिक न्यूरोपैथी वाले मरीजों को नंगे पैर चलने से बचना चाहिे और आरामदायक जूते पहनना चाहिए जिनसे पैरों पर रगड़ न लगे।
- न्यूरोपैथी वाले मरीजों को साल में एक बार डॉक्टर की सलाह पर पैरों की संवेदना और नसों की जांच भी करानी चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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