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Aditya Dhar: किताबों से संघर्ष, कैमरे से कमाल! क्या है डिस्लेक्सिया जिसका शिकार रहे हैं धुरंधर के डायरेक्टर

Sun, 29 Mar 2026 07:45 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डिस्लेक्सिया एकन्यूरोलॉजिकल विकार है जो मुख्य रूप से पढ़ने, लिखने और शब्दों को समझने की क्षमता को प्रभावित करता है। धुरंधर फिल्मे के निर्देशक आदित्य धर इसका शिकार रह चुके हैं। आइए जान लेते हैं कि ये बीमारी क्या है?
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फिल्म निर्देशक आदित्य धर रहे चुके हैं डिस्लेक्सिया का शिकार - फोटो : Amarujala.com
बॉलीवुड फिल्म धुरंधर-2 इन दिनों काफी सुर्खियों में है। बॉक्स ऑफिस पर ये फिल्म नए रिकॉर्ड्स बना रही है, इस फिल्म का कलेक्शन अब तक 778 करोड़ रुपये से अधिक का हो चुका है। फिल्म के अभिनेता रणवीर सिंह की एक्टिंग लोगों को खूब पसंद आ रही है, पर पर्दे के पीछे का सारा खेल डायरेक्टर आदित्य धर का है।

उरी और आर्टिकल 370 जैसी हिट फिल्में देने वाले आदित्य धर की सफलता की तो सभी तारीफ कर रहे हैं, पर क्या आप जानते हैं कि एक वक्त ऐसा था जब आदित्य ऐसी बीमारी से जूझ रहे थे जिसके चलते पढ़ने-लिखने और शब्दों को समझने में काफी दिक्कत होती है।

कभी शब्दों की उलझनों से जूझने वाले आदित्य धर ने किस तरह से इसे अपना हथियार बनाकर बॉलीवुड में अपना नाम बनाया ये काफी प्रेरणा वाली कहानी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आदित्य धर डिस्लेक्सिया का शिकार थे। 

डिस्लेक्सिया क्या है? इसमें क्या दिक्कतें होती हैं और इसका जीवन पर किस तरह से असर होता है? आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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बच्चों को डिस्लेक्सिया की समस्या - फोटो : Freepik.com
डिस्लेक्सिया के बारे में जान लीजिए 

क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट के मुताबिक डिस्लेक्सिया एक न्यूरो-डेवलपमेंटल लर्निंग डिसऑर्डर है जिसके कारण लोगों को पढ़ने, शब्दों के पहचानने और भाषा से संबंधित कठिनाई हो सकती है।
 
  • यह एक 'स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर' है, जिसके कारण अक्सर पढ़ने और लिखने की गति धीमी हो जाती है।
  • डिस्लेक्सिया मुख्यरूप से सीखने की अक्षमता वाली समस्या है जो आपकी सही ढंग से पढ़ने, लिखने और वर्तनी की क्षमता को प्रभावित करती है। 
  • ऐसा तब होता है जब आपके मस्तिष्क को शब्दों को समझने में कठिनाई होती है।
  • कई लोगों में ये समस्या जन्मजात होती है, जबकि कुछ में ये बाद में विकसित होती है।

अभी तक इस समस्या को ठीक करने का कोई तरीका पता नहीं है, हालांकि इलाज के माध्यम से लक्षणों को मैनेज जरूर किया जा सकता है।
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डिस्लेक्सिया के कारण क्या दिक्कतें होती हैं? - फोटो : Freepik
डिस्लेक्सिया के कारण क्या दिक्कतें होती हैं?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि इस बीमारी का बुद्धिमत्ता से कोई संबंध नहीं है। इसमें दिमाग का वह हिस्सा प्रभावित होता है जो भाषा और अक्षरों को सीखने-समझने के लिए जरूरी होता है।
 
  • डिस्लेक्सिया वाले बच्चों का आईक्यू लेवल सामान्य होता है।
  • डिस्लेक्सिया में मुख्य समस्या पढ़ने और लिखने से जुड़ी होती है। ऐसे बच्चों को अक्षरों को पहचानने, उन्हें सही क्रम में रखने और शब्दों को सही ढंग से पढ़ने में दिक्कत होती है। 
  • वे अक्सर मिलते-जुलते अक्षरों को उल्टा-पुल्टा पढ़ लेते हैं या शब्दों को तोड़कर पढ़ते हैं। 
  • पढ़ने की गति धीमी होती है और समझने में अधिक समय लगता है। 

इस तरह की समस्याओं का असर आत्मविश्वास पर पड़ सकता है, जिससे बच्चा पढ़ाई से भागने बनाने लगता है। 
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डिस्लेक्सिया को कैसे ठीक किया जाता है? - फोटो : Adobe stock
कहीं आपका बच्चा भी तो नहीं है शिकार?

बच्चों में डिस्लेक्सिया के लक्षणों की पहचान आमतौर पर तब हो पाती है जब वह स्कूल जाना शुरू करते हैं। अगर आपके बच्चे को भी चीजों को सीखने से संबंधित दिक्कतें हो रही हैं तो ये अलार्मिंग हो सकता है।
 
  • देर से बोलना
  • नए शब्द धीरे-धीरे सीखना
  • शब्दों को सही ढंग से बनाने में दिक्कत होना, जैसे उल्टा-सीधा बोलना या एक जैसी आवाज वाले शब्दों में भ्रमित होना
  • अक्षरों, संख्याओं और रंगों को याद रखने या उनके नाम बताने में दिक्कत होना

जब आपका बच्चा स्कूल जाने लगता है, तो डिस्लेक्सिया के लक्षण ज्यादा साफ दिखाई देने लगते हैं। ऐसे बच्चों में अपनी उम्र के हिसाब से पढ़ने में दिक्कत होती है,  सुनी हुई बातों को समझने और उन पर विचार करने में दिक्कत होती है। सही शब्द ढूंढने या सवालों के जवाब बनाने, चीजो के क्रम को याद रखने में भी कठिनाई होती है।


डिस्लेक्सिया को ठीक कैसे किया जाता है? 

डिस्लेक्सिया का मुख्य कारण आनुवंशिक और न्यूरोलॉजिकल माना जाता है। जिन परिवारों में पहले से किसी को डिस्लेक्सिया की समस्या रही है, उनमें बच्चों में इसका खतरा अधिक होता है। डिस्लेक्सिया के लक्षणों के बावजूद बच्चों की  सोचने, समझने और रचनात्मकता की क्षमता सामान्य रहती है।

डिस्लेक्सिया को ठीक करने का अब तक कोई ज्ञात तरीका नहीं है। हालांकि कुछ प्रकार की थेरेपी, एजुकेशनल प्लान की मदद से लक्षणों में सुधार किया जा सकता है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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