Causes and Treatment of Fits: मिरगी मस्तिष्क से जुड़ी न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें दौरे पड़ सकते हैं। सही इलाज, नियमित दवा, पर्याप्त नींद और सावधानियों के साथ मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। यहां आज के लेख में हम आपको इससे जुड़ी हर जानकारी देंगे।
Causes and Treatment of Fits Explainer: हम आधुनिक समाज में रह रहे हैं, बावजूद इसके आज भी मिरगी को लेकर समाज में आज भी तरह-तरह की गलत धारणाएं और अंधविश्वास मौजूद हैं। जबकि इसका संबंध किसी अलौकिक शक्ति से नहीं, बल्कि मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से है।
हर किसी को ये समझने की जरूरत है कि मिरगी होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति सामान्य जिंदगी नहीं जी सकता। सही इलाज, नियमित दवा और जरूरी सावधानियों के साथ कई लोग दौरे को नियंत्रित कर सामान्य जीवन जी सकते हैं।
आज के इस लेख में हम आपको डिटेल में ये बताएंगे कि आखिर मिरगी के दौरे क्यों आते हैं, इसके कितने प्रकार हैं और मिरगी के मरीज को रोजमर्रा की जिंदगी में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? आइए जानते हैं।
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क्यों आते हैं मिरगी के दौरे ?
- फोटो : AI
मिरगी क्या है?
मिरगी यानी Epilepsy-Fits मस्तिष्क से जुड़ी एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। इसमें मस्तिष्क की कुछ कोशिकाओं में असामान्य विद्युत गतिविधि होने से दौरे पड़ सकते हैं। दौरे के दौरान व्यक्ति की चेतना, हरकत, संवेदना या व्यवहार में अस्थायी बदलाव आ सकता है।
ध्यान देने वाली बात है कि एक बार दौरा पड़ना अपने आप में मिरगी का मतलब नहीं है। मिरगी का पता मेडिकल हिस्ट्री और जरूरत के अनुसार की जाने वाली जांच के आधार पर लगाया जाता है।
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मिरगी के दौरे क्यों आते हैं?
मिरगी के कई संभावित कारण हो सकते हैं। इनमें जन्म से पहले या जन्म के दौरान मस्तिष्क को नुकसान, जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी, सिर में गंभीर चोट, स्ट्रोक, मस्तिष्क में संक्रमण, कुछ आनुवंशिक स्थितियां और मस्तिष्क में ट्यूमर शामिल हैं। कई मामलों में मिरगी का स्पष्ट कारण पता नहीं चल पाता।
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मिरगी के दौरे कितने प्रकार के होते हैं?
मिरगी के दौरे हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। कुछ लोगों में पूरे शरीर में झटके और मांसपेशियों में ऐंठन हो सकती है, जबकि कुछ लोगों में कुछ समय के लिए चेतना या आसपास की जानकारी प्रभावित हो सकती है। कुछ दौरे मस्तिष्क के एक हिस्से से शुरू होते हैं, जिन्हें फोकल सीजर कहा जाता है। वहीं कुछ दौरे मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को प्रभावित कर सकते हैं।
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दौरा पड़ने पर क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति को दौरा पड़ रहा हो तो सबसे पहले उसकी सुरक्षा का ध्यान रखें।
व्यक्ति को सुरक्षित जगह पर लिटाएं
आसपास मौजूद नुकीली या खतरनाक चीजें हटा दें
संभव हो तो व्यक्ति को करवट पर रखें
गले के आसपास के तंग कपड़े ढीले करें
दौरा शुरू होने का समय नोट करें
व्यक्ति को जबरदस्ती पकड़कर रोकने की कोशिश न करें
मुंह में चम्मच, उंगली, पानी या कोई दूसरी चीज न डालें
दौरा खत्म होने तक उसके साथ रहें
अगर दौरा 5 मिनट से ज्यादा चले, बार-बार दौरे पड़ें, व्यक्ति को गंभीर चोट लगी हो या पहली बार दौरा पड़ा हो, तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए।
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मिरगी के साथ सामान्य जीवन कैसे जिएं?
मिरगी के मरीज के लिए सबसे जरूरी है कि डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा नियमित रूप से लें। दौरे बंद हो जाने के बाद भी अपनी मर्जी से दवा बंद नहीं करनी चाहिए। दवा बंद करने या बदलने का फैसला डॉक्टर ही करें। पर्याप्त नींद लेना, समय पर खाना खाना, दवा न भूलना और अपने संभावित ट्रिगर्स को पहचानना जरूरी है। अगर किसी व्यक्ति में चमकती या टिमटिमाती रोशनी से दौरे पड़ते हैं, तो ऐसी परिस्थितियों से बचना चाहिए।
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मिरगी में किन चीजों से सावधानी बरतें?
मिरगी के मरीजों को ऐसी गतिविधियों में सावधानी बरतनी चाहिए जिनमें अचानक दौरा आने पर गंभीर चोट का खतरा हो। तैराकी, ऊंचाई पर काम करना और जोखिम वाली गतिविधियों में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। पर्याप्त नींद लें और शराब से बचें। यात्रा के दौरान अपनी दवाएं साथ रखें और डॉक्टर के बताए अनुसार नियमित चेकअप कराते रहें।
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मिरगी और मातृत्व सुख का क्या कनेक्शन है?
मिरगी से प्रभावित कई महिलाएं गर्भधारण कर स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं। हालांकि प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान दवा की जरूरत और उसकी खुराक डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार तय करते हैं।
अपनी मर्जी से मिरगी की दवा बंद करना खतरनाक हो सकता है। कुछ एंटी-सीजर दवाओं से गर्भस्थ शिशु को जोखिम हो सकता है, इसलिए गर्भधारण से पहले डॉक्टर से दवाओं की समीक्षा कराना जरूरी है।
मिरगी किसी भूत-प्रेत या अलौकिक शक्ति के कारण नहीं होती। यह मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी चिकित्सकीय स्थिति है। मिरगी संक्रामक बीमारी भी नहीं है। इसलिए मरीज को झाड़-फूंक या अंधविश्वास के भरोसे छोड़ने के बजाय सही डॉक्टर से जांच और इलाज कराना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।