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Alert: दिल्ली में तेजी से बढ़ रहे हैं डेंगू-मलेरिया के केस, डॉक्टरों के इस सुझाव पर ध्यान देकर रहें सुरक्षित

Thu, 22 Sep 2022 03:20 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डेंगू बुखार के मामले - फोटो : istock
सितंबर-अक्तूबर के महीने में देशभर में डेंगू के मरीज काफी तेजी से बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। हर साल इस गंभीर रोग के कारण हजारों की मौत हो जाती है। राजधानी दिल्ली-एनसीआर में इसका खतरा एक बार फिर से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। पिछले 15 दिनों में दिल्ली में डेंगू के मामलों में भारी उछाल दर्ज किया गया है, पिछले एक सप्ताह में 100 से अधिक लोगों में संक्रमण का पता चला है। तेजी से बढ़ते डेंगू रोगियों के आंकड़ों के साथ अब शहर में वेक्टर जनित बीमारी की संख्या 400 को पार कर गई है।

9 सितंबर तक दिल्ली में डेंगू के 295 केस थे। पिछले साल राजधानी में डेंगू के  2015 के बाद से सबसे अधिक 9,613 मामले दर्ज किए गए थे। पिछले साल 23 लोगों की मौत भी हुई थी। अस्पतालों में एक बार फिर से बढ़ती मरीजों का संख्या चिंता बढ़ाने वाली है। 

नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक इस साल डेंगू के मामले पिछले वर्षों की तुलना में थोड़े पहले से ही आने शुरू हो गए हैं। इसके लिए  मौसम की स्थिति को कारण माना जा रहा है जो मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल थी। डॉक्टर्स का कहना है कि डेंगू की शुरुआत में ही तेजी से रोगियों का आंकड़ा बढ़ना गंभीर संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, सरकारी प्रयासों के साथ सभी लोगों को व्यक्तिगत तौर पर भी संक्रमण की रोकथाम को लेकर प्रयास करते रहने की आवश्यकता है।
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मलेरिया के मामले भी बढ़े - फोटो : istock
मलेरिया के भी रोगी बढ़े

डेंगू के साथ-साथ मलेरिया के मामले भी दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। पिछले सप्ताह डेंगू के 101 नए मामलों के अलावा, इस अवधि के दौरान मलेरिया के भी 29 नए मामले दर्ज किए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि मलेरिया के मामले इस साल अब तक एक हफ्ते में सबसे ज्यादा हैं। इस समय पिछले साल की के 86 मामलों की तुलना में इस साल अब तक 92 लोगों को मलेरिया का शिकार पाया गया है। इसी तरह 17 सितंबर इस बार डेंगू के 396 मामले सामने आए हैं जबकि इसी अवधि तक साल 2021 में 211, 2020 में 172 और 2019 में 217 केस रिपोर्ट किए गए थे। 
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मच्छर जनित बीमारियों के बढ़ रहे हैं केस - फोटो : istock
क्या कहते हैं डॉक्टर्स?

अमर उजाला से बातचीत में नोएडा स्थित एक अस्पताल में इंटेंसिव केयर के डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव कहते हैं, मच्छर जनित रोगों के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं वह सभी के लिए अलार्मिंग है। व्यक्तिगत तौर पर मच्छरों के काटने से बचने के उपाय करना सभी के लिए बहुत आवश्यक है। इसके अलावा इस मौसम में अगर तीन-चार दिनों तक बुखार की समस्या बनी रहती है तो जांच जरूर करा लेनी चाहिए।  स्थिति का जल्द पता लगाना डेंगू के गंभीर मामलों से बचे रहने में मददगार हो सकता है। समय पर जांच और इलाज मिल जाए तो रोग को आसानी से ठीक किया जा सकता है।

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डेंगू के लक्षणों पर गंभीरता से नजर बनाए रखें। - फोटो : iStock
लक्षणों पर गंभीरता से रखें नजर 

डॉक्टर कहते हैं, डेंगू के लक्षणों पर गंभीरता से नजर बनाए रखें। डेंगू का वायरस इंसान के शरीर में पहुंचने के साथ बढ़ना शुरू कर देता है और इसके पहले लक्षणों में से एक है-बुखार। डेंगू के मामलों में बुखार के साथ-साथ आंखों के पीछे, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द की समस्या देखी जाती रही है। अगर आपको भी बुखार के साथ इस प्रकार का दर्द रहता है तो इस बारे में तुंरत किसी डॉक्टर से सलाह ले लें। ध्यान रखें जितना जल्दी इलाज मिल जाएगा रोग की गंभीरता को कम करने और इससे ठीक होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।
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पपीता के पत्तों से डेंगू रोगियों को मिलता है लाभ - फोटो : Pixabay
पपीते के पत्ते से मिल सकता है लाभ

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डेंगू से बचाव के लिए मच्छरों के काटने से बचें। अगर आपको डेंगू हो जाता है तो इसमें पपीते के पत्ते के अर्क को काफी लाभकारी बताया गया है। आयुर्वेद विशेषज्ञ कहते हैं यह डेंगू बुखार और इसके गंभीर स्थितियों के लिए सबसे प्रभावी प्राकृतिक उपचार है। पपीते के पत्ते प्लेटलेट काउंट बढ़ाने के लिए व्यापक रूप से प्रसिद्ध हैं और इसमें मलेरिया रोधी गुण भी मौजूद होते हैं। हालांकि स्थिति का पता लगाने के बाद डॉक्टरी सलाह पर ही इनका सेवन किया जाना चाहिए। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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