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World Lung Cancer Day: दिल्ली में रहते हैं तो हो जाइए सावधान, इस वजह से बढ़ गए हैं सालाना मौत के आंकड़े

Thu, 01 Aug 2024 11:09 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Lungs, Xray - फोटो : istock
World Lung Cancer Day 2024: वायु प्रदूषण को संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए कई प्रकार से हानिकारक माना जाता रहा है। ये फेफड़ों-सांस से संबंधित बीमारियों का प्रमुख कारण तो है ही, साथ ही प्रदूषण की वजह से हर साल मौत के आंकड़े भी बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। द लैंसेट प्लेनेटरी हेल्थ जर्नल में प्रकाशित हालिया अध्ययन के अनुसार, जिस तरह से वायु प्रदूषण के स्तर में इजाफा देखा जा रहा है, उसने कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम काफी ज्यादा बढ़ा दिया है। 10 प्रमुख भारतीय शहरों में प्रतिदिन होने वाली मौतों में से सात प्रतिशत से अधिक मौतें प्रदूषण के कारण होने वाली समस्याओं के कारण ही हो रही हैं।  

अध्ययन में अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई, पुणे, शिमला और वाराणसी जैसे शहरों के डेटा का विश्लेषण किया गया है। विशेषज्ञों ने खुलासा किया कि PM2.5 जैसे छोटे प्रदूषक सभी उम्र के लोगों की सेहत को प्रभावित कर रहे हैं। ये प्रदूषक फेफड़ों और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं, जिसके कई प्रकार के दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

गौरतलब है कि वायु प्रदूषण के कारण मस्तिष्क, फेफड़ों सहित शरीर के कई अंगों को गंभीर क्षति होने का खतरा हो सकता है। राजधानी दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण गंभीर चिंता का विषय रहा है।
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वायु प्रदूषण की बढ़ती समस्या - फोटो : istock
पीएम 2.5 का बढ़ता जा रहा है खतरा

अध्ययनकर्ताओं ने कहा, साल के ज्यादातर महीनों में राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ रहता है। दिल्ली में दैनिक और वार्षिक मौतों का बड़ा कारण पीएम 2.5 वायु प्रदूषण को माना जा रहा है। 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले कण सांस के माध्यम से आसानी से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। वाहनों और औद्योगिक क्षेत्रों को प्रदूषण बढ़ाने का प्रमुख कारण माना जा रहा है। 

राष्ट्रीय राजधानी में हर साल वायु प्रदूषण से जुड़ी करीब 12,000 मौतें दर्ज की जाती हैं, जो कुल मौतों का 11.5 प्रतिशत है।
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प्रदूषण के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Amarujala
प्रदूषण के कारण दीर्घकालिक बीमारियों का जोखिम

शोधकर्ताओं ने कहा कि भारतीय शहरों में पीएम 2.5 प्रदूषण के कारण कई अंगों से संबंधित बीमारियों का जोखिम भी बढ़ता जा रहा है। लंबे समय तक प्रदूषकों के संपर्क में रहने के कारण फेफड़ों-हृदय और सांस से संबंधित दीर्घकालिक बीमारियों का खतरा हो सकता है। 

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और नई दिल्ली के क्रॉनिक डिजीज कंट्रोल सेंटर के शोधकर्ताओं ने साल 2008 से 2019 तक दस भारतीय शहरों में लगभग 36 लाख दैनिक मौतों का विश्लेषण किया। हार्वर्ड विश्वविद्यालय में विशेषज्ञ और अध्ययन के सह लेखक जोएल श्वार्ट्ज कहते हैं, वायु गुणवत्ता में सुधार करके प्रति वर्ष हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है।
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मस्तिष्क से संबंधित समस्याएं - फोटो : istock
हृदय और मस्तिष्क के लिए खतरनाक

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वायु प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों को प्रभावित करने वाली समस्या नहीं है। इससे हृदय, मस्तिष्क से संबंधित बीमारियों का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है। हार्वर्ड विशेषज्ञों ने बताया, अगर आप प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं तो इससे हमारे मस्तिष्क पर सीधा प्रभाव पड़ता है। प्रमाण बताते हैं कि वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से संज्ञानात्मक गिरावट और अल्जाइमर-पार्किंसंस सहित न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।

इतना ही नहीं कुछ शोध में ये भी कहा गया है कि प्रदूषकों के अधिक संपर्क में रहने के कराण हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा भी काफी बढ़ सकता है। 


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स्रोत और संदर्भ
Ambient air pollution and daily mortality in ten cities of India: a causal modelling study


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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