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Air Pollution: दिल्ली के अस्पतालों में अचानक बढ़ी मरीजों की संख्या, एम्स के डॉक्टर ने दिया ये जरूरी सुझाव

Mon, 15 Dec 2025 04:20 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Rising AQI And Health Risks: दिल्ली- NCR में इन दिनों प्रदूषण अपने चरम पर है, इसका असर दिल्ली के अस्पतालों पर भी देखने को मिल रहा है। एम्स के डॉक्टर ने इसी विषय पर कुछ जरूरी बातें बताई हैं, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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वायू प्रदूषण - फोटो : Amar Ujala
AIIMS Doctor Pollution Advice: प्रदूषण, कोहरा, धुंध और सर्दी दिल्ली इन दिनों चौतरफा मार झेल रही है। वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर अब सीधे तौर पर लोगों की सेहत पर दिखने लगा है, जिससे क्षेत्र के अस्पतालों में सांस संबंधी मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। AIIMS दिल्ली के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सौरभ मित्तल के अनुसार अस्पताल की ओपीडी में सांस से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 

डॉ. मित्तल ने इस बात पर जोर दिया कि बीता हुआ रविवार इस साल सबसे अधिक AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स) वाला दिन रहा है। बता दें कि बीते रविवार को दिल्ली का औसत एक्यूआई 461 थी। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, उन्होंने लोगों को खुद को सुरक्षित रखने के लिए कई आवश्यक सुझाव दिए हैं। यह स्पष्ट है कि अगर प्रदूषण का यह लेवल लंबे समय तक बना रहा, तो अस्थमा और COPD जैसी दीर्घकालिक बीमारियों के विकसित होने का खतरा बढ़ जाएगा।
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सर्दी-जुकाम - फोटो : Freepik.com
नए और पुराने दोनों मरीजों की संख्या में वृद्धि
डॉ. सौरभ मित्तल ने बताया कि OPD में ऐसे मरीज भी आ रहे हैं, जिन्हें पहले कोई समस्या नहीं थी, लेकिन अब उन्हें खांसी, गले में खराश और जुकाम जैसी समस्याएं हो रही हैं। वहीं, अस्थमा या COPD के पुराने मरीजों में अटैक की आवृत्ति बढ़ गई है, जिसके लिए उन्हें इनहेलर, नेबुलाइजर या यहां तक कि ओरल स्टेरॉइड्स भी देने पड़ रहे हैं।

 
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वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए बढ़ा खतरा
डॉक्टर ने चेतावनी दी कि यह प्रदूषण सभी को प्रभावित करता है, लेकिन बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह सबसे अधिक समस्या पैदा करता है। छोटे बच्चों और वृद्ध लोगों में प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण वे प्रदूषण जनित बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहने पर अस्थमा और COPD जैसी बीमारियां विकसित होने की आशंका बढ़ाती है।

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वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
घर के अंदर रहें और दरवाजे-खिड़कियां बंद रखें
प्रदूषण से बचाव का सबसे अच्छा तरीका यह है कि जब तक बिल्कुल आवश्यक न हो, तब तक बाहर न जाएं। यदि आपको बाहर जाना ही पड़े, तो N95 मास्क पहनें। इसके अलावा, लोगों को घर के अंदर ही रहने और अपने खिड़कियों तथा दरवाजों को बंद रखने की सलाह दी गई है ताकि प्रदूषित हवा घर में प्रवेश न कर सके।

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वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
छोटे कमरों के लिए एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल
डॉ. मित्तल ने सुझाव दिया कि अगर संभव हो और अगर आपका कमरा छोटा है, तो आप एयर प्यूरीफायर का उपयोग कर सकते हैं। एयर प्यूरीफायर कमरे के अंदर की हवा की गुणवत्ता में सुधार कर सकता है, जिससे घर के भीतर सांस लेना सुरक्षित हो जाता है। यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से सहायक है जो पहले से ही सांस की बीमारियों से पीड़ित हैं।
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सांस की समस्या - फोटो : Adobe Stock
लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सीय सलाह लें
डॉक्टर ने यह भी सलाह दी कि अगर किसी को लगातार खांसी, सांस लेने में तकलीफ, या गले में गंभीर खराश जैसे लक्षण महसूस हों, तो खुद से उपचार करने के बजाय तुरंत किसी चिकित्सक से परामर्श लें। अस्थमा या COPD के मरीजों को अपने इनहेलर और अन्य दवाएं हमेशा अपने पास रखनी चाहिए।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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