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Air Pollution: जीन को भी नुकसान पहुंचा रही है प्रदूषित हवा, आने वाली पीढ़ियां भी खतरे में

Mon, 10 Nov 2025 07:07 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • प्रदूषण के दुष्प्रभावों को लेकर एक अन्य अध्ययन की रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया है कि प्रदूषण का असर आने वाली पीढ़ियों की सेहत के लिए भी दिक्कतें बढ़ाने वाला हो सकता है, यानी इसके दुष्प्रभाव दीर्घकालिक हो सकते हैं।
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वायु प्रदूषण के व्यापक दुष्प्रभाव - फोटो : Freepik.com
राजधानी दिल्ली-एनसीआर में पिछले एक महीने से वायु प्रदूषण का व्यापक प्रकोप देखा जा रहा है। कुछ हफ्तों से एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) खराब और बेहद खराब स्तर पर बना हुआ है, जिसे सेहत के लिए गंभीर माना जा रहा है। अस्पतालों से मिल रही जानकारियों के मुताबिक वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों के कारण ओपीडी में सांस की समस्या, सिरदर्द की शिकायत वाले मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ वायु प्रदूषण को दिल, फेफड़े की बीमारियों से पहले से पीड़ित लोगों के लिए और भी खतरनाक बताते हैं।

वायु प्रदूषण के कारण होने वाले दुष्प्रभावों से संबंधित अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि प्रदूषण के कारण आंखों में जलन और चुभन की समस्या तो बढ़ी ही है साथ ही इससे अस्थमा अटैक जैसी समस्याएं भी ट्रिगर हो सकती हैं। लिहाजा जोखिमों को देखते हुए वरिष्ठ श्वसन रोग विशेषज्ञ ने सांस के मरीजों को अगले कुछ हफ्तों के लिए दिल्ली छोड़ने की सलाह दी है।

प्रदूषण के दुष्प्रभावों को लेकर एक अन्य अध्ययन की रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया है कि प्रदूषण का असर आने वाली पीढ़ियों की सेहत के लिए भी दिक्कतें बढ़ाने वाला हो सकता है, यानी इसके दुष्प्रभाव दीर्घकालिक हो सकते हैं।
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वायु प्रदूषण का सेहत पर असर - फोटो : Adobe stock
वायु प्रदूषण के कारण होने वाले गंभीर दुष्प्रभाव

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मॉलिक्यूलर साइंसेज में प्रकाशित रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने कहा कि प्रदूषित हवा में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कण)  धातुओं का धूल और मिट्टी मानव स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करते हैं। लंबे समय तक ऐसी हवा के संपर्क में रहने वाले लोगों के जीन में भी समस्या आने के परिणाम मिले हैं।

प्रदूषित हवा, कुछ जीनों को अनुचित रूप से सक्रिय जबकि कुछ को निष्क्रिय कर सकती है, जिसके दीर्घकालिक दुष्प्रभावों का खतरा बढ़ जाता है।
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प्रदूषण के कारण डीएनए में परिवर्तन - फोटो : Adobe Stock Images
डीएनए पर भी हो रहा प्रदूषण का असर

यूनिर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के शोधकर्ताओं ने वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों को समझने के लिए प्रतिभागियों के जीन में होने वाले बदलावों को लेकर अध्ययन किया। 

अध्ययन के लिए प्रतिभागियों को एक पॉलीकार्बोनेट से घिरे बूथ में रखा गया, जो लगभग एक सामान्य बाथरूम के आकार का था। शोधकर्ताओं ने जांच के दौरान ये समझने की कोशिश की कि प्रदूषण के संपर्क से उस रासायनिक "कोटिंग" पर क्या प्रभाव पड़ता है जो किसी व्यक्ति के डीएनए से जुड़ी होती है।

इसमें पाया गया कि प्रदूषित हवा कार्बन-हाइड्रोजन कोटिंग (मिथाइलेशन) जीन को निष्क्रिय या मंद कर सकती है, जिससे वह प्रोटीन का उत्पादन नहीं कर पाता।

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वैज्ञानिकों का अध्ययन - फोटो : Freepik.com
अध्ययन में क्या पता चला?

अध्ययन में पाया गया कि डीजल के धुएं से लोगों के डीएनए में लगभग 2,800 अलग-अलग बिंदुओं पर मिथाइलेशन में बदलाव आया, जिससे लगभग 400 जीन प्रभावित हुए। कुछ जगहों पर इससे मिथाइलेशन बढ़ा और कुछ मामलों में इससे मिथाइलेशन कम हुआ। जीन अभिव्यक्ति में ये बदलाव स्वास्थ्य पर कैसे असर डालते हैं, यह शोधकर्ताओं के लिए अगला कदम है। लेकिन यह अध्ययन दर्शाता है कि वायु प्रदूषण के प्रति हमारी आनुवंशिक मशीनरी कितनी कमजोर हो सकती है।

अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. क्रिस कार्लस्टन कहते हैं, आमतौर पर जब हम वायु प्रदूषण के प्रभावों को देखते हैं, तो हम उन चीजों को मापते हैं जो चिकित्सकीय रूप से स्पष्ट होती हैं जैसे रक्तचाप, हृदय गति। इस अध्ययन में हमने पाया कि प्रदूषण के कारण जीन से संबंधित समस्याएं भी हो सकती हैं, जिसका असर संभावित रूप से आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ सकता है। 
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वायु प्रदूषण संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बढ़ाता खतरा - फोटो : Freepik.com
प्रदूषण और इसके खतरे

अध्ययनकर्ता कहते हैं, वायु प्रदूषण पूरी दुनिया के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। अगर इसकी रोकथाम के लिए व्यापक उपाय न किए गए तो भविष्य में इसके व्यापक दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। बढ़ता प्रदूषण जीन को भी प्रभावित करता है ये निश्चित ही गंभीर चिंता का विषय है। 



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स्रोत
Air pollution and DNA methylation: effects of exposure in humans

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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