वैज्ञानिकों का अध्ययन
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अध्ययन में क्या पता चला?
अध्ययन में पाया गया कि डीजल के धुएं से लोगों के डीएनए में लगभग 2,800 अलग-अलग बिंदुओं पर मिथाइलेशन में बदलाव आया, जिससे लगभग 400 जीन प्रभावित हुए। कुछ जगहों पर इससे मिथाइलेशन बढ़ा और कुछ मामलों में इससे मिथाइलेशन कम हुआ। जीन अभिव्यक्ति में ये बदलाव स्वास्थ्य पर कैसे असर डालते हैं, यह शोधकर्ताओं के लिए अगला कदम है। लेकिन यह अध्ययन दर्शाता है कि वायु प्रदूषण के प्रति हमारी आनुवंशिक मशीनरी कितनी कमजोर हो सकती है।
अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. क्रिस कार्लस्टन कहते हैं, आमतौर पर जब हम वायु प्रदूषण के प्रभावों को देखते हैं, तो हम उन चीजों को मापते हैं जो चिकित्सकीय रूप से स्पष्ट होती हैं जैसे रक्तचाप, हृदय गति। इस अध्ययन में हमने पाया कि प्रदूषण के कारण जीन से संबंधित समस्याएं भी हो सकती हैं, जिसका असर संभावित रूप से आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ सकता है।