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Covid-19: दो नए वैरिएंट्स EG.5 और BA.2.86 का दुनियाभर में बढ़ता खतरा, जानिए कौन सा है सबसे खतरनाक

Thu, 24 Aug 2023 12:18 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नए कोरोना वैरिएंट्स से खतरा - फोटो : istock
कोरोना, वैश्विक स्तर पर पिछले तीन साल से अधिक समय से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बना हुआ है, हालिया रिपोर्ट्स में दो नए वैरिएंट्स एरिस (EG.5) और BA.2.86 को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ अलर्ट कर रहे हैं। इन वैरिएंट्स में अतिरिक्त म्यूटेशनों के बारे में पता चला है जो इसकी संक्रामकता दर और शरीर में बनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को आसानी से चकमा देने में सफल हो रहे हैं।

एरिस वैरिएंट के कारण कई देशों में संक्रमण और अस्पताल में भर्ती लोगों के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं, वहीं BA.2.86 की संक्रामकता दर काफी अधिक हो सकती है, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ अलर्ट कर रहे हैं।

कोरोना के ये दोनों वैरिएंट्स काफी नए हैं और इनके बारे में अभी ज्यादा अध्ययन उपलब्ध नहीं है, फिर भी प्रारंभिक शोध के आधार पर बताया जा रहा है कि BA.2.86 अब तक के ओमिक्रॉन का सबसे म्यूटेटेड वर्जन हो सकता है। अब सवाल ये है कि इन दोनों नए वैरिएंट्स में कौन सा सबसे खतरनाक है और इनसे संक्रमण से बचाव के लिए क्या प्रयास किए जा सकते हैं? आइए इस बारे में आगे विस्तार से समझते हैं।
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कोरोना के नए वैरिएंट्स का खतरा - फोटो : istock
नए वैरिएंट्स को लेकर विशेषज्ञों ने किया अलर्ट

नए वैरिएंट्स को लेकर किए गए प्रारंभिक अध्ययनों में वैज्ञानिक बताते हैं, इन वैरिएंट्स की प्रकृति को देखते हुए महामारी जैसा अब कोई खतरा नहीं है, लेकिन कोरोना को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। यूके, चीन, इजराइल, डेनमार्क और संयुक्त राज्य अमेरिका में इन वैरिएंट के मामले बढ़ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने वैरिएंट की प्रकृति को देखते हुए BA.2.86 को 'वैरिएंट अंडर मॉनिटरिंग' के रूप में वर्गीकृत किया है। इसका मतलब यह है कि इन वैरिएंट्स पर खास निगरानी रखी जा रही है।

अध्ययनर्ता कहते हैं, कोविड का नया वैरिएंट BA.2.86 एरिस से ज्यादा खतरनाक हो सकता है।
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कोरोना का नया वैरिएंट BA.2.86 - फोटो : Pixabay
BA.2.86 की प्रकृति हो सकती है चिंताजनक

यूनाइटेड किंगडम में तेजी से बढ़ रहे एरिस के बाद, नया कोविड-19 वैरिएंट BA.2.86 भी दुनियाभर में फैल गया है। यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार, यह SARS-CoV-2 के ओमिक्रॉन का ही नया उप-वैरिएंट है, इसकी पहचान सबसे पहले 2022 में डेनमार्क में हुई थी।

वैज्ञानिकों ने पाया कि इस वैरिएंट की एंटीजेनिक और स्पाइक संरचनाओं में बड़े पैमाने पर बदलाव नजर आ रहा है जो ACE2 रिसेप्टर्स के प्रति आकर्षण बढ़ा सकता है और सबसे गंभीर बात शरीर में वैक्सीनेशन और संक्रमण से बनी प्रतिरक्षा को आसानी से चकमा दे सकता है।

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नए वैरिएंट्स में अतिरिक्त म्यूटेशंस - फोटो : Pixabay
नए वैरिएंट्स की संक्रामकता हो सकती है अधिक

सीडीसी विशेषज्ञ कहते हैं, नए वैरिएंट्स ओमिक्रॉन का ही प्रतिरूप हैं और ओमिक्रॉन के कारण गंभीर रोग विकसित होने का जोखिम कम देखा जाता रहा है, ऐसे में इनसे गंभीर रोग का खतरा होने की आशंका भी कम है। हालांकि हमने दुनियाभर में एरिस के अधिक मामलों की पहचान की है, जिनमें संक्रमण की उच्च दर है। वहीं BA.2.86 के स्पाइक प्रोटीन में अधिक म्यूटेशन देखे गए हैं, ऐसे में इससे संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है। हालांकि नए वैरिएंट्स की प्रकृति के बारे में अब भी अध्ययनों में समझने की कोशिश जारी है। 
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कोरोना से बचाव के करें उपाय - फोटो : istock
संक्रमण से बचाव के करते रहें उपाय

अमर उजाला से बातचीत में ग्रेटर नोएडा स्थित अस्पताल में इंटेंसिव केयर के डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव बताते हैं, देश में फिलहाल कोरोना की स्थिति काफी नियंत्रित है, दैनिक स्तर पर औसत 50 नए लोगों में संक्रमण देखा जा रहा है। हालांकि हमेशा ध्यान रखा जाना चाहिए कि कोरोना वायरस लगातार म्यूटेट होकर नए वैरिएंट्स ला रहा है, जिसको ध्यान में रखते हुए बचाव के उपाय करते रहना जरूरी है।

हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखना, भीड़-भाड़ वाले स्थानों में मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते रहना हमें अपने दिनचर्या का हिस्सा बना लेना चाहिए, ये कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों से सुरक्षा में मददगार हो सकती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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