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Covid-19: अंगुलियों की लंबाई से भी लगाया जा सकता है लॉन्ग कोविड के जोखिम का अंदाजा, वैज्ञानिकों ने किया बड़ा दावा

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उंगलियां बताएंगी कोविड-19 का खतरा - फोटो : Pixabay
पिछले दो साल से अधिक समय से वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना महामारी ने लोगों को अलग-अलग तरह से प्रभावित करता है। कोरोना के सामने आए डेल्टा वैरिएंट के कारण जहां लोगों को गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का सामना करना पड़ा, वहीं ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स को अधिक संक्रामक माना जाता है। हाल ही में वैज्ञानिकों की एक टीम ने कोरोना के सबसे संक्रामक माने जा रहे XE वैरिएंट को लेकर भी अलर्ट जारी किया है। कोरोना को लेकर अब तक हुए तमाम शोध जीन, लिंग, पर्यावरण, आहार और कई अन्य कारकों को संक्रमण का संभावित जोखिम मानते आ रहे हैं। कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में कोरोना संक्रमण का जोखिम स्वाभाविक तौर पर अधिक बताया जाता रहा है।

कोरोना संक्रमण और लॉन्ग कोविड के जोखिम कारकों को जानने के लिए अध्ययन कर रही वैज्ञानिकों की एक टीम ने संक्रामक वायरस की प्रकृति को समझने की कोशिश की। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि किसी व्यक्ति के अंगुली की लंबाई बता सकती है कि उसे संक्रमण से ठीक होने के बाद लॉन्ग कोविड का कितना खतरा है? यानि कि आप अपने अंगुली का परीक्षण करके जोखिम का अंदाजा लगा सकते हैं। आइए आगे की स्लाइडों में इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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उंगलियों की लंबाई और कोविड-19 को लेकर अध्ययन - फोटो : istock
उंगलियों की लंबाई और कोविड-19 का खतरा
यूके की स्वान्सी यूनिवर्सिटी, पोलैंड की मेडिकल यूनिवर्सिटी ऑफ़ लॉड्ज़ और स्वीडन के करोलिंस्का यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं की एक टीम ने कोरोना के जोखिम कारकों को समझने के लिए अध्ययन किया। इस दौरान पाया गया कि जिन लोगों की रिंग फिंगर यानी अनामिका, तर्जनी की तुलना में ज्यादा छोटी होती है, ऐसे लोगों में कोरोना संक्रमण की गंभीरता को खतरा अधिक हो सकता है। इसके अलावा, जिन लोगों के दाएं और बाएं हाथ की अंगुलियों के बीच के अंतर अधिक होता है, उनमें संक्रामक वायरस से गंभीर जटिलताओं और लॉन्ग कोविड का खतरा अधिक हो सकता है।
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कोरोना संक्रमण के जोखिम कारक - फोटो : iStock
हार्मोन्स और कोविड के जोखिम का संबंध
जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों की अंगुली की लंबाई की जांच करके हार्मोन के स्तर का पता लगाने वाले पिछले अध्ययनों का मूल्यांकन किया। इस अध्ययन के अनुसार, अनामिका अंगुली का लंबा होना गर्भ में विकास के दौरान हाई टेस्टोस्टेरोन के स्तर का संकेत माना जाता है। वहीं तर्जनी का लंबा होना उच्च एस्ट्रोजन के स्तर का संकेत होता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि टेस्टोस्टेरोन और कोविड-19 की गंभीरता के बीच एक कड़ी हो सकती है। 

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उंगलियों की माप और कोविड-19 का जोखिम - फोटो : iStock
अध्ययन में क्या पता चला?
इस शोध के लिए वैज्ञानिकों ने 154 प्रतिभागियों को शामिल किया, इनमें से 54 लोग कोविड-19 से रह चुके संक्रमित थे। इन प्रतिभागियों को दोनों हाथ की अंगुलियों की लंबाई मापी गई। अध्ययन के अंत में शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों की दूसरी-चौथी अंगुली और तीसरी-पांचवीं अंगुली के बीच का अंतर अधिक होता है, उन्हें अन्य लोगों की तुलना में गंभीर संक्रमण होने और बाद में लॉन्ग कोविड का खतरा भी अधिक हो सकता है। 
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कोरोना के खतरे को लेकर रहें अलर्ट - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं शोधकर्ता?
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन का सीधा सा मतलब है कि टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी और एस्ट्रोजन की अधिकता, लोगों में गंभीर कोरोनावायरस संक्रमण और बाद में पोस्ट कोविड जटिलताओं के जोखिम को बढ़ा सकती है। चूंकि अध्ययन का दायरा छोटा है, ऐसे में यह पर्यावरणीय और तमाम मूल के लोगों में कितना फिट बैठता है, इसके लिए विस्तृत शोध की आवश्यकता है। फिलहाल हार्मोन के स्तर को ध्यान में रखा जाना चाहिए। 
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कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का हमेशा ख्याल रखें - फोटो : Pixabay
कोरोना से बचाव बहुत आवश्यक
विशेषज्ञों की टीम का कहना है कि जिस तरह से दुनिया के कई देशों में कोरोना के नए और अति संक्रामक वैरिएंट्स का खतरा बढ़ता जा रहा है, ऐसे में सभी लोगों को संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक उपायों में किसी तरह की कोई लापरवाही बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। टीकाकरण करवाना, मास्क पहनना, सामाजिक दूरी और हाथों की उचित स्वच्छता बनाए रखना आपको संक्रमण से सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है। सभी लोगों को कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का हमेशा ख्याल रखना चाहिए।


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स्रोत और संदर्भ
Digit ratios and their asymmetries as risk factors of developmental instability and hospitalization for COVID-19

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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