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Covid-19: नए वैरिएंट्स से बचाव के लिए वैज्ञानिकों ने इस तरीके को पाया सबसे कारगर, आप भी जल्द करें ये काम

Sun, 01 Jan 2023 01:55 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के बढ़ते संक्रमण से कैसे बचें? - फोटो : Pixabay
चीन सहित दुनिया के कई देशों में कोरोना के कारण हालात काफी बिगड़ गए हैं। चीन में संक्रमण के साथ-साथ मृत्युदर भी अधिक देखा जा रहा है, जिसने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। शोधकर्ताओं के मुताबिक कोरोना के जिस BF.7 वैरिएंट के कारण चीन में तबाही देखी जा रही है, असल में वह हल्के लक्षणों वाला वैरिएंट है पर चूंकि चीन में दी गई वैक्सीन की प्रभावशीलता काफी कम है, जीरो-कोविड पॉलीसी के कारण यहां हर्ड इम्युनिटी भी नहीं बन पाई है, यही कारण है कि चीन में मामलों की गंभीरता काफी अधिक है।

हालिया रिपोर्ट्स में अमेरिका में कोरोना के नए वैरिएंट XBB.1.5 के कारण संक्रामकता और गंभीर रोग के मामले भी देखे जा रहे हैं। भारत में भी इस वैरिएंट के कारण संक्रमण का पहला केस सामने आया है।

संक्रमण के बढ़ते खतरे के जोखिम से बचाव के लिए शोधकर्ताओं ने सभी देशों से बूस्टर डोज की दर में तेजी लाने की अपील की है।
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नए वैरिएंट्स पर असरदार है बूस्टर शॉट - फोटो : iStock

कोविड-19 के बूस्टर डोज की जरूरत

यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया स्कूल ऑफ मेडिसिन के हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने कोविड-19 के बूस्टर डोज के फायदों पर चर्चा की। वैज्ञानिकों का कहना है कि सभी देशों को वैक्सीन की बूस्टर डोज देने में तेजी लाने की जरूरत है, ऐसा करके अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित किया जा सकेगा। संक्रमण के बढ़ते वैश्विक खतरे की चेन को तोड़ने और अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित करने के लिए फिलहाल यही सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है।
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बूस्टर डोज को पाया गया कारगर - फोटो : ANI
संक्रमण से बचा सकती है वैक्सीन की बूस्टर डोज

वैक्सीन की बूस्टर डोज कितनी असरदार हो सकती है, इस बारे में जानने के लिए फाइजर और मॉडर्ना के एमआरएनए टीकों पर शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया। साइंटिफिक जर्नल एनल्स ऑफ एलर्जी, अस्थमा एंड इम्यूनोलॉजी में प्रकाशित शोध के अनुसार वैक्सीन की बूस्टर खुराक देकर लोगों में अधिक टिकाऊ और प्रभावी एंटीबॉडीज को बढ़ावा दिया जा सकता है, संक्रमण से बचाने में यह महत्वपूर्ण भूमिक निभा सकती है।

वायरस से संक्रमित होकर ठीक हो चुके लोगों में भी इसके प्रभावी परिणाम देखे गए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि बूस्टर खुराक से बनी एंटीबॉडीज नए वैरिएंट्स के खतरे से भी सुरक्षा देने में प्रभावी हैं।

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बूस्टर शॉट से बढ़ती है एंडीबॉडी - फोटो : Pixabay
अध्ययन में क्या पता चला?

बूस्टर शॉट्स के प्रभावों का आकलन करने के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने 117 लोगों का वैक्सीनेशन करने के बाद उनमें एंटीबॉडी के स्तर को ट्रैक किया। इन लोगों की तुलना वैक्सीन की प्राथमिक दो डोज ले चुके लोगों से की गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि एक सप्ताह से 31 दिनों तक दोनों समूहों के एंटीबॉडी का स्तर समान था, लेकिन उसके बाद प्राथमिक टीकाकरण वाले समूह की तुलना में बूस्टर शॉट से निर्मित एंटीबॉडीज को अधिक प्रभावी पाया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि इस तरह से बूस्टर शॉट लेकर लोगों को कोरोना के खतरे से अधिक सुरक्षित किया जा सकता है।
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बूस्टर वैक्सीन से बनीं एंटीबॉडीज ज्यादा समय तक टिकने वाली - फोटो : iStock
बूस्टर शॉट्स की एंटीबॉडीज अधिक प्रभावी

प्रमुख शोधकर्ता और विश्वविद्यालय में इम्यूनोलॉजी विभाग के प्रोफेसर जेफरी विल्सन कहते हैं, परिणाम बताते हैं बूस्टर शॉट्स वैक्सीन द्वारा निर्मित एंटीबॉडी के स्थायित्व को बढ़ावा दे सकते हैं। फाइजर की तुलना में मॉडर्ना की वैक्सीन से बनीं एंटीबॉडीज ज्यादा समय तक टिकने वाली साबित हुईं हैं। अध्ययन अवधि के अंत में, मॉडर्ना की एंटीबॉडी का स्तर फाइजर के स्तर से पांच महीने अधिक प्रभावी पाए गए।

शोधकर्ताओं का कहना है कि अन्य अध्ययनों में अलग-अलग वैक्सीन के बूस्टर शॉट्स को भी अधिक सुरक्षात्मक पाया गया है। 
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जल्द लगवाएं बूस्टर डोज - फोटो : PTI
ओमिक्रॉन पर प्रभावी है कॉर्बेवैक्स का बूस्टर डोज

आंकड़ों के मुताबिक भारत में वैक्सीनेशन और बूस्टर शॉट की दर अच्छी देखी जा रही है। यहां ज्यादातर लोगों को स्वदेशी कोवाक्सिन या कोविशील्ड के टीके लगे हैं। एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को कोविशील्ड के प्राथमिक टीके लगाए गए हैं उनको अगर कॉर्बेवैक्स का बूस्टर डोज दिया जाए तो ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ अधिकतम सुरक्षा प्राप्त की जा सकती है। ऐसे लोगों में मेमोरी टी-सेल्स और प्रतिरक्षा कोशिकाएं अधिक प्रभावी पाई गई हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ओमिक्रॉन के बढ़ते वैश्विक जोखिम के बीच यह तरीका अधिक प्रभावी हो सकता है।



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स्रोत और संदर्भ

Acute and postacute sequelae associated with SARS-CoV-2 reinfection

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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