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इस चैंबर से गुजरते ही खत्म हो जाएंगे वायरस, दावा- संक्रमण रोकने में होगी कारगर

Wed, 20 May 2020 08:21 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पहले भी अलग तरह के सैनिटाइजेशन चैंबर बनाए जा चुके हैं - फोटो : Social Media
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए वैज्ञानिक और शोधकर्ताओं की टीम तरह-तरह के उपाय तलाशने में लगे हैं। कोरोना की दवा और वैक्सीन के लिए दुनियाभर के विभिन्न देशों में शोध हो रहे हैं। वहीं भारत में भी वैज्ञानिक इसके लिए प्रयासरत हैं। कोरोना संक्रमण रोकने के उपायों ढूंढने के प्रयासों की कड़ी में आईआईटी कानपुर से एक अच्छी खबर आई है। यहां के शोधकर्ताओं ने डीकांटेमिनेशन यानी कीटाणुशोधन चैंबर तैयार किया है। लॉकडाउन 4.0 के तहत मिली छूट के बाद सशर्त सामान्य गतिविधियां शुरू हो रही है और ऐसे में ये कीटाणुशोधन चैंबर संक्रमण रोकने में कारगर साबित हो सकती है। 
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गतिविधि पर ध्यान रखना जरूरी है
सार्वजनिक जगहों पर होगा कारगर
  • इस चैंबर की मदद से अस्पताल, शॉपिंग मॉल, बस स्टैंड जैसे अन्य संवेदनशील इलाकों में कोरोना जैसे वायरस को प्रवेश करने से रोका जा सकेगा। इस कीटाणुशोधन चैंबर के बारे में दावा किया जा रहा है कि इस होकर प्रवेश करने वाले के शरीर या कपड़ों पर लगे 90 फीसदी कीटाणु मर जाते हैं। 
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कोरोना वायरस जांच (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
दो तकनीक से नष्ट होते हैं कीटाणु
  • इस चैंबर में स्प्रे और हीटिंग चक एक साथ लगे हैं। आईआईटी के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर के मुताबिक इस चैंबर को फिलहाल कानपुर के संवेदनशील इलाकों में लगाने के लिए प्रस्ताव रखा गया है। आईआईटी कंप्यूटर साइंस विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. मणींद्र अग्रवाल के मुताबिक, इसे यूनिक चैंबर में स्प्रे और हीटिंग अलग-अलग हैं, जो  मिलकर कीटाणुओं को नष्ट कर देते हैं।

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थर्मल स्क्रीनिंग करते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
इस तरीके से मरते हैं कीटाणु
  • इसमें पहले स्प्रे चैंबर है, जिसमें एक विशेष केमिकल का स्प्रे होता है। यह काफी हद तक कीटाणु मार देता है। इसके साथ एक हीटिंग चैंबर भी जुड़ा है, जहां तापमान करीब 65 डिग्री रहता है। इसमें प्रवेश करते ही व्यक्ति के शरीर का तापमान अचानक 30 डिग्री बढ़ जाता है, जिससे बचे-खुचे कीटाणु मर जाते हैं। इस सेंसर युक्त चैंबर को ऑपरेट करने के लिए किसी की जरूरत नहीं होती है।
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50 हजार आएगी लागत
  • प्रो. मणींद्र अग्रवाल के मुताबिक इस चैंबर की लागत करीब 50 हजार रुपये आएगी। इसमें लगने वाले उपकरण भी देश में आसानी से उपलब्ध हैं। इसलिए इसके उत्पादन में किसी तरह की दिक्कत भी नहीं होगी। मालूम हो कि आईआईटी के वैज्ञानिक इससे पहले सस्ती पीपीई किट, पोर्टेबल वेंटिलेटर वगैरह तैयार कर चुके हैं।
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