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Covid-19 Update: वैज्ञानिकों ने बताया- इस वैरिएंट से रि-इंफेक्शन का खतरा अधिक, लॉन्ग कोविड में ऐसी गलती न करें

Sat, 13 Aug 2022 06:09 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना से रि-इफेक्शन का खतरा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
देशभर में कोरोना का संक्रमण एक बार फिर से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। विशेषकर राजधानी दिल्ली में पिछले एक सप्ताह के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि यहां रोजाना संक्रमितों की संख्या दो हजार के आंकड़े को पार कर रही है। इस बीच हालिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दिल्ली में ओमिक्रॉन का एक और नया वैरिएंट सामने आया है जिसे अध्ययनों में बेहद संक्रामकता दर वाला बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि जिस प्रकार से इस नए वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में म्यूटेशन देखे गए हैं, ऐसे में आशंका है कि यह अब तक के सबसे संक्रामक माने जा रहे BA.5 वैरिएंट को भी पछाड़ सकता है।

विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो कोरोना के कारण गंभीर रोग के मामलों का खतरा काफी कम है, पर कोरोना अभी भी कुछ स्थितियों में गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। इस जोखिम को ध्यान में रखते हुए सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहना चाहिए।

हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि ओमिक्रॉन का बीए.5 वैरिएंट कई तरह से लोगों के लिए मुश्किलों का कारण बन सकता है, इससे रि-इंफेक्शन का खतरा भी अन्य वैरिएंट्स की तुलना में अधिक बताया जा रहा है। आइए इस अध्ययन के बारे में जानते हैं।
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कोविड से रि-इफेक्शन का खतरा - फोटो : PTI
BA.5 से रि-इंफेक्शन का खतरा

पुर्तगाली शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि ओमिक्रॉन के अन्य वैरिएंट्स की तुलना में BA.5 के कारण पुन: संक्रमण की उच्च आशंका देखी गई है। इतनी ही नहीं शोधकर्ताओं का कहना है कि यह वैरिएंट आपमें हर महीने संक्रमण का कारण बन सकता है। 27 हजार से अधिक कोरोना संक्रमितो में Omicron BA.2 और BA.5 के बीच तुलनात्मक विश्लेषण में वैज्ञानिकों ने पाया कि इससे संक्रमित लोगों को लगातार विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता हो सकती है। 
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कोरोना का BA.5 वैरिएंट खतरनाक - फोटो : istock
अध्ययन में क्या पता चला?

अध्ययन में शामिल 27702 पॉजिटिव प्रतिभागियों में से 25 अप्रैल से 10 जून, 2022 के बीच 15396 BA.2 वैरिएंट और 12306 BA.5 से संक्रमित थे। इन प्रतिभागियों के डेटा विश्लेषण के आधार पर वैज्ञानिकों की टीम ने बीए.5 के कारण रि-इंफेक्शन का जोखिम अधिक पाया। अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक संक्रमितों में बीए.2 की तुलना में बीए.5 से पुन: संक्रमण के खिलाफ सुरक्षा कम देखी गई। हालांकि ऐसे लोगों को यदि वैक्सीन की बूस्टर डोज दे दी जाए तो उनमें रोग की गंभीरता और मृत्यु के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। गौरतलब है कि देश में पिछले दिनों इस वैरिएंट के कारण संक्रमितों को मामले सामने आए थे।

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लॉन्ग कोविड के जोखिम को जानिए - फोटो : iStock
लॉन्ग कोवि़ड में न करें व्यायाम

वहीं एक अन्य अध्ययन में विशेषज्ञों ने लॉन्ग कोविड के शिकार लोगों को अपने जोखिमों को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह दी है। शोधकर्ताओं ने बताया कि जिन लोगों को लॉन्ग कोविड की समस्या है उन्हें व्यायाम से बचना चाहिए। वैसे तो व्यायाम को स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता रहा है, हालांकि अगर आपमें पोस्ट कोविड से संबंधित जटिलताओं की समस्या है तो ऐसे में व्यायाम के कारण आपके लक्षणों के गंभीर होने का खतरा हो सकता है, इस बारे में सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहना चाहिए।
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लॉन्ग कोविड में व्यायाम से बचें - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

ब्रिटिश विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में 500 लॉन्ग कोविड के शिकार लोगों को शामिल किया गया जिनमें से 75 प्रतिशत ने बताया कि व्यायाम करने से उनके लक्षण गंभीर हो गए। मायो क्लिनिक की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लोगों में लॉन्ग कोविड में मायोकार्डिटिस की समस्या देखी जा रही है जिसमें हृदय की मांसपेशियों में सूजन आ जाती है। इस सूजन के कारण हृदय की रक्त को कुशलतापूर्वक पंप करने की क्षमता कम हो जाती है, ऐसे में व्यायाम के कारण हृदय पर दबाव बढ़ सकता है।

लीड्स विश्वविद्यालय के मेडिकल प्रोफेसर और अध्ययन के सह-लेखक डॉक्टर मनज सिवन कहते हैं लॉन्ग कोविड में बिना डॉक्टरी सलाह के व्यायाम करना अत्यधिक सांस फूलने जैसी जटिलताओं को जन्म दे सकता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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