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Covid-19 Reinfection: प्राकृतिक प्रतिरक्षा के बावजूद क्यों दोबारा संक्रमित हो रहे हैं लोग? सीडीसी वैज्ञानिकों ने बताए कारण और बचाव के तरीके

Tue, 08 Feb 2022 03:47 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के दोबारा संक्रमण का खतरा - फोटो : Pixabay
पिछले दो साल से अधिक समय से दुनियाभर में जारी कोरोना का संक्रमण लोगों के लिए बड़ी मुसीबतों का कारण बना हुआ है। देश को अब तक संक्रमण की तीन लहरें झेलनी पड़ी हैं। फिलहाल कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट लोगों की समस्या बढ़ा रहा है। अध्ययनों से पता चलता है कि ओमिक्रॉन की संक्रामकता दर काफी अधिक है, ऐसे में इससे संक्रमण का जोखिम उन लोगों में भी बना हुआ है जिनका वैक्सीनेशन पूरा हो चुका है या जो पहले से ही संक्रमण की चपेट में आकर प्राकृतिक प्रतिरक्षा विकसित कर चुके हैं। कोरोना के संदर्भ में हाल के अध्ययनों में वैज्ञानिक रि-इंफेक्शन के खतरे का भी जिक्र कर रहे हैं। 

अमेरिका के सेंटर फार डिजिज कंट्रोल एंड प्रिवेंसन (सीडीसी) के वैज्ञानिकों ने हालिया रिपोर्ट में लोगों में दोबारा संक्रमण के खतरे को लेकर सावधान किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कुछ लोगों में कोरोना के रि-इंफेक्शन का खतरा अन्य लोगों की तुलना में अधिक होता है, इसके कई जोखिम कारक हो सकते हैं, जिसके बारे में अलर्ट रहने की आवश्यकता है। इससे बचाव के लिए सबसे आवश्यक है कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का लगातार पालन करते रहना। आइए आगे की स्लाइडों में इसके खतरे और इससे बचाव के उपायों के बारे में जानने की कोशिश करते हैं। 
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कोविड-19 रि-इंफेक्शन का खतरा - फोटो : iStock
लोगों में कोरोना के रि-इंफेक्शन का खतरा
सीडीसी के मुताबिक किसी व्यक्ति में एक से अधिक बार संक्रमण होने को रि-इंफेक्शन कहा जाता है। कोविड-19 से ठीक होने के बाद शरीर में प्राकृतिक रूप से प्रतिरक्षा विकसित हो जाती है, यह अगली बार संक्रमण से बचाने या उसके लक्षणों को कम करने में मदद करती है। हालांकि प्राकृतिक प्रतिरक्षा के बाद भी लोगों में कोरोना के दोबारा से संक्रमण के मामले देखे जा रहे हैं। कई लोग तो ऐसे हैं जिनमें दो से अधिक बार कोरोना का संक्रमण हो चुका है।
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कमजोर इम्यून रिस्पांस के कारण बढ़ रहा है संक्रमण का खतरा - फोटो : PTI
क्यों दोबारा संक्रमित हो रहे हैं लोग?
वायरस को लेकर किए गए अध्ययनों में दावा किया जाता रहा है कि प्राकृतिक प्रतिरक्षा अगले संक्रमण से बचाव करने में सहायक है, बावजूद इसके कोरोना का दोबारा संक्रमण होना बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है। इस संबंध में न्यूयॉर्क स्थित बफ़ेलो विश्वविद्यालय में संक्रामक रोग के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ थॉमस रूसो कहते हैं, जिन लोगों को कोरोना संक्रमण के दौरान हल्के लक्षणों को अनुभव हुआ, उनका इम्यून रिस्पांस भी हल्का हो सकता है, जिससे शरीर में मजबूत स्तर की प्रतिरक्षा नहीं विकसित हो पाती है। ऐसे लोगों में अगली बार उसी वायरस से संक्रमण का जोखिम हो सकता है। फिर भी माना जाता है कि पहले संक्रमण के तीन महीने तक दोबारा संक्रमण का खतरा कम होता है।

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एसिम्टोमैटिक लोग हो सकते हैं संक्रमण के वाहक - फोटो : PTI
इस खतरे को लेकर रहें सावधान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना के रि-इंफेक्शन का खतरा एसिम्टोमैटिक लोगों के संपर्क के माध्यम से अधिक होता है। चूंकि ऐसे लोगों में संक्रमण तो होता है पर लक्षण नजर नहीं आते ऐसे में यह दूसरे लोगों को भी संक्रमित कर सकते हैं। इस स्थिति में जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है उनमें संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। कोरोना की तीसरी लहर में ओमिक्रॉन के मामले में एसिम्टोमैटिक लोगों से दूसरों में संक्रमण का खतरा अधिक देखा गया है। इसके अलावा कोरोना से बचाव को लेकर बरती जाने वाली लापरवाही इस खतरे को और भी बढ़ा सकती है। 
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कोरोना से बचाव के उपाय करते रहें - फोटो : Pixabay
दोबारा संक्रमण से कैसे करें बचाव?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वायरस से दोबारा संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए सभी लोगों को लगातार बचाव के उपायों को प्रयोग में लाते रहने की आवश्यकता है। मास्क पहनना, हाथों की स्वच्छता बनाए रखना और सोशल डिस्टेंसिंग इसके लिए बेहतर तरीके हो सकते हैं। ओमिक्रॉन जैसे अत्यधिक संक्रामक वैरिएंट्स से बचाव को लेकर हमें अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। सबसे खास बात टीकाकरण कराना आवश्यक है, इससे संक्रमण की स्थिति में रोग की गंभीरता का जोखिम कम हो जाता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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