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बड़ा खुलासा: BF.7 की गंभीरता कम, फिर चीन में क्यों बिगड़े हालात? एक रिपोर्ट ने कई देशों की बढ़ा दी चिंता

Thu, 29 Dec 2022 12:35 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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चीन में कोरोनावायरस का प्रकोप बढ़ा - फोटो : Twitter
चीन में कोरोना संक्रमण के अचानक बढ़े मामले वैश्विक चिंता का कारण बने हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हालिया रिपोर्ट में सभी देशों को अलर्ट करते हुए बचाव के उपायों को तेज करने की सलाह दी है। चीन में कोरोना के संक्रमण के लिए अति-संक्रामक ओमिक्रॉन BF.7 वैरिएंट को प्रमुख कारण माना जा रहा है। 

शोध बताते हैं कि इस वैरिएंट की संक्रामकता दर भले ही अधिक है पर इससे गंभीर रोग का खतरा कम है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि फिर चीन में इतनी तेजी से हालात गंभीर रूप क्यों लेते जा रहे हैं? हल्के लक्षणों वाला यह वैरिएंट चीन में इतना गंभीर क्यों साबित हो रहा है? इस सवाल को लेकर
विशेषज्ञों की टीम ने बड़ा दावा किया है।
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चीन में वैक्सीन की प्रभाविकता काफी कम - फोटो : istock

तिब्बत प्रेस का बड़ा खुलासा

इस संबंध में तिब्बत प्रेस ने बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन के लोगों को दी गई वैक्सीन की प्रभावशीलता काफी कम देखी जा रही है, इस वजह से यहां संक्रमण की स्थिति में ओमिक्रॉन जैसे हल्के वैरिएंट के कारण भी लोगों को गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल चीन में ज्यादातर संक्रमितों में निम्न स्तर की एंटीबॉडीज देखी जी रही है, इसके कारण यहां न सिर्फ संक्रमण का खतरा बढ़ा है साथ ही लोगों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी देखी जा रही है।

विशेषज्ञों ने चेताया है कि जिन देशों ने चीन की वैक्सीन को अपने यहां प्रयोग किया है उन्हें भी अलर्ट रहने और लोगों की प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए उपाय करने की आवश्यकता है।
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चीन के वैक्सीन ज्यादा असरदार नहीं - फोटो : iStock
चीनी टीकों की प्रभावशीलता बेहद कम, साइड इफेक्ट्स का भी जोखिम

तिब्बत प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है, चीनी टीकों की प्रभावशीलता कम होने के कारण यहां लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम देखी जा रही है, यही कारण है कि यहां संक्रमण इतनी गंभीर रूप ले रहा है। जिन देशों में चीनी टीके लगाए गए हैं, वहां के  लोगों की भी प्रतिरक्षा पर प्रश्नचिन्ह है, वहां भी संक्रमण की स्थिति में गंभीर रोगों का खतरा हो सकता है। इस तरह के जोखिमों को ध्यान में रखते हुए सरकारों को टीकाकरण को लेकर फिर से विचार करने और लोगों को प्रभावी बूस्टर डोज लगवाने पर जोर देना चाहिए।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि लोगों ने चीनी वैक्सीन से गंभीर साइड-इफेक्ट्स का भी अनुभव किया है, जो भी एक खतरे की तरफ इशारा करती है।

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चीन के वैक्सीन से साइड इफेक्ट्स का भी जोखिम अधिक - फोटो : Pixabay
किन देशों ने आयात किए थे टीके

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इंडोनेशिया, तुर्किस्तान,  ब्राजील, ईरान, पाकिस्तान, कोलंबिया, श्रीलंका, चिली, मैक्सिको, बांग्लादेश ने चीनी वैक्सीन आयात किए थे। दिसंबर 2020 में, इंडोनेशिया और ब्राजील ने शुरुआत में चीनी वैक्सीन की प्रभाविकता 78-97 फीसदी होने का भी दावा भी किया था। हालांकि अब चीन में बिगड़ते हालात को देखते हुए तुर्की सरकार ने इन टीकों की प्रभावशीलता की जांच शुरू कर दी है।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि चीन ने अपने वैक्सीन से होने वाले साइड-इफेक्ट्स को छिपाने के लिए डेटा टेम्परिंग भी की है, इस तरह के मामले सामने आने के बाद वैक्सीन आयात करने वाले देशों ने नए सिरे से इसकी प्रभावशीलता की जांच शुरू कर दी है।
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बढ़ते संक्रमण को लेकर वैज्ञानिकों ने किया अलर् - फोटो : PTI
वैक्सीनेशन के बाद भी लोगों में सुरक्षात्मक एंटीबॉडीज कम

रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2021 तक, चीन ने अपने नागरिकों को 2.4 बिलियन खुराक दी और दुनियाभर में लगभग 1.3 बिलियन वैक्सीन खुराक वितरित की गई। 2022 तक, वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सिनोफार्म ने दुनिया भर में 3.5 बिलियन से अधिक खुराक वितरित करने का दावा किया है।

तिब्बत प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार ऑनलाइन लीक हुए एक दस्तावेज में दावा किया जा रहा है कि वैक्सीन की विश्वसनीयता पर पहले से सवाल खड़े हो रहे थे। एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है, चीनी प्रांत सिचुआन में सर्वेक्षण में शामिल 60 प्रतिशत से अधिक लोगों ने वैक्सीनेशन के बाद दोबारा संक्रमण और अधिकतर लोगों ने इसके साइड-इफेक्ट्स का अनुभव किया। हालांकि चीन सरकार ने इन रिपोर्ट की जानकारी साझा नहीं की।
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कोरोना संक्रमण का खतरा - फोटो : pixabay
वैज्ञानिकों ने अन्य देशों को किया अलर्ट

वैक्सीन को लेकर उठ रहे सवालों और इसके साइड इफेक्ट्स के जोखिमों को देखते हुए वैज्ञानिकों का कहना है कि चीन जैसे हालात अन्य देशों में भी बिगड़ सकते हैं। जिन देशों ने चीनी टीकों का आयात किया था उन्हें इसकी प्रभावशीलता और लोगों की प्रतिरक्षा को लेकर फिर से जांच की आवश्यकता है। ज्यादातर संक्रमितों में वैक्सीन से बनीं एंटीबॉडीज की प्रभाविकता कम देखी जा रही है, जिससे उनमें गंभीर रोग का खतरा बढ़ गया है। चीन जैसे हालात अन्य देशों में भी हो सकता है, इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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