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Covid-19: चीन में कहर मचा रहे BF.7 वैरिएंट से भारत को भी खतरा? जानिए इसकी संक्रामकता से लेकर लक्षणों तक सबकुछ

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चीन में कोरोना ने मचाई तबाही - फोटो : Pixabay
चीन, इन दिनों कोरोना के गंभीर संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। जीरो-कोविड प्रोटोकॉल में दी गई ढील के बाद से यहां हालात काफी बिगड़ गए हैं, आलम यह है कि अस्पतालों में संक्रमितों की भारी भीड़ देखी जा रही है, आश्चर्यजनक रूप से कोरोना से मरने वालों के आंकड़े भी काफी बढ़ रहे हैं। सोमवार को चीन ने संक्रमण की इस लहर में पहली मौत की पुष्टि की है, हालांकि वैश्विक एजेंसियों का आरोप है कि अधिकारी मौत के आंकड़े छिपा रहे हैं। एक अन्य मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन के बीजिंग शहर में शवघरों में भारी भीड़ देखी जा रही है, इसमें कोविड-19 से मरने वाले के मामले सबसे अधिक हैं। 

चीन में कोरोना के बढ़ते मामले अन्य देशों के लिए भी चेतावनी हैं। यूएस अधिकारियों ने मीडिया रिपोर्ट्स में कहा- हम उम्मीद कर रहे हैं कि चीन इस बारे में जल्द अपडेट करेगा, जिससे अन्य देश भी अलर्ट हो सकें। हमें पता है कि वायरस काफी तेजी से फैल सकता है और अगर हम सुरक्षात्मक उपाय नहीं करते हैं तो यह अन्य देशों के लिए भी खतरे का कारण बन सकता है।



फिलहाल सभी देशों को कोविड-19 को लेकर अपनी रणनीति पर विचार करने की आवश्यकता है, हमें चीन वाली गलती से बचना होगा, महामारी को हल्के में लेना इस तरह के गंभीर हालात का कारण बन सकता है।
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भारत में फिलहाल नियंत्रित स्थिति में कोरोना - फोटो : PTI
भारत के लिए कितना खतरा?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि चीन में फिलहाल बढ़े मामलों के लिए ओमिक्रॉन BF.7 सब-वैरिएंट को प्रमुख कारण के तौर पर देखा जा रहा है। इस वैरिएंट का खतरा भारत में भी हो सकता है। अक्तूबर में गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर ने  देश में इस वैरिएंट के कारण संक्रमण के पहले मामले की पुष्टि की थी। भारत के अलावा कई यूरोपीय देशों में भी इस वैरिएंट के कारण संक्रमण की पुष्टि की जा चुकी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अध्ययनों में इसे काफी चुनौतीपूर्ण वैरिएंट के तौर पर देखा जा रहा है, ऐसे में सभी को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

भारत में कोरोना के जोखिम के बारे में टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) के चेयरमैन डॉ एन के अरोड़ा कहते हैं, चीन में व्यापक रूप से कोविड संक्रमण की खबरें हैं। जहां तक भारत में इसके खतरे की बात है तो यहां बड़े पैमाने पर लोगों का टीकाकरण हो चुका है, जिससे संक्रमण का जोखिम काफी कम है।

INSACOG डेटा से पता चलता है कि दुनियाभर में पाए गए ओमिक्रॉन के लगभग सभी सब-वेरिएंट भारत देखे जा चुके हैं। फिलहाल हम स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि भारत में स्थिति नियंत्रण में है।
 

 
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ओमिक्रॉन वैरिएंट्स हो सकते हैं अधिक संक्रामक - फोटो : Pixabay
BF.7 वैरिएंट के बारे में जानिए

अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि BF.7, ओमिक्रॉन के BA.5.2.1.7 सब-वैरिएंट का ही एक म्यूटेटेड रूप है, हालांकि इसके कुछ म्यूटेशन संक्रामकता और गंभीरता को बढ़ाने वाले देखे जा रहे हैं। चीन की रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि BF.7, ओमिक्रॉन के अन्य सबवैरिएंट्स की तुलना में अधिक संक्रामकता वाला हो सकता है। इसका इक्यूवेशन पीरियड भी काफी कम है।

इन्क्यूबेशन पीरियड का मतलब वायरस से संक्रमित इंसान में लक्षण आने में लगने वाला समय है। इसके अलावा BF.7 में प्रतिरक्षा को चकमा देने वाली क्षमता भी अधिक देखी जा रही है, ऐसे में यह वैक्सीनेटेड लोगों की भी मुश्किलें बढ़ाने वाला वैरिएंट है।

BF.7 वैरिएंट के लक्षण

ओमिक्रॉन के BF.7 सब-वैरिएंट को लेकर हुए अध्ययनों में फिलहाल किसी नए लक्षण के बारे में पता नहीं चला है। संक्रमितों में बुखार, खांसी, थकान, नाक बहने और गले में खराश जैसै पुराने लक्षण ही देखे जा रहे हैं। ज्यादातर लोगों में एसिम्टोमेटिक लक्षण ही देखे जा रहे हैं। हालांकि जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है उनकी इसकी गंभीरता अधिक होने की आशंका है। यह नया वैरिएंट अधिक संक्रामता दर वाला जरूर देखा जा रहा है, जो आसानी से उन लोगों में भी संक्रमण के जोखिम को बढ़ाता देखा जा रहा है जिनका वैक्सीनेशन हो चुका है।

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बढ़ सकता है संक्रमण का जोखिम - फोटो : Pixabay
तेजी से बढ़ा सकता है संक्रमण

अध्ययन के आधार पर शोधकर्ताओं ने बताया कि BF.7 का रिप्रोडेक्शन रेट (R0) भी अधिक है, यानी कि इसकी संक्रामकता काफी अधिक हो सकती है। डेल्टा वैरिएंट के मामले में रिप्रोडेक्शन रेट जहां 5-6 के बीच देखा जा रहा था, वहीं BF.7 के मामले में यह बढ़कर 10-18 के करीब हो गया है।

इसका मतलब है कि एक संक्रमित व्यक्ति औसतन 10 से 18 अन्य लोगों को वायरस प्रसारित कर सकता है। ऑमिक्रॉन का औसत R0 5.08 रहा है। इस खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सभी देशों को कोविड-19 से बचाव के लिए फिर से सख्ती बरतने की आवश्यकता है। 
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नए वैरिएंट्स से बचाव की जरूरत - फोटो : Pixabay
हिडेन स्प्रेड का भी खतरा

शोधकर्ताओं ने बताया कि BF.7 सब-वैरिएंट से हिडेन स्प्रेड का भी खतरा हो सकता है। हिडेन स्प्रेड का मतलब इससे संक्रमित ज्यादातर लोगों में लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं ऐसे में उनकी पहचान कठिन हो जाती है। फिर भी ऐसे लोगों से वायरस के प्रसार का खतरा हो सकता है, चूंकि BF.7 का  रिप्रोडेक्शन रेट भी अधिक है ऐसे में यह कम समय में बड़ी आबादी में संक्रमण का कारण बनने वाला वैरिएंट हो सकता है।  

BF.7 के ज्यादातर लक्षण पहले के वैरिएंट्स की तरह ही हैं पर इसकी संक्रामकता दर काफी चिंता बढ़ाने वाली हो सकती है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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