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Covid-19: देश में 6000 से अधिक कोरोना के एक्टिव मामले, क्या फिर से जरूरी हो गया है मास-वैक्सीनेशन?

Sun, 08 Jun 2025 05:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Covid-19: डॉक्टर कहते हैं, कोविड-19 मामलों में लगातार हो रही वृद्धि चिंता का विषय जरूर है और इससे घबराने की जरूरत नहीं है। अब सवाल उठता है संक्रमण फैलने की जो गति देश में देखी जा रही है, क्या उसे ध्यान में रखते हुए एक बार फिर से  मास-वैक्सीनेशन जरूरी हो गया है?
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कोरोना की वैक्सीन - फोटो : Freepik.com
Covid-19 News & Updates: कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट की जारी लहर इन दिनों दुनियाभर के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। हांगकांग और सिंगापुर से शुरू हुए संक्रमण के मामले भारत में भी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। करीब 15 दिनों के भीतर ही भारत में कोरोना के एक्टिव मामले 30 गुना तक बढ़ गए हैं। 22 मई को कुल एक्टिव केस 257 थे जो 8 जून तक बढ़कर 6133 हो गए हैं। रोजाना कोरोना से मौत के मामले भी रिपोर्ट किए जा रहे हैं। 

डॉक्टर कहते हैं, कोविड-19 के मामलों में लगातार हो रही वृद्धि चिंता का विषय जरूर है और इससे घबराने की जरूरत नहीं है। देश में फैल रहा सब-वैरिएंट ओमिक्रॉन स्ट्रेन फैमिली का ही है, जिसके लक्षण अधिकतर लोगों में हल्के, कुछ लोगों में एसिम्टोमेटिक और आम जनता के लिए काफी हद तक हानिरहित है। हालांकि सभी लोगों को बचाव के उपायों पर गंभीरता से ध्यान देते रहने की आवश्यकता है। 




जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता अच्छी है उनमें इस संक्रमण का असर नहीं हो रहा है, पर चिंताजनक बात ये है कि संक्रमित व्यक्ति वायरस का वाहक जरूर हो सकता है, जिससे उन लोगों में संक्रमण फैलने का खतरा रहता है जो पहले से बीमार हैं या बुजुर्ग हैं, ऐसे लोगों में गंभीर रोग विकसित हो सकता है। इसलिए जरूरी कि सभी लोग संक्रमण से बचने के उपाय करते रहें।

अब सवाल उठता है संक्रमण फैलने की जो गति देश में देखी जा रही है, क्या उसे ध्यान में रखते हुए एक बार फिर से  मास-वैक्सीनेशन जरूरी हो गया है?
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कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर रहें सावधान - फोटो : Freepik.com
कोविड-19 वैक्सीनेशन को लेकर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

भारत ने जनवरी 2021 में दुनिया का सबसे बड़ा कोविड-19 टीकाकरण अभियान शुरू किया। कोविन डैशबोर्ड के अनुसार, अब तक देश में कोविड-19 वैक्सीन की 220 करोड़ से ज्यादा खुराकें दी जा चुकी हैं। इसके अलावा पहले से संक्रमण के जरिए अधिकतर लोगों ने मजबूत प्रतिरक्षा विकसित कर ली है, इसलिए कोरोना अब उतना गंभीर और प्रभावी नहीं रहा है।
 
इसी को लेकर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ राजीव बहल ने एक रिपोर्ट में कहा कि वर्तमान में बड़े पैमाने पर लोगों के लिए बूस्टर खुराक शुरू करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है और न ही इस पर केंद्र सरकार की ओर से कोई निर्देश है। 


(ये भी पढ़िए- Covid-19: कोरोना का कोई भी वैरिएंट हो, इस उपाय से दूर होता है संक्रमण और मौत का खतरा; अध्ययन में दावा)
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कोरोना की वैक्सीन - फोटो : Freepik.com
मास-वैक्सीनेशन को लेकर क्या कहते हैं डॉक्टर?

अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली स्थित अस्पताल में इंटेंसिव केयर के डॉ विक्रमजीत सिंह बताते हैं, कोरोना के मामले जरूर बढ़ रहे हैं पर ये घबराकर वैक्सीनेशन के लिए भागने जैसी स्थिति नहीं है। मास वैक्सीनेशन की जरूरत नहीं है।

पहले से कुछ विशेषज्ञ कोमोरबिडिटी के शिकार लोगों को समय-समय पर बूस्टर वैक्सीन लेने की सलाह देते रहे हैं ताकि शरीर की कम होती प्रतिरक्षा पर कोरोनावायरस अटैक न कर सके। जिन मरीजों को इसकी जरूरत है उन्हें डॉक्टर आवश्यकतानुसार बूस्टर वैक्सीनेशन की सलाह दे सकते हैं। या अगर आपको लगता है कि परिवार में कोई बुजुर्ग है, पहले से किसी को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं रही हैं तो ऐसे लोगों के वैक्सीनेशन के लिए आप डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं।

वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में क्लिनिकल वायरोलॉजी के सेवानिवृत्त प्रोफेसर टी. जैकब जॉन ने एक मीडिया रिपोर्ट में कहा था कि बुजुर्गों और प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी वाले लोगों को फिर से टीका लगाए जाने की जरूरत है, भले ही उन्हें पूरी तरह से टीका लगाया गया हो (दो खुराक और एक बूस्टर) या वे पहले वायरस के संपर्क में आ चुके हों। 
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टीकाकरण की फिर से जरूरत? - फोटो : Freepik.com
हर्ड इम्युनिटी कर रही है रक्षा

डॉक्टर कहते हैं, देश में पहली बार ओमिक्रॉन के मामले शुरू होने (साल 2023) के समय तक हमारी लगभग पूरी आबादी वायरस के संपर्क में आ चुकी थी या फिर वैक्सीनेशन करा चुकी थी। समय के साथ एंटीबॉडीज कम हो सकती हैं, लेकिन दीर्घकालिक रूप से मेमोरी सेल्स एक्टिव रहते हैं जो अगली बार उस वायरस से संक्रमण की स्थिति में शरीर का बचाव करते हैं। 

हो सकता है कि पिछली वैक्सीन्स ओमिक्रॉन के नए वैरिएंट के खिलाफ बहुत प्रभावी न हों, लेकिन फिर भी वे बीमारी के गंभीर रूप लेने से बचाने में अब भी मददगार हैं। 



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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