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बड़ी चिंता: क्या एच1एन1 भी बन सकता है कोविड जैसी महामारी का कारण? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

Sat, 29 Aug 2026 09:55 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एच1एन1 मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरस का हिस्सा है, लेकिन मौजूदा आंकड़ों को देखकर लोगों को चिंता हो रही है कि कहीं ये कोविड जैसी नई महामारी का खतरा तो नहीं बढ़ा देगा? दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई राज्यों में इस संक्रामक रोग के मामले बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं।
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स्वाइन फ्लू महामारी का खतरा? - फोटो : Amarujala.com/AI
राजधानी दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई राज्य इन दिनों स्वाइन फ्लू (एच1एन1) की चपेट में हैं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक दिल्ली-एनसीआर में संक्रमण के 2700 से अधिक मामले रिपोर्ट किए जा चुके हैं। इसके अलावा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित देश के कई अन्य हिस्सों से भी संक्रमण की पुष्टि हुई है। मसलन ये बीमारी तेजी से बढ़ती जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो एच1एन1 ज्यादा गंभीर रोगों का कारण नहीं बनता है, पर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए ये खतरा बढ़ाने वाला हो सकता है। गंभीर मामलों में स्वाइन फ्लू से फेफड़ों-हृदय और आंखों पर भी असर हो सकता है।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के डायरेक्टर-जनरल राजीव बहल ने 25 अगस्त को बताया कि भारत में अभी इन्फ्लूएंजा-ए के जो मामले सामने आ रहे हैं, उनमें से लगभग 98% मामले एच1एन1 स्ट्रेन की वजह से हो सकते हैं। जिस तरह से इस संक्रमण की गति देखी जा रही है, ये लोगों में मन में सवाल खड़ी कर रही है कि कहीं स्वाइन फ्लू के कारण देश में कोरोना जैसी एक और महामारी तो नहीं आने वाली है?
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फ्लू के मामलों को लेकर अलर्ट - फोटो : Freepik.com
2009 में बन चुका है महामारी का कारण

गौरतलब है कि एच1एन1 पहले देश में एक महामारी का कारण बन चुका है। साल 2009 में इसके कारण गंभीर स्थिति देखी जा चुकी है। 

कोरोना की तरह इसमें भी लोगों को बुखार, सर्दी-जुकाम के साथ सांस की दिक्कतें हो रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए फिर से लोगों को कोरोना वाले उपाय करने की भी सलाह दे रहे हैं।  ऐसे में लोगों के मन में एक और महामारी को लेकर डर होना लाजमी है। 

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ रवि गोडसे कहते हैं, एच1एन1 हमारे लिए कोरोना जैसा कोई नया वायरस नहीं है। हम पहले भी इससे मुकाबला करके हरा चुके हैं।
 
  • इसमें कोई नया म्यूटेशन भी नहीं है जिसको लेकर लोगों को डरने की कोई जरूरत है।
  • पहले से हमारे पास इसकी वैक्सीन और फस्ट लाइन मेडिसिन ओसेल्टामिविर भी हमारे पास मौजूद है।
  • इससे कोई महामारी होगी इसकी आशंका दूर की बात है, इस बारे में सोचने की भी जरूरत नहीं है। 
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स्वाइन फ्लू की दवा - फोटो : Freepik.com
एच1एन1 की कारगर दवा मौजूद

डॉ रवि गोडसे कहते हैं, ये एच1एन1 ज्यादातर लोगों में अपने आप होकर ठीक भी हो जाता है। कुछ लोगों में इससे न्यूमोनिया होने और अस्पताल में भर्ती होने का खतरा हो सकता है। बच्चे-बुजुर्ग या पहले से बीमार लोगों में ये दिक्कत ज्यादा हो सकती है। 
 
  • ज्यादातर मामलों में ओसेल्टामिविर संक्रमण के 48 घंटे में ले ली जाए तो इससे बीमारी के खतरे को काफी कम किया जा सकता है।
  • ये आपको न्यूमोनिया से बचाने और इसके फैलने के खतरे को कम कर सकती है। 
  • अमेरिका में अगर किसी को एच1एन1 हो जाए तो उसके परिवार के करीबी सदस्यों को डॉक्टर ये दवा दे देते हैं, मान के चला जाता है कि बाकी लोगों में भी ये संक्रमण हो सकता है।
  • हालांकि भारत में स्थिति ऐसी नहीं है। यहां जरूरत के हिसाब से डॉक्टर आपको दवा दे सकते हैं।
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श्वसन संक्रमण से करें बचाव - फोटो : Adobe Stock
अभी क्या सावधानी रखें, क्या वैक्सीन जरूरी है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, फिलहाल स्वाइन फ्लू से बचाव का सबसे सबसे आसान तरीका फ्लू वैक्सीन लेना है। अपने डॉक्टर की सलाह पर आप फ्लू का टीका ले सकते हैं। ये आपको संक्रमण होने पर इसके गंभीर रूप लेने से बचाने में मददगार हो सकती है।
 
  • खांसी या छींक आने पर मुंह-नाक ढकना, हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखना, बीमार होने पर दूसरों से दूरी रखना और भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहचनना संक्रमण के जोखिम को कम करने में काफी मददगार हो सकती है।
  • बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और पहले से बीमार लोगों में फ्लू के लक्षण गंभीर हों तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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