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Viral Infection: मौसम बदलते ही आपको भी हो गया सर्दी-जुकाम? आखिर वायरल संक्रमण होता क्यों है

Sat, 27 Jun 2026 07:57 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बरसात के दौरान हवा में नमी बढ़ जाती है, तापमान में अचानक उतार-चढ़ाव होता है और कई वायरस लंबे समय तक वातावरण में सक्रिय रह सकते हैं। यही वजह है कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक संक्रमण तेजी से फैलता है।
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सर्दी-जुकाम की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
जुलाई महीने के साथ आमतौर पर देश के ज्यादातर हिस्सों में मानसून की शुरुआत हो जाती है। बरसात की फुहार जहां भीषण गर्मी से राहत लेकर आती है, हालांकि बारिश की शुरुआत के साथ कई तरह की बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ने लग जाता है। इन दिनों मौसम में तेजी से बदलाव होते देखा जा रहा है, लिहाजा सर्दी-जुकाम, गले में खराश, बुखार और खांसी जैसे वायरल संक्रमण के लक्षण भी तेजी से बढ़ने लगे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में वायरल संक्रमण का खतरा अधिक देखा जाता है। ऑफिस, स्कूल, कॉलेज, मेट्रो, बस और भीड़भाड़ वाली जगहों पर संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि आसपास अगर एक व्यकित बीमार हो तो  बाकी लोग भी वायरल संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं।

क्या आप भी सर्दी-जुकाम की समस्या से परेशान हैं? अगर हां तो आइए जान लेते हैं कि इससे कैसे बचा जा सकता है?
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संक्रामक बीमारियों का खतरा - फोटो : Freepik.com
वायरल संक्रमण का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वायरल संक्रमण के साथ-साथ इन दिनों में कोविड-19, स्वाइन फ्लू, डेंगू या अन्य संक्रामक रोगों के मामले भी बढ़ रहे हैं, अक्सर इसके लक्षण मिलते-जुलते हो सकते हैं। इसलिए यदि तेज बुखार लंबे समय तक बना रहे, सांस लेने में तकलीफ हो, लगातार कमजोरी महसूस हो तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी हो जाता है। समय पर सही पहचान इलाज को आसान बनाती है और जटिलताओं से बचाती है।

अच्छी बात यह है कि वायरल संक्रमण को आसानी से ठीक किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि वायरल संक्रमण आखिर क्यों तेजी से फैलता है, किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा होता है?
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वायरल संक्रमण के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe Stock
बारिश के मौसम में वायरल संक्रमण क्यों बढ़ जाता है?

मानसून के दौरान तापमान और आर्द्रता में बदलाव होता है, जिससे कई श्वसन संबंधी वायरस तेजी से फैल सकते हैं। 
 
  • संक्रमित व्यक्ति की खांसी या छींक से निकलने वाली बूंदों के जरिए वायरस आसानी से दूसरे लोगों तक पहुंच सकता है। 
  • इसके अलावा मौसम बदलने के दौरान शरीर को तापमान के अनुसार ढलने में समय लगता है।
  • यदि इस दौरान पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन और स्वच्छता का ध्यान न रखा जाए तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

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गले में संक्रमण की समस्या - फोटो : Freepik.com
इसकी शुरुआती पहचान कैसे करें?

वायरल संक्रमण में आमतौर पर गले में खराश, नाक बहने, छींक आने, हल्का या मध्यम बुखार के साथ शरीर में दर्द होती है। 
 
  • कुछ लोगों में भूख कम लगने और कमजोरी की भी दिक्कत महसूस हो सकती है। 
  • अधिकांश मामलों में ये लक्षण कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन यदि तेज बुखार लगातार बना रहे, सांस लेने में कठिनाई हो या सीने में दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। 
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फ्लू, सर्दी-जुकाम से कैसे बचें - फोटो : Freepik.com
वायरल संक्रमण के खतरे कम कैसे कम करें?

वायरल संक्रमण के लक्षणों को कम करने के लिए डॉक्टर आपको कुछ दवाएं दे सकते हैं।
 
  • इसके अलावा बीमारी के दौरान शरीर को तरल पदार्थ और पोषण की जरूरत होती है। 
  • गुनगुना पानी, सूप, दाल, मौसमी फल, हरी सब्जियां, नारियल पानी और विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थ शरीर को रिकवरी में मदद कर सकते हैं। 
  • खूब पानी पीते रहने से डिहाइड्रेशन से बचाव होता है।

अगर आपको वायरल संक्रमण है तो एंटीबायोटिक नहीं लेनी चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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