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Coronavirus Vaccine: वैज्ञानिकों ने बनाई नैनोपार्टिकल वैक्सीन, सिर्फ एक खुराक से होगा कोरोना वायरस का काम तमाम!

Mon, 11 Jan 2021 11:13 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वैक्सीन - फोटो : iStock
दुनिया में अब तक कोरोना की कई वैक्सीन आ चुकी हैं, जिनकी मदद से टीकाकरण अभियान भी चल रहे हैं। हालांकि वैक्सीन हो या कोरोना वायरस, इनको लेकर लगातार शोध भी चल रहे हैं। अब अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा नया नैनोमटेरियल-बेस्ड बायोसेंसिंग प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जो कुछ ही देर में बता देगा कि कोरोना वायरस से बचाव के लिए शरीर में एंटीबॉडी बनी है या नहीं। कहा जा रहा है कि इस बायोसेंसिंग प्लेटफॉर्म से वैक्सीन की प्रतिरक्षात्मक प्रतिक्रिया यानी वैक्सीन के प्रभाव का सटीक अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
भारतवंशी राहुल पनात भी इस शोध का हिस्सा थे। वह अमेरिका की कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने कहा 'हमने नैनोपार्टिकल थ्री-डी प्रिटिंग जैसी नई तकनीक का इस्तेमाल कर एक डिवाइस बनाई है जो कोरोना की एंटीबॉडी की तत्काल पहचान करने में सक्षम है।' दरअसल, इस टेस्टिंग प्लेटफॉर्म से खून की छोटी बूंद में वायरस की दो एंटीबॉडी- स्पाइक S1 प्रोटीन और रिसेप्टर-बाइंडिंग डोमेन की मौजूदगी का पता लगाया जा सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इसके अलावा एक नए शोध के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने एक नैनोपार्टिकल वैक्सीन विकसित की है जो सिर्फ एक खुराक के बाद ही कोरोना वायरस को खत्म करने वाली एंटीबॉडी प्रतिक्रिया पैदा करती है।
 इस शोध को एसीएस सेंट्रल साइंस जर्नल में प्रकाशित किया गया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
शोध के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने पहले चूहों पर इस नैनोपार्टिकल वैक्सीन का परीक्षण किया। इससे पता चला कि पहली खुराक देने के बाद ही उनमें कोरोना वायरस के खिलाफ दोगुना ज्यादा एंटीबॉडी बनी और जब 21 दिन बाद दूसरी खुराक दी गई, तो एंटीबॉडी की संख्या और बढ़ गई। हालांकि इसका परीक्षण अभी इंसानों पर करना बाकी है। उसके बाद ही पता चल पाएगा कि यह वैक्सीन कितनी असरदार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शोधकर्ताओं की टीम का नेतृत्व अमेरिका में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के पीटर किम कर रहे थे। 
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