सांकेतिक तस्वीर
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क्या उन्हें अपनी तकनीक साझा करनी चाहिए?
अभी जबकि इतना कुछ दांव पर लगा हुआ है तो इस तरह की मांग उठ रही है कि इन वैक्सीन के पीछे की पूरी तकनीकी और जानकारी साझा की जाए ताकि दूसरे देश उदाहरण के तौर पर जो कंपनियां भारत और दक्षिण अफ्रीका में हैं, वे वैक्सीन की डोजेज को अपने यहां के बाजारों में बना सकें। मेडिसीन्स लॉ एंड पॉलिसी की एलेन टी होएन कहती हैं, 'पब्लिक फंडिंग प्राप्त करने के लिए यह एक शर्त होनी चाहिए।'
वो कहती हैं, 'जब महामारी की शुरुआत हुई थी तब बड़ी फार्मा कंपनियों ने वैक्सीन को लेकर बहुत उत्साह नहीं दिखाया था, लेकिन जब सरकार और एजेंसियां फंड के साथ आगे आईं तो उन्हें इस पर काम करना पड़ा।' होएन कहती हैं, 'उन्हें नहीं समझ आता है कि क्यों उन्हीं के पास परिणाम से लाभ पाने का विशेषाधिकार हो।' वो कहती है, 'ये नई खोजें आगे चलकर इन वाणिज्यिक संगठनों की निजी संपत्ति बन जाती हैं।' हालांकि बौद्धिक स्तर पर लोग एक-दूसरे संग कुछ चीजें साझा कर रहे हैं, लेकिन यह किसी भी सूरत में पर्याप्त नहीं हैं।