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Coronavirus: 6 महीने में कोरोना का इलाज ढूंढ निकालेगी ये भारतीय दवा कंपनी, किया दावा

Sat, 21 Mar 2020 02:43 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दवाएं बनाने वाली दिग्गज कंपनी ने यह दावा किया है - फोटो : फाइल फोटो
चीन के वुहान शहर से शुरू हुए कोरोना वायरस की चपेट में दुनियाभर के लाखों लोग आ चुके हैं। भारत में भी हर दिन कोरोना वायरस से संक्रमण के नए मामले सामने आ रहे हैं। पिछले साल दिसंबर में कोरोना वायरस का मामला दुनिया के सामने आया और अबतक इससे 11 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2.75 लाख से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं। कोरोना वायरस से निपटने के लिए भारत समेत कई देशों में रिसर्च हो रहे हैं। अमेरिका में तो इसके टीके का मानव शरीर पर परीक्षण भी किया जा चुका है।

वहीं दूसरी ओर भारत, चीन और थाइलैंड समेत कई देशों ने इसके स्ट्रेन अलग करने में कामयाबी पा ली है, जिससे कोरोना की वैक्सीन या दवा बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इस बीच एक भारतीय दवा कंपनी ने छह महीने के अंदर कोरोना वायरस का इलाज ढूंढ लेने का दावा किया है। खासकर सांस और फ्लू जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दवाएं बनाने वाली दिग्गज कंपनी सिप्ला(Cipla) ने यह दावा किया है। 
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दुनिया के लाखों लोगों को अपनी चपेट में ले चुके कोरोना वायरस का अबतक इलाज नहीं ढूंढा जा सका है। कोरोना जांच के लिए जहां भारत समेत दुनिया की कई कंपनियों ने बेहद कम कीमत में कुछ घंटों में रिजल्ट देने वाली जांच किट तैयार करने का दावा किया है तो वहीं दूसरी ओर भारतीय फार्मा कंपनी सिप्ला के दावे ने उम्मीद जगा दी है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में इस बारे में बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक दवा कंपनी सिप्ला का दावा है कि वह महज 6 महीने के अंदर कोरोना वायरस का इलाज ढूंढ सकती है। 
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सिप्ला कंपनी अगर कोरोना वायरस का इलाज ढूंढने में सफल होती है तो वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय कंपनी होगी और यह देश के लिए भी बड़ी कामयाबी होगी। रिपोर्ट में बताया गया है कि फिलहाल यह कंपनी सरकारी लैब के साथ मिलकर कोरोना वायरस की दवा विकसित करने में जुटी हुई है। कंपनी का कहना है कि वह कोरोना वायरस की वजह से सांस लेने में तकलीफ, अस्थमा, एंटी वायरल और एचआईवी(HIV) की दवाओं के इस्तेमाल पर भी प्रयोग कर रही है।

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रिसर्च
सिप्ला कंपनी के प्रमोटर यूसुफ हामिदन ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा है कि कंपनी अपने तमाम संसाधनों को देश के लिए लगा देने को अपना राष्ट्रीय कर्तव्य मानती है। कंपनी ने दवाओं का उत्पादन दोगुना कर दिया है। मालूम हो कि सांस लेने में परेशानी, वायरल फ्लू और एचआईवी से जुड़ी बीमारियों में सिप्ला का उल्लेखनीय योगदान है और कोरोना वायरस के जैसे लक्षण हैं, उनमें इन दवाओं की भूमिका अहम हो सकती है। 
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Research - फोटो : अमर उजाला
मालूम हो कि फिलहाल कोविड-19 का कोई इलाज नहीं है और दुनियाभर में कोरोना से संक्रमित मरीजों का एचआईवी, एंटी-वायरल और एंटी मलेरियल दवाओं से ही इलाज हो रहा है। सिप्ला के प्रोमोटर हामिद ने कहा कि कोरोना वायरस के इलाज के लिए एंटी वायरल कंपाउंड जैसे -फेविपिराविर, रेमिडेसिविर और बोलैक्सेविर बनाना शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन तीन दवाओं के लिए सरकारी लैबों के साथ मिलकर कच्चा माल उत्पादन करने पर विचार किया जा रहा है। 
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हामिद ने कहा कि कच्चे माल का उत्पादन करने के बाद दवा लाने में छह महीने का समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि हमारे पास कई तरह की दवाएं हैं, लेकिन कौन सी दवाओं का कॉम्बिनेशन या कंपोजिशन इसमें काम करेगा, यह संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के नॉलेज पर निर्भर करता है। जिन दवाओं के प्रभावी परिणाम आ रहे हैं, उन पर दुनियाभर में  परीक्षण जारी है। इन दवाओं में एचआईवी की दो दवा लोपिनाविर और रिटोनाविर के अलावा एंटीवायरल ड्रग रेमेडेसिविर और एंटी मलेरियल ड्रग क्लोरोक्वीन शामिल हैं।
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Coronavirus - फोटो : Amar Ujala
एचआईवी की दो दवाओं लोपिनाविर और रिटोनाविर का कॉम्बिनेशन सिप्ला कंपनी 'लोपिम्यून' नाम से बना चुकी है और इसके परिणामों पर खुद भी नजर बनाए हुए है। कोविड-19 से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ने एंटी-एचआईवी ड्रग्स के कॉम्बिनेशन के 'रेस्ट्रिक्टेड यूज' की मंजूरी दे दी है। ये दवाएं सिप्ला के पास मौजूद है। छह महीने के अंदर दवा तैयार कर लेने के दावों के बीच हामिद यह भी जोड़ते हैं कि अगर कोरोना महामारी की तरह फैला तो दिक्कत हो सकती है। 

यह भी पढ़ें: एचआईवी की दवा से ठीक हुए कोरोना के मरीज पर ये दवाएं कितनी कारगर?

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