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अगले साल के इस महीने तक तैयार हो सकती है कोरोना की वैक्सीन, आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक का दावा

Sat, 23 May 2020 09:29 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना की वैक्सीन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Amar Ujala
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को लेकर दुनियाभर के लोगों को इसकी वैक्सीन आने का इंतजार है। दुनिया के विभिन्न देशों में फॉर्मा कंपनियां और स्वास्थ्य संस्थाओं के वैज्ञानिक कोरोना की वैक्सीन बनाने के लिए प्रयासरत हैं। कई देशों में अलग-अलग वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। भारत में भी कई वैज्ञानिक और संस्थाओं की ओर से इसके लिए प्रयास हो रहे हैं। फिलहाल जिन दो कंपनियों पर पूरे देश की नजर है, उनमें हैदराबाद की भारत बायोटेक और पुणे की सिरम इंस्टीट्यूट शामिल हैं। कोरोना की वैक्सीन के लिए आईसीएमआर यानी भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, हैदराबाद की भारत बायोटेक के साथ मिलकर काम कर रही है। इस बीच आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक का एक अहम बयान आया है। 
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आईसीएमआर - फोटो : social media
आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक निर्मल कुमार गांगुली के बयान के बाद आशंका जताई जा रही है कि कोरोना की वैक्सीन इस साल के अंत तक भी तैयार होना मुमकिन नहीं है। मालूम हो कि भारत बायोटेक कंपनी थॉमस जेफरसन यूनिवर्सिटी ऑफ फिलाडेल्फिया के साथ मिलकर वैक्सीन बनाने में जुटी हुई है। इस कंपनी को आईसीएमआर का साथ मिला है। 
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कोरोना की वैक्सीन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pexels
आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक एनके गांगुली ने कहा है- ऐसा लग रहा है कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए बनाया जा रहा टीका अगले साल यानी 2021 के जनवरी या फरवरी महीने में उपलब्ध हो पाएगा। इतना लंबा समय लगने के पीछे उन्होंने कहा कि इस टीके को लोगों की अलग-अलग रोग प्रतिरोधक क्षमता के हिसाब से एक तय मानक के लिए बनाया जाएगा। ऐसा इसलिए ताकि, यह सभी लोगों पर प्रभावी रूप से काम करे।

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शोध करते वैज्ञानिक(File Photo) - फोटो : PTI
एनके गांगुली के मुताबिक, देश में तैयार की जा रही वैक्सीन का प्रमुख उद्देश्य फिलहाल ये है कि यह स्पाइक प्रोटीन के अनुवांशिक कोड की ठीक तरह पहचान कर सके। हालांकि इसमें सफलता पहले भी मिल चुकी है और कोरोना के बढ़ते प्रभाव को समझने में मदद मिली है। इस प्रक्रिया में वैक्सीन के पूरी तरह सफल होने के बाद लोगों के इम्यून रिस्पॉन्स को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर
इम्यून रिस्पॉन्स यानी रोग प्रतिरोधकता की प्रतिक्रिया को मजबूत करने से शरीर में कोरोना वायरस को खत्म करने में मदद मिल सकती है। हालांकि यह एक लंबी प्रक्रिया है और इसमें काफी समय लग सकता है। आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक के बयान के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि इस साल वैक्सीन तैयार नहीं हो पाएगी। 
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Vaccine - फोटो : Social Media
संभावना जताई जा रही है कि अगले साल 2021 के जनवरी या फरवरी महीने में कोरोना का प्रभावी टीका तैयार हो पाएगा। आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक के मुताबिक, कोरोना महामारी से लड़ने के लिए अभी देश को कई बड़ी चुनौतियों से गुजरना पड़ेगा।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
मालूम हो कि फिलहाल कोरोना वायरस के इलाज के लिए कोई वैक्सीन या निश्चित दवा उपलब्ध नहीं है। दुनियाभर के डॉक्टर इसके लक्षणों का इलाज कर रहे हैं। पहले से जो दवाएं उपलब्ध है, उन्हीं का इस्तेमाल कर लोगों को ठीक किया जा रहा है। अलग-अलग तरह की थेरेपी भी अपनाई जा रही है। फिलहाल गंभीर लक्षणों वाले मरीजों के इलाज में समय ज्यादा लग रहा है। ऐसे में कोरोना की वैक्सीन आ जाए तो बड़ी राहत होगी।

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Dr. Suresh Jadhav, Serum Institute of India - फोटो : Amar Ujala
मालूम हो कि कोरोना की वैक्सीन तैयार करने में पुणे की सिरम इंडिया इंस्टीट्यूट भी लंबे समय से काम कर रही है। पिछले दिनों वैक्सीन को लेकर अमर उजाला को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने कई अहम जानकारियां दी थी और वैक्सीन की प्रगति के बारे में बताया था। उन्होंने भी यही कहा था कि वैक्सीन तैयार होना एक लंबी प्रक्रिया है।

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Dr. Suresh Jadhav, Serum Institute of India - फोटो : LinkedIn@Suresh Jadhav
डॉ. सुरेश जाधव का कहना था कि अभी कुछ निश्चित नहीं कहा जा सकता। ट्रायल चल रहा है और फिलहाल देखा जाएगा कि इसके कोई नकारात्मक या विपरीत परिणाम तो नहीं हो रहे। उन्होंने बताया कि जानवरों पर क्लिनिकल ट्रायल के बाद जब इंसानों पर ट्रायल शुरू होता है, तो सबसे पहले स्वस्थ शरीर पर इसका प्रयोग किया जाता है। इसके बाद अलग-अलग आयु के लोगों पर ट्रायल किया जाएगा कि वैक्सीन सभी आयुवर्ग में सही प्रभाव छोड़ता है या नहीं, सुरक्षित है या नहीं। इसकी गारंटी होने तक आगे नहीं बढ़ सकते।

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coronavirus vaccine - फोटो : Social Media
आगे की प्रक्रिया के बारे में डॉ. सुरेश जाधव ने बताया था कि फेज टू क्लिनिकल ट्रायल की प्रक्रिया होती है, जिसमें डोज तय किया जाता है। उन्होंने बताया था कि कोरोना संक्रमित और स्वस्थ दोनों ग्रुप में वैक्सीन के प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है। फिर सरकार की शीर्ष दवा नियामक एजेंसी ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से अनुमति लेनी होती है कि कितने लोगों पर ट्रायल करना है। यह देखना होता कि एंटीबॉडी कितने दिनों तक चल रही है।
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कोरोना का टीका बनाने में लंबा समय लग सकता है - फोटो : PTI
मालूम हो कि पिछले दिनों पीएमओ के वैज्ञानिक सलाहकार विजय राघवन ने कहा था कि वैक्सीन बनाने में कम से कम आठ महीने लगेंगे। उन्होंने ट्रायल की सारी प्रक्रियाओं की एक मानक अवधि के मुताबिक आकलन कर ऐसा बताया। डॉ. सुरेश जाधव ने इस संबंध में कहा कि अगर हर फेज के ट्रायल समय से चलते रहे, इसके सकारात्मक परिणाम आते रहे तो ही नियत समय पर वैक्सीन उपलब्ध हो पाएगा। अन्यथा ज्यादा समय भी लग सकता है।
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