प्रतीकात्मक तस्वीर
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भारत के जैव प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव डॉक्टर रेणु स्वरूप बताती हैं, 'एक स्वदेशी वैक्सीन का होना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' वहीं माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉक्टर गगनदीप कांग कहती हैं, 'कई वैक्सीन में से एक को चुनना और फिर उसे चुने गए समूहों तक पहुंचाना, ये सब बड़ी चुनौतियां हैं।' गगनदीप कांग रॉयल सोसाइटी ऑफ लंदन की फेलो चुनी जाने वालीं पहली भारतीय महिला हैं। वह कहती हैं, 'हम इस काम की जटिलता को समझते हैं। भारत की आधी आबादी का टीकाकरण करने में ही कुछ साल लग जाएंगे।' ऐसे में ये समझने की कोशिश करते हैं कि टीकाकरण के बेहतरीन अनुभव के बावजूद भारत सरकार के सामने कोविड-19 की वैक्सीन लोगों तक पहुंचाने में क्या चुनौतियां हैं।