रविवार को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक की कोविड-19 वैक्सीन को आपातकालीन सीमित इस्तेमाल की इजाजत दे दी। भारत बायोटेक की वैक्सीन का नाम कोवैक्सिन है और यह कोविड-19 के लिए देश की पहली स्वेदशी वैक्सीन है। लेकिन, डीजीसीआई के इन्हें इस्तेमाल करने का अप्रूवल दिए जाने के बाद ही इस फैसले पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए। कांग्रेस समेत एक तबके ने इस वैक्सीन के प्रभावी होने पर सवाल उठाए और पूछा कि जब इसके तीसरे चरण के ट्रायल्स अभी पूरे नहीं हुए हैं फिर भी इनके इस्तेमाल की इजाजत कैसे दी जा सकती है? दो जनवरी को सरकार ने पूरे देश में कोरोना वैक्सीन लगाने का ड्राई रन दोबारा चलाया। इसमें वैक्सीन लगाने की प्रक्रिया का परीक्षण किया गया। हालांकि, इस सबके बावजूद कोरोना वैक्सीन को लेकर कई तरह के सवाल लोगों के मन में हैं। यहां हम ऐसे ही कुछ सवालों का जवाब देने की कोशिश कर रहे हैं-
विज्ञापन
2 of 24
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
कोरोना वैक्सीन कब उपलब्ध हो सकती है?
इस बारे में सटीक रूप से बताना मुश्किल है, लेकिन इस तरह के अनुमान हैं कि अगले 15 दिन में वैक्सीन को लगाना शुरू किया जा सकता है। वैक्सीन लगाने का काम चरणबद्ध तरीके से होगा। मैक्स हेल्थकेयर के ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर संदीप बुद्धिराजा कहते हैं, 'जिस तरह की चर्चाएं हैं उसके लग रहा है कि जनवरी में वैक्सीन लगनी शुरू जाएगी।'
विज्ञापन
3 of 24
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
क्या सभी को इस वैक्सीन को लगवाना पड़ेगा?
पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति कुमार कहती हैं कि आदर्श स्थिति यही है कि बच्चों को छोड़कर सभी को यह वैक्सीन लगनी चाहिए। वे कहती हैं, 'इन वैक्सीन्स का ट्रायल 18 साल से कम उम्र के लोगों पर नहीं हुआ था।'
4 of 24
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई
किन्हें सबसे पहले यह वैक्सीन दी जाएगी?
वैक्सीन लगाने का काम चरणबद्ध तरीके से होगा। प्राथमिकता वाले ग्रुप को सबसे पहले यह वैक्सीन लगाई जाएगी। डॉ. कुमार कहती हैं, 'म्यूनिसिपल और दूसरे प्रशासनिक लोग, डॉक्टर्स और चिकित्सा से जुड़े लोग जो कि कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में फ्रंटलाइन पर काम कर रहे हैं, उन्हें सबसे पहले यह वैक्सीन लगाई जाएगी। 50 साल से ऊपर के और दूसरी बीमारियों से ग्रस्त लोग भी इसी ग्रुप में आएंगे और उन्हें भी शुरुआती चरण में ही वैक्सीन लगाने की कोशिश की जाएगी।'
विज्ञापन
5 of 24
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : pixabay
50 साल से कम के मगर दूसरी बीमारियों से जूझ रहे लोग भी क्या प्राथमिकता वाले ग्रुप में आएंगे?
डॉ. कुमार के मुताबिक, ये लोग प्राथमिकता वाले ग्रुप में नहीं आएंगे, क्योंकि ये डिमांड और सप्लाई का मामला है। जितनी वैक्सीन आएंगी उन्हें सबसे पहले कोविड-19 के मरीजों की देखभाल और इलाज के काम में सीधे तौर पर लगे हुए लोगों को दिया जाएगा। जितने ज्यादा लोगों तक वैक्सीन पहुंच जाएगी उतनी ही जल्दी हर्ड इम्यूनिटी विकसित हो जाएगी। डॉ. प्रीति कुमार कहती हैं कि ऐसा पाया गया है कि तकरीबन 70 फीसदी लोगों को वैक्सीन लग जाने पर हर्ड इम्यूनिटी पैदा हो जाती है।
विज्ञापन
6 of 24
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
पहले चरण में कितने लोगों को कवर किया जाएगा?
पहले चरण में 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाने की योजना है। बाद में जैसे-जैसे वैक्सीन उपलब्ध होगी उस हिसाब से इसका दायरा बढ़ाया जाएगा। इसमें पहले 10 करोड़ लोग और बाद में 20 करोड़ लोगों को इसी चरण में वैक्सीन लगाई जानी है।
विज्ञापन
7 of 24
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
पहला चरण कब तक पूरा हो जाएगा?
इस काम में महीनों का वक्त लगेगा और यह सब वैक्सीन की सप्लाई पर निर्भर करेगा। इसमें मैन्युफैक्चरिंग, स्टोरेज और वैक्सीन लगाने वाले मैनपावर की बड़ी भूमिका होगी।
8 of 24
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : pixabay
कैसे लगाई जाएगी वैक्सीन?
इन्हें दो डोज में दिया जाएगा। वैक्सीन प्वॉइंट्स बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर सोशल डिस्टेंसिग कायम रखने की कोशिश की जाएगी। जिन लोगों को वैक्सीन लगाई जाएगी उनका डेटाबेस बनाया जाएगा और उसी हिसाब से उन्हें वैक्सीन लगाई जाएगी।
9 of 24
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
वैक्सीन कितनी सुरक्षित है?
कोरोना वैक्सीन की रिसर्च की पूरी अवधि ही 9-10 महीने की है, ऐसे में फिलहाल इसकी सेफ्टी पर कोई संदेह नहीं है। किसी भी दूसरी वैक्सीन के जैसे ही इसकी टेस्टिंग हुई है। हालांकि, डॉ. प्रीति कुमार कहती हैं, 'इसके लॉन्ग टर्म इफेक्ट को देखा जाना बाकी है। कई वर्षों में ही किसी वैक्सीन के असर का पूरा पता चलता है, लेकिन दुनिया में आज तक इतने बड़े लेवल पर टेस्ट हुई वैक्सीन को वापस नहीं लेना पड़ा है।' डॉ. बुद्धिराजा कहते हैं, 'सभी वैक्सीन्स की सेफ्टी काफी अच्छी है। इनमें मामूली बुखार, सिरदर्द या इंजेक्शन लगाने वाली जगह पर दर्द होता है। ओवरऑल अगर कोई वैक्सीन 50 फीसदी तक प्रभावी होती है तो उसे सफल माना जाता है।'
10 of 24
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : PTI
क्या वैक्सीन लगाने के बाद भी कोरोना हो सकता है?
डॉ. बुद्धिराजा कहते हैं, 'इसके आसार बेहद कम हैं और अगर किसी को दोबारा संक्रमण हो भी जाता है तो वह उतना गंभीर नहीं होगा और इससे निमोनिया या मौत होने के आसार कम रहते हैं।'
11 of 24
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
कोरोना के नए स्ट्रेन पर वैक्सीन प्रभावी होगी?
डॉ. बुद्धिराजा कहते हैं, 'अध्ययनों के आधार पर कहा जा रहा है कि जो मौजूदा वैक्सीन हैं वे कोरोना में हो रहे बदलावों से भी बचाव में असरदार होंगी। खासतौर पर कोवैक्सिन एक इनेक्टिवेटिट होल वायरस वैक्सीन है। ये वैक्सीन इसलिए असरदार होती हैं क्योंकि ये पूरे वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनाती हैं और ऐसे में अगर वायरस में बदलाव भी हो तो भी उनमें उससे लड़ने की क्षमता होती है।'
12 of 24
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
कितनी बार लगानी होगी वैक्सीन और क्या होगा इसका शेड्यूल?
इस वैक्सीन की दो डोज होंगी। इसमें पहली डोज और दूसरे डोज के बीच का अंतर 21 से 28 दिन का होगा। डॉ. प्रीति कुमार कहती हैं कि ऐसा पाया गया है कि पहला डोज लगने के 10-14 दिन के बाद असर होना शुरू हो जाता है और यह बढ़ता चला जाता है।
13 of 24
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
क्या कोरोना के मौजूदा मरीजों को भी वैक्सीन लगाई जाएगी? जिन्हें कोरोना हो चुका है क्या उन्हें भी लगाई जाएगी वैक्सीन?
कोरोना मरीज के पूरी तरह से रिकवर होने के 14 दिन बाद उसे वैक्सीन लगाई जा सकती है, लेकिन चूंकि मौजूदा महामारी के वक्त में वैक्सीन की उपलब्धता कम होगी, ऐसे में कोरोना से रिकवर हुए मरीजों को बाद में वैक्सीन लगाई जा सकती है। मैक्स हेल्थकेयर के डॉ. बुद्धिराजा कहते हैं, 'जब कोई नेचुरल बीमारी होती है तो उसमें कुछ वक्त में इम्यूनिटी मिल जाती है। लेकिन, कोरोना के मामले में हमें यह नहीं पता कि यह इम्यूनिटी कितनी लंबी चलेगी। कुछ लोगों को दोबारा भी संक्रमण हुआ है। ऐसे में कोरोना से रिकवर हो चुके लोगों को भी वैक्सीन लेने की सलाह दी जा रही है।' हालांकि, वे कहते हैं कि कोरोना से संक्रमित हुए लोग तीन से छह हफ्ते के लिए इससे सुरक्षित हो जाते हैं और ऐसे में उन्हें वैक्सीन देने की कोई जल्दी नहीं है।
14 of 24
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
अगर कोई दूसरी डोज लगवाने से चूक गया तो क्या होगा?
अगर डोज मिस हो जाती है तो दूसरी डोज कभी भी लगवा सकते हैं। अभी भारत में इसका कोई प्रोटोकॉल तय नहीं है, लेकिन ये जितनी जल्दी लगवा ली जाए उतना अच्छा है।
15 of 24
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
क्या दोनों डोज एक जैसी होनी चाहिए?
एक वैक्सीन की दो डोज लगनी हैं और दोनों डोज एक ही ब्रांड की होनी चाहिए। यानी अगर आप पहली डोज कोवैक्सिन की लगाते हैं तो दूसरी वैक्सीन भी कोवैक्सिन की ही होनी चाहिए।
16 of 24
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
जिन्होंने कोविड के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी ली है क्या उन्हें भी वैक्सीन लगानी पड़ेगी?
इस तरह के मरीजों को भी कोरोना से रिकवर हो दूसरे मरीजों की तरह ही माना जाएगा।
17 of 24
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
क्या गर्भवती महिलाएं यह वैक्सीन लगवा सकती हैं?
डॉ. बुद्धिराजा कहते हैं कि अभी भारत में जो ट्रायल्स हुए हैं और वैक्सीन्स का अप्रूवल 18 साल से ज्यादा उम्र के और ऐसी महिलाएं जो गर्भवती नहीं हैं उनके लिए है। आगे के ट्रायल्स में इन चीजों को देखा जाएगा।
18 of 24
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
क्या डायबिटीज से जूझ रहे लोगों को वैक्सीन लगाई जाएगी?
डायबिटीज के मरीज ज्यादा रिस्क वाले लोगों में हैं और उन्हें वैक्सीन प्राथमिकता के आधार पर दी जाएगी।
19 of 24
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
किस उम्र के बच्चों को वैक्सीन दी जा सकती है?
ये पहली वैक्सीन है जो कि 12 साल से कम के बच्चों के लिए नहीं है। वयस्कों को ही लगाने को इसमें प्राथमिकता दी जा रही है।
20 of 24
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
इनका क्या साइड इफेक्ट हो सकता है?
इसमें बुखार आना, सिरदर्द जैसी चीजें शुरुआत में दिखाई देती हैं, जो कोई बड़ी दिक्कत की बात नहीं है। डॉ. बुद्धिराजा कहते हैं, 'गंभीर साइड इफेक्ट्स काफी दुर्लभ हैं, लेकिन ऐसे साइड इफेक्ट्स हमने दूसरी वैक्सीन्स के साथ भी देखे हैं।फाइजर की वैक्सीन में एलर्जी के कुछ मामले आए हैं, लेकिन कहा जा रहा है कि भारत में कोवीशील्ड और कोवैक्सिन में ऐसा नहीं होगा। ओवरऑल सभी इंजेक्शन सेफ हैं।'
21 of 24
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
अगर कोई वैक्सीन नहीं लेना चाहता है तो क्या होगा?
डॉ. प्रीति कुमार कहती हैं कि वैक्सीनेशन में लोगों की जागरूकता जरूरी है। सरकार अपनी ओर से लोगों को समझाने की कोशिश कर रही है। जैसे-जैसे लोगों में जागरूकता पैदा होगी वे इसे लगवाने के लिए सामने आएंगे।
22 of 24
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
भारत में कितनी तरह की वैक्सीन उपलब्ध होने की संभावना है?
फाइजर और बायोटेक की दो वैक्सीन्स एमआरएनए वैक्सीन हैं और इन्हें बेहद ठंडा तापमान चाहिए। इनके साथ स्टोरेज की दिक्कत है। डॉ. प्रीति कुमार कहती हैं, 'हमारा मौजूदा कोल्ड चेन इतने कम तापमान को मेंटेन रखने वाला नहीं है। इन वैक्सीन्स ने भी डीसीजीआई में अप्रूवल के लिए अप्लाई किया है, लेकिन इन्हें उपयोग में लाना मुश्किल है।' इस हिसाब से फिलहाल सीरम इंस्टीट्यट की एस्ट्राजेनेका वाली और भारत बायोटेक-आईसीएमआर की वैक्सीन्स के ही देश में इस्तेमाल होने के ज्यादा आसार हैं, क्योंकि इन्हें सामान्य फ्रिज में स्टोर किया जा सकता है। मौजूदा वक्त में करीब सात वैक्सीन्स अप्रूवल्स के अलग-अलग स्तरों पर हैं।
23 of 24
कोवैक्सीन
- फोटो : पीटीआई
डीसीजीआई के अप्रूवल के क्या मायने हैं?
डीसीजीआई ने जो अप्रूवल दिया है उस हिसाब से भारत बायोटेक की वैक्सीन को फील्ड में उतारने में वक्त लगेगा। ऐसे में एस्ट्राजेनेका ही फिलहाल इस्तेमाल होगी।
वैक्सीन लगने के बाद क्या बिना मास्क लगाए घूम सकते हैं?
वैक्सीन लगाने के बाद भी मास्क लगाना जरूरी है। डॉ. कुमार कहती हैं, 'वैक्सीन एक अतिरिक्त सुरक्षा उपाय है। सामाजिक दूरी, मास्क और दूसरे उपाय करना वैक्सीन लगवाने के बाद भी जरूरी होगा।' डॉ. बुद्धिराजा कहते हैं कि वैक्सीन लगाने के बाद मास्क न पहनने की सोच गलत है। सामाजिक दूरी, मास्क कम से कम एक-डेढ़ साल जरूरी रहेंगे। वे कहते हैं, 'सबसे ज्यादा सेफ्टी मास्क से मिलती है।'