फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Coronavirus Vaccine: भारत में किस तरह की वैक्सीन आएगी और लोगों को कितनी खुराक दी जाएगी? जानिए सबकुछ

Tue, 01 Dec 2020 01:26 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
भारत में कोरोना वैक्सीन - फोटो : Pixabay
भारत में अब तक 94 लाख 63 हजार से अधिक लोग कोरोना से संक्रमित हुए हैं, वहीं इससे स्वस्थ होने की दर भी बढ़ कर लगभग 94 फीसदी तक पहुंच गई है। देश में स्वस्थ होने वालों की संख्या संक्रमितों की संख्या से करीब 20 गुना ज्यादा है। हालांकि इसके बावजूद खतरा को बना हुआ है और इसी से निपटने के लिए दुनियाभर में वैक्सीन बनाए जा रहे हैं। कई कंपनियां तो अब वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी भी मांग रही हैं, लेकिन अभी से वैक्सीन से जुड़े कई सवाल बस सवाल ही बने हुए हैं। जैसे- भारत में किस तरह की वैक्सीन आने की उम्मीद है, वैक्सीन आने पर उसकी कितनी खुराक दी जाएगी? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं इन सवालों के जवाब... 
विज्ञापन

2 of 6
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
वैक्सीन पर पीएम और वैज्ञानिकों के बीच हुई चर्चा को कैसे देखते हैं? 
  • गंगाराम अस्पताल के डॉ. ले. जनरल वेद चतुर्वेदी बताते हैं, 'वैक्सीन बनाने के लिए तमाम संस्थाएं काम कर रही हैं। देश के प्रधानमंत्री होने की जिम्मेदारी निभाते हुए पीएम मोदी हर चीज पर नजर बनाए हुए हैं। वो केवल वैक्सीन के शोध नहीं बल्कि इससे कहीं आगे सोचते हैं। हमारे वैज्ञानिक व उनकी टीमें दिन रात लग कर हमारी सुरक्षा के लिए वैक्सीन तैयार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री उनका हौसला बढ़ाने के लिए उनसे संवाद कर रहे हैं। कोई कितना भी बड़ा योद्धा हो अगर उसे जनता का सहयोग और सराहना मिलती है तो उत्साह और बढ़ जाता है। पीएम मोदी देशवासियों की तरफ से वैज्ञानिकों को यही बताना चाहते हैं कि हम सब उनके साथ खड़े हैं।' 
विज्ञापन

3 of 6
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
वैक्सीन को लेकर कई तरह की भ्रामक खबरें भी चल रही हैं, उन पर क्या कहेंगे? 
  • डॉ. ले. जनरल वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'समाज में अलग-अलग तरह के लोग रहते हैं, जो बेवजह भ्रामक खबरें फैलाते हैं। जैसे हाल ही में किसी ने एक वैक्सीन के बारे में कहा कि इससे उसकी सोचने समझने की क्षमता कम हो गई है और कंपनी के खिलाफ केस कर दिया, जबकि किसी भी वैक्सीन को बनाने और मानव परीक्षण से पहले वैज्ञानिक काफी परीक्षण करते हैं। सभी से अपील है कि आप भ्रामक खबरों में न फंसें।' 

4 of 6
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
सामान्यत: वैक्सीन बनाने में कितना समय लगता है? 
  • डॉ. ले. जनरल वेद चतुर्वेदी बताते हैं, 'इंफ्लूएंजा वैक्सीन, पोलियो, टिटनेस वैक्सीन हो, इस सबको बनाने में करीब 15 साल लग गए। दरअसल, वैक्सीन के परीक्षण में काफी समय लग जाता है। कोरोना काल में जो भी परीक्षण हो रहे हैं, लोग उनपर यह चर्चा कर रहे हैं कि ये प्रभावी होंगी कि नहीं। ऐसा मत सोचें, क्योंकि शरीर में बनने वाले एंटीबॉडी छह महीने रहेंगे या एक साल तक, यह अभी कह नहीं सकते। इस समय वैक्सीन को इमरजेंसी में मान्यता दी जा रही है। इसे लेकर परेशान नहीं होना है, जो भी वैक्सीन आएगी, वो सुरक्षित होगी।'
विज्ञापन

5 of 6
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
भारत में किस तरह की वैक्सीन आने की उम्मीद है? 
  • डॉ. ले. जनरल वेद चतुर्वेदी के मुताबिक, 'मॉडर्ना वैक्सीन बनाने में जेनेटिक मेटेरियल का प्रयोग कर रही है, जो कि वायरस का काम करता है। अगर शरीर में पहले ही उस तरह का वायरस मौजूद रहेगा तो बाहर से अंदर जाने वाला वायरस नकरात्मक प्रभाव नहीं करेगा। यह 95 फीसदी तक प्रभावी बताई जाती है। ऑक्सफोर्ड और स्पूतनिक वैक्सीन बनाने में वायरल वैक्टर को प्रयोग कर रही हैं। ये 80-85 फीसदी तक प्रभावी होती है। इस वैक्सीन को डीप फ्रीज करने की जरूरत नहीं होती, लेकिन जेनेटिक मेटेरियल वाली वैक्सीन को डीप फ्रीज करने की जरूरत होती है। हम दोनों तरह की वैक्सीन का प्रयोग कर सकते हैं।' 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
वैक्सीन आने पर उसकी कितनी खुराक दी जाएगी? 
  • डॉ. ले. जनरल वेद चतुर्वेदी बताते हैं, 'अभी वैक्सीन की दो खुराक दी जाएंगी। अब कितने अंतराल पर दी जाएंगी, अभी यह तय नहीं किया गया है। चूंकि अभी शोध जारी है, इसलिए बदल भी सकती है।' 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें