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कोरोना वायरस: बचाव के उपाय के बाद भी कहां हो रही है चूक? विशेषज्ञ से जानें

Tue, 30 Mar 2021 10:46 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस - फोटो : Pixabay
भारत में कोरोना संक्रमण के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। हर दिन देश में 60 हजार से अधिक नए मामले सामने आ रहे हैं। इससे चिंताएं काफी बढ़ गई हैं, इसलिए अलग-अलग राज्य सरकारों द्वारा कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं। हालांकि इस बीच देश में टीकाकरण अभियान में भी काफी तेजी आई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अब तक छह करोड़ पांच लाख से अधिक लोगों को कोरोना के टीके लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा इस महामारी से देश में अब तक एक करोड़ 13 लाख से अधिक लोग पूरी तरह स्वस्थ भी हो चुके हैं। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना वायरस और वैक्सीन से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब... 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
वैक्सीन लगने के बाद लोग बाहर घूमने लगे हैं, दूसरे राज्यों में जाने लगे हैं, क्या ये भी केस बढ़ने की वजह है? 
  • दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल की डॉ. रूपाली मलिक कहती हैं, 'जब से टीकाकरण शुरू हुआ है, हम तभी से यह कह रहे हैं कि वैक्सीन लगने के बाद भी कोरोना एप्रोप्रियेट बिहेवियर (कोरोना से बचने के उपाय) का पालन करना है, क्योंकि हो सकता है आपको वो लक्षण न हों, लेकिन दूसरों के लिए या आसपास रहने वाले लोगों के लिए आप एक कैरियर का काम कर सकते हैं। सब जानते हैं कि वैक्सीन की प्रभावकारिता 100 प्रतिशत नहीं है, किसी की भी नहीं होती है। तो हम ये नहीं जानते कि किस व्यक्ति में वैक्सीन ने ज्यादा काम किया या किसमें कम। तो इन सब चीजों को मद्देनजर रखते हुए केंद्र सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से ये हिदायत दी जा रही है कि वैक्सीन लग जाने के बाद भी आपको अपना ख्याल रखना है।' 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
वैक्सीन किस तरह से काम करती है? कब एंटीबॉडी बनती हैं और कब समाप्त हो जाती हैं? 
  • डॉ. रूपाली मलिक कहती हैं, 'वैक्सीन की दो डोज लगती हैं। कोविशील्ड की अगर बात करें तो यह पहले चार हफ्ते के अंतराल पर लग रही थी, अब वो 6-8 हफ्ते के अंतराल पर लग रही है। वहीं कोवैक्सीन की डोज चार हफ्ते के अंतराल पर लग रही है। दूसरी डोज लगने के तीन हफ्ते के बाद आप खुद को सुरक्षित मान सकते हैं। लेकिन वैक्सीन लगने के बाद भी यह कहना कि आप 100 प्रतिशत सुरक्षित हैं तो ये सही नहीं है, क्योंकि वैक्सीन की प्रभावकारिता कम होती है। सबको समझना होगा कि अभी हम एवोल्विंग प्रोसेस में हैं। टीकाकरण 16 जनवरी से ही शुरू हुआ है। हमें इसके सभी पहलुओं को समझने के लिए कुछ और समय देना होगा। फिलहाल जितना भी शोध हुआ है, उसके आधार पर मान कर चल सकते हैं कि छह महीने तक हम सुरक्षित रहेंगे। लेकिन यह एंटीबॉडी बनने पर निर्भर करता है।' 

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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
पिछले कुछ दिनों से कोरोना की रफ्तार बढ़ रही है, बचाव के उपाय होने के बाद भी कहां चूक हो रही है? 
  • डॉ. रूपाली मलिक कहती हैं, 'चूक के बहुत से कारण हैं, कोरोना से लड़ते हुए एक साल से ज्यादा का समय हो गया है, उसकी वजह से हम थोड़ी ढिलाई बरत रहे हैं। शुरुआत में हम कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर (कोरोना से बचने के उपाय) का पालन कर रहे थे, अब नहीं कर रहे हैं। मास्क पहनना, हाथ धोना जैसी चीजों को हम नहीं कर रहे हैं। अगले कुछ महीने जब तक सभी को वैक्सीन नहीं लग जाती है, तब तक हमें इन नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है। यही सोशल वैक्सीन इस लड़ाई में हमारा सबसे बड़ा हथियार है। त्योहार में भी कोरोना एप्रोप्रियेट बिहेवियर को नहीं छोड़ना है। जब भी त्योहार मनाने घर से बाहर निकलें, सुरक्षित शारीरिक दूरी जैसी अन्य चीजों का ध्यान रखें।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
वैक्सीन आ जाने के बाद भी लगातार केस बढ़ रहे हैं, हमें कब तक सावधान रहने की जरूरत है? 
  • डॉ. रूपाली मलिक कहती हैं, 'आज म्यूटेंट वायरस की बात की जा रही है। हर वायरस कुछ समय बाद अपना स्वरूप बदलता है, ये नॉर्मल होता है। बस ये वाला वायरस थोड़ा तेजी से म्यूटेट कर रहा है और अलग-अलग तरह से कर रहा है। जैसे हाल ही में हमने भारत में डबल म्यूटेशन के बारे में सुना, तो हो सकता है हमारी वैक्सीन म्यूटेशन को खत्म करने में अभी अच्छे से काम न कर पाए या कोरोना हो जाने के बाद जो लोग ठीक हुए हैं, उनके अंदर जो एंटीबॉडीज बनी हैं, वो काम न कर पाएं, वो लोग भी दोबारा ग्रसित हो सकते हैं। हमारी इतनी बड़ी जनसंख्या है, धीरे-धीरे लोग बाहर जा रहे हैं तो कोरोना संक्रमण की संभावना और बढ़ गई है। अभी एक फीसदी से भी कम लोगों का टीकाकरण हुआ है। तो जब तक 60-70 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन नहीं लग जाती, तब तक हमें सावधान रहना होगा।' 
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