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कोवैक्सीन और कोविशील्ड में क्या अंतर है, इनके साइड-इफेक्ट कैसे हैं? विशेषज्ञ से जानें सबकुछ

Fri, 22 Jan 2021 02:09 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : iStock
16 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में दुनिया के सबसे बड़े कोविड टीकाकरण अभियान की शुरुआत की थी और तब से लेकर अब तक 10 लाख से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को टीका लगाया जा चुका है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, गुरुवार को दो लाख तीस हजार से अधिक लोगों को टीके लगाए गए। यहां टीकाकरण में भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि वैक्सीन को लेकर अभी भी लोगों के मन में कई तरह के संशय हैं। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं वैक्सीन से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब... 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
जो लोग वैक्सीन को लेकर संशय में हैं, उनसे क्या कहेंगे? 
  • दिल्ली स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के डॉ. राजेंद्र कुमार धमीजा कहते हैं, 'सोशल मीडिया पर जिस तरह का भ्रामक प्रचार किया जा रहा है, उसके चक्कर में बिल्कुल भी मत पड़ें। वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित हैं, दोनों वैक्सीन बहुत कठिन चरणों से गुजरने के बाद ही अप्रूव (मंजूर) हुई हैं। वैक्सीन के अप्रूवल की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। अगर लोग बहकावे में आकर वैक्सीन नहीं लगवाएंगे तो आगे महामारी को रोकना कठिन हो सकता है। अगर आप यह सोच रहे हैं कि इम्यूनिटी मजबूत है, संक्रमण होने पर कुछ नहीं होगा, तो ऐसा नहीं है। कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर कोई भी व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार पड़ सकता है, जान भी जा सकती है, इसलिए वैक्सीन से दूर मत भागें।' 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोविड-19 वैक्सीन के साइड इफेक्ट कैसे हैं? 
  • डॉ. राजेंद्र कुमार धमीजा कहते हैं, 'अब तक 10 लाख लोगों को वैक्सीन लग चुकी है और उनमें मात्र 0.002 फीसदी लोगों में ही साइड-इफेक्ट दिखे। वो ऐसे इफेक्ट हैं, जो आमतौर पर सभी वैक्सीन में होते हैं। यहां तक कि सभी दवाईयों के भी अपने साइड-इफेक्ट होते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि जरूरत पड़ने पर दवाई नहीं खाएंगे। इन 0.002 फीसदी लोगों में इंजेक्शन लगने की जगह पर लाल पड़ने, अधिक दर्द, रैशेज, हल्के बुखार, आदि शिकायतें मिली हैं, जो आमतौर पर बच्चों को लगाई जाने वाली वैक्सीन में भी होता है।' 

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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
लोग वैक्सीन को लगवाने से कतरा रहे हैं, उनसे क्या कहेंगे? 
  • डॉ. राजेंद्र कुमार धमीजा कहते हैं, 'हमारे देश में ही नहीं, बल्कि कई देशों में ऐसा हमेशा से होता आया है। आप पोलियो वैक्सीन को ही ले लीजिए। शुरू-शुरू में कुछ लोग थे जिन्होंने वैक्सीन के प्रति झिझक दिखाई, लेकिन आगे चलकर जब वैक्सीन के फायदे दिखे, तो लोग टीकाकरण में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने लगे। उसी की परिणाम है कि आज पोलियो हमारे देश में जड़ से खत्म हो चुका है। इसी प्रकार अगर कोरोना को जड़ से उखाड़ कर फेंकना है, तो सभी को वैक्सीन के प्रति सकरात्मक सोच रखनी होगी और नंबर आने पर लगवानी होगी।' 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोवैक्सीन और कोविशील्ड में क्या अंतर है? 
  • डॉ. राजेंद्र कुमार धमीजा कहते हैं, 'कोवैक्सीन एक प्रकार का किल्ड वायरस है, उससे कभी कोरोना नहीं हो सकता है। इस वैक्सीन से कोरोना वायरस को खतरा है, न कि हमें। कोविशील्ड एक जेनेटिक वैक्सीन है, यानी न्यूक्लिक एसिड वैक्सीन है, इसमें एक हार्मलेस (नुकसान न पहुंचाने वाला) एडीनो वायरस हमारे शरीर में इंजेक्ट किया जाता है, जो हमारे शरीर को एंटीबॉडी बनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। दोनों वैक्सीन हजारों लोगों को दी जा चुकी है, इसकी सुरक्षा में कोई संशय नहीं है।'  
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
पहले चरण में कितने लोगों को वैक्सीन दी जाएगी? 
  • डॉ. राजेंद्र कुमार धमीजा कहते हैं, 'सरकार ने पहले चरण में 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन देने की योजना बनाई है, जिनमें एक करोड़ हेल्थकेयर वर्कर्स हैं, जिनको अस्पताल चलाने हैं। इस सिस्टम को चालू रखना है। उसके बाद फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन दी जाएगी, जिनमें पुलिस वाले, एंबुलेंस ड्राइवर, आदि हैं। इनकी संख्या करीब दो करोड़ के आसपास है। उसके बाद 50 वर्ष की आयु से अधिक लोगों का टीकाकरण किया जाएगा। इनकी संख्या करीब 27 करोड़ है।' 
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