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Coronavirus: कैसे पता चलेगा कि शरीर में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी कम हो गए हैं? विशेषज्ञ से जानें

Thu, 25 Feb 2021 12:30 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस - फोटो : Pixabay
भारत में लोगों को कोरोना वैक्सीन देने का काम काफी तेजी से चल रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अब तक देश में एक करोड़ 23 लाख से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को कोरोना का टीका लगाया जा चुका है। इनमें 65 लाख से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को टीके की पहली खुराक और 14 लाख 81 हजार से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को टीके की दूसरी खुराक दी गई है। मंत्रालय ने बताया कि बुधवार को दो लाख से अधिक लोगों को टीका लगाया गया। इनमें एक लाख 17 हजार के करीब लोग ऐसे थे, जिन्हें टीके की पहली खुराक दी गई, जबकि 83 हजार से अधिक लोगों को दूसरी खुराक दी गई। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना और वैक्सीन से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब... 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कैसे पता चलेगा कि शरीर में एंटीबॉडी कम हो गए हैं? 
  • रायपुर स्थित जीएमसी के डॉ. ओ. पी. सुंदरानी कहते हैं, 'सामान्य तौर पर माना जाता है कि एंटीबॉडी 3-6 महीने तक रहते हैं। अभी वैक्सीन नई है, लोगों को अभी दूसरी डोज लगाई जा रही है। अब इसके 15 दिन बाद एंटीबॉडी चेक किए जाएंगे। यह टेस्ट सभी का तो नहीं कर सकते हैं, लेकिन सैंपल साइज लेकर चेक करेंगे कि शरीर में कितनी मात्रा में एंटीबॉडी बने हैं। उसके बाद, तीन महीने बाद पुन: चेक किया जाएगा। तभी बता सकेंगे कि एंटीबॉडी शरीर में कितने दिन तक रहते हैं।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या गांव में कोरोना का संक्रमण नहीं फैलता है? 
  • डॉ. ओ. पी. सुंदरानी कहते हैं, 'ये कहना गलत है कि गांव में कोरोना का संक्रमण नहीं फैलेगा, बल्कि गांव के लोगों को ज्यादा सतर्क रहना है, क्योंकि वहां शहर जितनी त्वरित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। अगर एक बार कोरोना पहुंच गया तो उसे रोकना मुश्किल हो जाता है। भले ही गांव में वातावरण साफ है, लोगों की इम्यूनिटी भी अच्छी है, लेकिन बुजुर्ग या बीमार लोगों पर वायरस गंभीर असर कर सकता है। इसलिए शहर हो या गांव, कोरोना से सभी को बचना है।' 

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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
न्यू नॉर्मल का लोग कितना पालन कर रहे हैं? 
  • डॉ. ओ. पी. सुंदरानी कहते हैं, 'सबको पता है कि भीड़-भाड़ वाली जगह से बचना है, लेकिन फिर भी लोग इसे फॉलो नहीं कर रहे हैं। मास्क को भी जितनी गंभीरता से लेना चाहिए, लोग नहीं ले रहे हैं। सितंबर-अक्तूबर में जितना फॉलो करते थे, उतना अब नहीं कर रहे हैं। ऐसे में अगर किसी युवा को संक्रमण हुआ तो हो सकता है वो स्वयं जल्दी ठीक हो जाए, लेकिन जो लोग कोमोरबिडिटी से ग्रसित हैं या बुजुर्ग हैं, उनके लिए यह घातक हो सकता है। पहले लोग बाहर नहीं जाते थे, अब तो लोग भी बाहर जा रहे हैं और बाहर के लोग घर में भी आ रहे हैं। ध्यान रहे, जो कुछ भी करें, सावधानीपूर्वक करें।' 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
पहली डोज जिस वैक्सीन की लगवाई है, क्या दूसरी डोज भी उसी की लगवानी है? 
  • डॉ. ओ. पी. सुंदरानी कहते हैं, 'कोविशील्ड और कोवैक्सीन दोनों का काम कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी बनाना है, लेकिन दोनों अलग-अलग पद्धति से बनाई गई हैं। इसलिए जरूरी है कि पहली डोज जिस वैक्सीन की ली है, उसी की ही दूसरी डोज होनी चाहिए। हालांकि जब आप पहली डोज लगवाएंगे, तो आपको जो पर्चा दिया जाएगा, उस पर लिखा होगा कि आपको कौन सी वैक्सीन दी गई है।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
वायरस म्यूटेट होता रहता है, इस पर कैसे काबू पा सकते हैं? 
  • डॉ. ओ. पी. सुंदरानी कहते हैं, 'हर वायरस की अपनी प्रकृति होती है और वो समय-समय पर अपनी प्रकृति बदलता रहता है। पहले भी सार्स वायरस आए थे तो उनमें वायरस म्यूटेट हुए थे। कई बार म्यूटेशन के बाद वायरस का असर कम हो जाता है, जिससे संक्रमण कम होता जाता है। लेकिन कई बार यह म्यूटेट होकर गंभीर असर करने लगता है। म्यूटेशन को तो हम रोक नहीं सकते, लेकिन खुद को इन म्यूटेट वायरस से बचा जरूर सकते हैं, वो हम केवल सभी नियमों का पालन करके ही कर सकते हैं।' 
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