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Coronavirus Vaccine: टीकाकरण के बावजूद क्यों बढ़ने लगे हैं कोरोना संक्रमण के मामले? विशेषज्ञ से जानें सबकुछ

Tue, 09 Mar 2021 08:25 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वैक्सीन - फोटो : iStock
भारत में एक तरफ जहां कोरोना वायरस के खिलाफ तेजी से टीकाकरण अभियान चल रहा है, तो वहीं संक्रमण के मामले भी बढ़ने लगे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में अब तक दो करोड़ नौ लाख से अधिक लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है। इस बीच, देश में कोरोना से स्वस्थ होने की दर भी बढ़कर 96.91 फीसदी हो गई है। मंत्रालय ने बताया है कि अब तक एक करोड़ आठ लाख से अधिक लोग कोरोना के संक्रमण से ठीक हो चुके हैं। वहीं, यहां कोरोना से अब तक एक लाख 57 हजार से अधिक लोगों की मौत भी हो चुकी है। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना वायरस और वैक्सीन से जुड़े सवालों के जवाब... 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
टीकाकरण की शुरुआत हो गई है, लेकिन फिर भी केस क्यों बढ़ने लगे हैं? 
  • दिल्ली स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. अपर्णा अग्रवाल कहती हैं, 'जिस तरह से अब सबकुछ खुल चुका है, स्कूल-कॉलेज आदि भी खुल गए हैं, तो केस बढ़ना लाजमी है। इसके अलावा अब लोग कोरोना के नियमों का पालन करते-करते ऊब गए हैं। कम केस होने पर लोग मास्क नहीं लगा रहे हैं, भीड़ में जा रहे हैं। इस वजह से भी केस बढ़ रहे हैं। इसलिए वैक्सीन लग भी जाए तो भी एहतियात बरतना है।'  
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
अगर कोई व्यक्ति अकेले रहता है और वैक्सीन लगवाने के बाद कुछ साइड इफेक्ट हो गए तो क्या करें? 
  • डॉ. अपर्णा अग्रवाल कहती हैं, 'सबसे जरूरी बात कि साइड इफेक्ट बहुत ही कम लोगों को होते हैं और अगर किसी को होते भी हैं, तो कुछ घंटों या एक-दो दिन के लिए ही रहते हैं। बहुत जरूरी हुआ तो पैरासिटामोल की गोली लेने से भी आराम हो जाता है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि उसे वैक्सीन लगवाने से कुछ साइड इफेक्ट हुए हैं और अगर वह अकेले हैं तो अस्पताल में भर्ती हो सकते हैं या सेंटर पर भी जानकारी दे सकते हैं और एडमिट हो सकते हैं।' 

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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या दोबारा वैक्सीन लेने की भी जरूरत है? 
  • डॉ. अपर्णा अग्रवाल कहती हैं, 'नहीं, इस तरह की कोई गाइडलाइन अभी नहीं आई है। फिलहाल वैक्सीन की पहली डोज लगने के चार से छह हफ्ते बाद दूसरी डोज लगवानी है। उसके दो हफ्ते बाद शरीर में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी बनेंगी। भारत में अभी टीकाकरण दिसंबर-जनवरी से शुरू हुआ है, इसलिए अभी ये पता करने में समय लगेगा कि शरीर में एंटीबॉडी कितने दिन तक रहती है और यह कितनी प्रभावी है। इसलिए अभी सिर्फ एक बार ही वैक्सीन की दोनों डोज लेनी है।' 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
अगर कोविड से ठीक हुए मरीज में एंटीबॉडी बन गई है, तो ऐसे में वह कब वैक्सीन लगवा सकता है? 
  • डॉ. अपर्णा अग्रवाल कहती हैं, 'कोरोना वायरस बीमारी को ज्यादा दिन नहीं हुए हैं, इसलिए कोविड से ठीक होने वाले व्यक्ति के शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी कितने दिन तक रहेगी, कुछ कहा नहीं जा सकता है। लेकिन अभी तक हुए शोध के मुताबिक, करीब तीन से छह महीने तक एंटीबॉडी रहती है। लेकिन कई लोगों में एंटीबॉडी नहीं भी बनती है, ऐसे लोगों में एक टी सेल इम्यूनिटी रहती है। जहां तक वैक्सीन लगवाने की बात है, विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत सरकार की गाइडलाइन के बाद अगर कोविड होने के बाद एसिम्प्टोमेटिक या हल्का संक्रमण रहा है तो 4-6 हफ्ते बाद और जो गंभीर रूप से बीमार हुए हों या अस्पताल में भर्ती हुए हैं, वो आठ हफ्ते बाद वैक्सीन लगवा सकते हैं।' 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
बच्चों को वैक्सीन कब लगेगी? 
  • डॉ. अपर्णा अग्रवाल कहती हैं, 'बच्चों को अभी वैक्सीन नहीं लगेगी, क्योंकि ट्रायल नहीं हुए हैं। अमेरिका और ब्रिटेन में अभी पांच से 18 साल तक के बच्चों पर ट्रायल शुरू हुआ है। रिजल्ट आने पर आगे की प्रतिक्रिया की जाएगी। भारत में भी कोवैक्सीन ने सरकार से बच्चों में ट्रायल शुरू करने की अनुमति मांगी है। एक बार ट्रायल शुरू हो कर नतीजे आ जाएंगे, उसके बाद टीकाकरण के बारे में बताया जाएगा।' 
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