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क्यों मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम की चपेट में आ रहे हैं बच्चे? लक्षण से लेकर बचाव तक यहां जानें सबकुछ

Sat, 22 May 2021 03:48 PM IST
प्रकाश चंद जोशी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
डॉ. विपिन जैन 
बाल रोग विशेषज्ञ

Medically Reviewed by Dr. Vipin Jain

देशभर में कोरोना वायरस की दूसरी लहर की वजह से काफी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। वहीं, ये वायरस काफी लोगों की जान भी ले रहा है। इन सबके बीच एक मुसीबत जो सामने आई है वो है मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम, जो बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा है। कई राज्यों में मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम के लक्षण बच्चों में दिखाई दे रहे हैं, जिसके बाद उन्हें अस्पताल तक में भर्ती कराना पड़ा है। ऐसे में बच्चों के लिए ये काफी खतरनाक साबित हो सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम क्या है और कैसे बच्चों पर इसका प्रभाव पड़ रहा है? शायद नहीं, तो चलिए जानते हैं इस बारे में।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
क्या है मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम?
  • दरअसल, मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम कोई बीमारी नहीं है, बल्कि ये लक्षणों पर आधारित एक सिंड्रोम है। इसमें बच्चों के फेफड़ों, दिल, पाचन तंत्र, गुर्दे, त्वचा, मस्तिष्क और आंखों में इंफेक्शन और सूजन देखी गई है। जहां महाराष्ट्र में कोरोना से ठीक हुए बच्चों में इसके लक्षण देखे गए, तो वहीं नागपुर में दो से 12 साल के कुछ बच्चों में भी इसके लक्षण देखे गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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ऑक्सीजन का लाभ उठाता संक्रमित बच्चा - फोटो : अमर उजाला
ये लक्षण दिखे तो हो जाएं सावधान:-

-बुखार आना
-सूजन आना
-सांस लेने में तकलीफ
-पेट में दर्द
-त्वचा का नीला पड़ना
-नाखूनों का नीला पड़ना।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
डॉक्टर से करें संपर्क
  • इस बात का ध्यान खासतौर पर देना चाहिए कि अगर बच्चे की कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है, और फिर भी उनमें ये सब लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो ऐसे में ये मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ऐसे रख सकते हैं बच्चों का ध्यान

-जब घर के बड़े लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं, तब भी उन्हें 15-20 दिन तक आइसोलेट रहना चाहिए। वहीं, अगर आप बच्चों के पास जा रहे हैं, तो मास्क जरूर पहनें और उनसे एक उचित दूरी बनाकर रखें।

-बच्चों के खाने में विटामिन-सी को शामिल करें, जैसे- खट्टे फल, जिंक से भरपूर भोजन।

-बच्चों को पैकेट बंद चीजें, जैसे- चिप्स, कोल्ड ड्रिंक आदि न दें।

-दूध और प्रोटीन को बच्चो के खाने में शामिल करें।

नोट: डॉक्टर विपिन जैन बाल रोग विशेषज्ञ हैं, और एक जाना-माना नाम है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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