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Coronavirus: होम क्वारंटीन मरीजों के लिए कितना जरूरी है ऑक्सीमीटर, यह कैसे काम करता है?

Tue, 23 Jun 2020 07:32 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पोर्टेबल पल्स ऑक्सीमीटर - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामले दुनियाभर के कई देशों की सरकारों के लिए चिंता का सबब बने हुए हैं। देश में भी लॉकडाउन खत्म करने के बाद पहले की अपेक्षा ज्यादा तेजी से मामले बढ़ रहे हैं। खासकर दिल्ली में हर दिन बढ़ते मामलों ने सरकारों की चिंता बढ़ाई है। कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों के अनुसार दिल्ली में होम आइसोलेशन के नियमों में थोड़ा बदलाव हुआ है। अब कोरोना पॉजिटिव आने पर मरीज पहले कोविड सेंटर भेजे जाएंगे, जहां संतुष्टि के बाद उन्हें होम आइसोलेशन में रहने की अनुमति होगी। ऐसे मरीजों को अपने शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा चेक करने के लिए दिल्ली सरकार ने पीपीओ यानी पोर्टेबल पल्स ऑक्सीमीटर देने का निर्णय लिया है। आइए जानते हैं कि यह ऑक्सीमीटर होता क्या है, इसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है और यह कैसे काम करता है। 
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पल्स ऑक्सीमीटर - फोटो : PTI
होम आइसोलेशन संबंधित नियमों के मुताबिक राजधानी में कोविड-19 पॉजिटिव आने पर मरीज पहले कोविड सेंटर भेजे जाएंगे, जहां पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही होम आइसेलेशन की अनुमति दी जाएगी। होम आइसोलेशन में निगरानी के लिए चूंकि डॉक्टर नहीं होंगे तो ऐसे में ऑक्सीजन लेवल चेक करना चुनौती है, इसलिए दिल्ली सरकार ने उन्हें पोर्टेबल पल्स ऑक्सीमीटर देने का फैसला किया है। एक बार मरीज ठीक हो जाए, फिर उसे पल्स ऑक्सीमीटर दिल्ली सरकार को वापस करना होगा। 
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पल्स ऑक्सीमीटर - फोटो : Social Media
ऑक्सीमीटर क्या होता है?
  • पल्स ऑक्सीमीटर एक छोटी सी डिवाइस मशीन होती जो मरीज की उंगली में फंसाई जाती है। इसकी मदद से उसकी नब्ज और खून में ऑक्सीजन की मात्रा का पता चलता है। इसके जरिए कोरोना के मरीज कुछ घटों के अंतराल पर अपना ऑक्सीजन लेवल चेक कर सकेंगे। 

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कोरोना की जांच के लिए नमूने एकत्र करते स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : PTI
मरीज की मॉनिटरिंग
  • साधारणतया इसका इस्तेमाल सर्जरी के बाद मरीजों को मॉनिटर करने में होता है। लेकिन सांस की बीमारियों से जूझ रहे मरीज भी इसे अपने घर में रखते हैं। पल्स ऑक्सीमीटर का डेटा ही यह बताता है कि मरीज को कहीं अतिरिक्त ऑक्सीजन की जरूरत तो नहीं।
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पल्स ऑक्सीमीटर - फोटो : सोशल मीडिया
कैसे काम करती है मशीन?
  • इस बारे में अपने यूट्यूब चैनल पर पल्मोनरी डिजीज एक्सपर्ट डॉक्टर माइक हेंसन ने समझाया है कि यह मशीन काम कैसे करती है। उन्होंने समझाया है कि पल्स ऑक्सीमीटर आपकी त्वचा पर एक लाइट छोड़ता है। फिर ब्लड सेल्स के रंग और उनके मूवमेंट को डिटेक्ट करता है। जिन ब्लड सेल्स में ऑक्सीजन ठीक मात्रा में होती है वे चमकदार लाल दिखाई देती हैं जबकि बाकी गहरी लाल दिखती हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ब्लड लेने की जरूरत नहीं
  • ठीक ऑक्सीजन मात्रा वाले ब्लड सेल्स और अन्य ब्लड सेल्स यानी चमकदार लाल और गहरे लाल ब्लड सेल्स के अनुपात के आधार पर मशीन ऑक्सीजन सैचुरेशन को फीसदी में कैलकुलेट करती है। अगर मशीन 96 फीसदी की रीडिंग दे रही है तो इसका मतलब है कि 4 फीसदी रक्त कोशिकाओं में ऑक्सीजन नहीं है। इस प्रक्रिया में ब्लड लेने की जरूरत भी नहीं पड़ती है।
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पल्स ऑक्सीमीटर - फोटो : Social Media
थोड़े अंतर में बिगड़ सकती है स्थिति
  • डॉ. हेंसन के मुताबिक, सामान्य स्वस्थ्य व्यक्ति के ब्लड में ऑक्सीजन का सैचुरेशन लेवल 95 से 100 फीसदी के बीच रहता है। 95 फीसदी से कम ऑक्सीजन लेवल का मतलब है कि व्यक्ति के फेफड़ों में किसी तरह की परेशानी है। 92 फीसदी से नीचे ऑक्सीजन लेवल का मतलब है कि व्यक्ति की स्थिति गंभीर है और उसे अस्पताल ले जाने की जरूरत है। कारण कि उसे ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत भी पड़ सकती है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
ध्यान रहे- कोरोना है कि नहीं, यह नहीं बताती मशीन
  • डॉ. हेंसन के मुताबिक, इस मशीन से यह पता नहीं लगाया जा सकता कि किसी को कोरोना है या नहीं। कोरोना के मामलों में पल्स ऑक्सीमीटर की मदद से यह पता लगता है कि मरीज को अस्पताल जाने की जरूरत है या नहीं। अगर लोग ठीक महसूस कर रहे हैं तो इसका मतलब है कि उनका ऑक्सीजन लेवल ठीक है। 

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पल्स ऑक्सीमीटर से मरीज की रीडिंग(File Photo) - फोटो : PTI
जांच के दौरान रखें ध्यान
पल्स ऑक्सीमीटर से मरीज की रीडिंग लेते समय कुछ चीजें ध्यान रखने की जरूरत है: 
  • नाखून पर कोई रंग नहीं हो
  • नाखून लंबे न हों
  • हाथ ठंडे न हों
  • ब्लड सर्कुलेशन खराब न हो
इन परिस्थितियों में मशीन ठीक से ऑक्सीजन लेवल का पता नहीं कर पाएगी।
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डॉ. हर्षवर्धन (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
मशीन की अहम भूमिका
  • विशेषज्ञों के मुताबिक पल्स ऑक्सीमीटर से मरीजों में 'कोविड निमोनिया' का भी पता चलता है, जो कि कोरोना के गंभीर मरीजों में कॉमन है। कोरोना वायरस स्क्रीनिंग और टेस्टिंग प्रक्रिया में पल्स ऑक्सीमीटर की भूमिका को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा था कि इसकी मदद से कोरोना मरीजों का अर्ली डायग्नोसिस हो सकता है, जिससे मृत्यु-दर कम करने में मदद मिलेगी। 
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