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जानना जरूरी: बांह में ही क्यों लगाई जाती है कोरोना वैक्सीन? यहां जानें इसके पीछे का कारण

Tue, 25 May 2021 05:51 PM IST
प्रकाश चंद जोशी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एसएन में वैक्सीन लगवातीं युवती - फोटो : अमर उजाला
डॉ. राजन गांधी
फिजिशियन

Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi

देशभर में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का कहर जारी है। ऐसे में इस वायरस से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान भी चल रहा है, और लोग भी काफी संख्या में वैक्सीन लगाने पहुंच रहे हैं। जहां पहले 45 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाई जा रही थी, तो वहीं एक मई 2021 से 18 से 44 साल तक की उम्र के लोगों का भी टीकाकरण किया जा रहा है। लेकिन क्या आपने कभी इस बात का ध्यान दिया या इस बारे में सोचा है कि आखिर कोरोना की वैक्सीन बांह में ही क्यों लगाई जा रही है? शायद नहीं, तो चलिए जानने की कोशिश करते हैं।
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महाराष्ट्र के पुणे में तीसरे चरण की शुरुआत - फोटो : ANI
क्यों लगाई जाती है बांहा में?
  • दरअसल, मांसपेशी में वैक्सीन लगाने से ये फायदा होता है कि ये प्रतिरोध की प्रतिक्रिया को उत्तेजित करने की वैक्सीन की क्षमता को असरदार बनाता है। साथ ही वैक्सीन लगने वाली जगह पर रिएक्शन होने की संभावना को भी कम से कम कर देता है। यही नहीं, कोरोना वैक्सीन को कुछ इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वो बांह की ऊपरी मांसपेशी में लगाई जाए।
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कोरोना टीका - फोटो : पीटीआई
यहां ये समझना भी जरूरी है कि वैक्सीन को मांसपेशियो में लगाने का कारण ये भी है कि ये वैक्सीन एक डेल्टॉइड नाम की मांसपेशी में लगाना सही होता है, और ये मांसपेशी हमारे कंधे की एक ट्राएंगल मसल्स होती है। हालांकि, इसके अलावा इसे जांघ की एंटेरोलेटरल मसल्स पर भी लगाया जाता है।

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corona vaccine - फोटो : सोशल मीडिया
बांह में लगाने के बाद कैसे काम करती है वैक्सीन?
  • जब व्यक्ति की बांह या जांघ की मसल्स में वैक्सीन लगाई जाती है, तब ये वैक्सीन सबसे पहले पास के लिम्फ नोड यानी लसिकापर्व में जाती है। इसके बाद ये खास तरह की कोशिकाओं द्वारा ले ली जाती है।
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covid 19 vaccine - फोटो : PTI
वहीं, टी और बी कोशिकाओं वाली व्हाइट ब्लड सेल्स को ट्रेंड करने का काम करती है। इसमें कोशिकाएं या तो किल्लर बन जाती है, जो कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति की कोशिकाओं को खोज कर मार देती है या फिर ये एंटीबॉडी फ्लो करने वाले सेल्स बन जाती है।
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वैक्सीन - फोटो : PTI
ज्यादातर वैक्सीन बांह में ही लगाई जाती है
  • यहां आपको बता दें कि कोरोना की वैक्सीन पहली वैक्सीन नहीं है, जो बांह में लगाई जा रही हो। इससे पहले भी ज्यादातर वैक्सीन बांह में ही लगती हैं। इसे इंट्रामस्क्यूलर इंजेक्शन के जरिए इंजेक्ट किया जाता है। हालांकि, कुछ खास बीमारी जैसे- मीजल्स, मम्प्स रूबैला की वैक्सीन त्वचा के नीचे लगाई जाती है।

नोट: डॉ. राजन गांधी अत्यधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल, कानपुर में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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