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म्यूकरमाइकोसिस: ब्लैक फंगस का ऑक्सीजन थेरेपी से क्या संबंध? ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान

Tue, 25 May 2021 05:14 PM IST
प्रकाश चंद जोशी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच अब म्यूकरमाइकोसिस की दस्तक ने हर किसी को परेशान कर दिया है। देश जहां पहले से ही कोरोना जैसी खतरनाक महामारी से लड़ रहा है, तो वहीं अब म्यूकरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस के आ जाने से खतरा और बढ़ गया है। देशभर में अलग-अलग राज्यों में इससे संक्रमित मरीज मिले हैं, जिनका इलाज चल रहा है। जबकि इसकी वजह से कई लोगों की आंखें तक निकालनी पड़ी और कई मरीजों की जान भी चली गई। इसी को लेकर अब दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कुछ बातें स्पषट की। तो चलिए जानते हैं इनके बारे में।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
म्यूकरमाइकोसिस एक घातक और आक्रामक फंगल संक्रमण है, और इसके कई लक्षणों द्वारा इसे पहचाना जा सकता है। इसमें नाक या चेहरे पर कालापन या फिर लाल चकत्ते होना, एक तरफ चेहरे पर सूजन आना, दर्द होना, पलकों पर सूजन, आंखें लाल होना, धुंधला या दोहरा दिखना, सिरदर्द होना, उल्टी में खून आना, दांत में दर्द या दांत का हिलना और सांस लेने में तकलीफ होने जैसे लक्षण शामिल हैं।
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
इससे उन लोगों को ज्यादा खतरा होता है जिन लोगों की डायबिटीज नियंत्रित न हो, जिन्हें कोरोना के इलाज के दौरान ज्यादा मात्रा में स्टेरॉयड दिया गया हो और जो कैंसर, ट्रांसप्लांट के मरीज हों या फिर जिनकी इम्यूनिटी कमजोर हो।

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डॉ. रणदीप गुलेरिया - फोटो : एएनआई
म्यूकरमाइकोसिस का ऑक्सीजन थेरेपी से सीधा संबंध नहीं
  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा कि, 'म्यूकरमाइकोसिस संक्रमण का ऑक्सीजन थेरेपी से सीधा संबंध नहीं देखा गया है। कई मरीज घर पर अपना इलाज करा रहे हैं और ये लोग ऑक्सीजन थेरेपी पर नहीं थे, लेकिन फिर भी इनमें भी म्यूकरमाइकोसिस का संक्रमण देखा गया।'
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
म्यूकरमाइकोसिस का नामकरण करना भ्रम पैदा करने जैसा
  • डॉक्टर गुलेरिया ने म्यूकरमाइकोसिस के अलग-अलग रंगों के आधार पर रखे जाने वाले इसके नाम को लेकर भी कहा कि, 'एक ही फंगस का अलग-अलग रंगों के आधार पर नामकरण करने से भ्रम पैदा होगा। म्यूकरमाइकोसिस संचारी रोग नहीं है जैसा कि कोरोना वायरस के लगभग 90-95 फीसदी मरीज जो म्यूकरमाइकोसिस से संक्रमित हैं या तो मधुमेह के शिकार हैं या उन्होंने स्टेरॉयड लिया था। ये बीमारी उनमें दुर्लभ है जो मधुमेह के मरीज नहीं है या जिन्होंने स्टेरॉयड नहीं ली है।'
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eye - फोटो : Pixabay
डॉक्टर गुलेरिया ने ये भी बताया कि, म्यूकरमाइकोसिस एक फंगल इंफेक्शन है जो किसी संक्रमित मरीज के संपर्क में आने से नहीं फैलता है। उनके मुताबिक इसके फैलने की जो सबसे बड़ी वजहों में से एक है वो है मरीज का प्रतिरोधक क्षमता का कम होना। ऐसे लोगों के अलावा कोरोना से संक्रमित हुए लोगों को ये बीमारी होने की संभावना होती है।
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अस्पताल में इलाज करते डॉक्टर - फोटो : PTI
क्या हैं इलाज में चुनौतियां
  • एंटी-फंगल उपचार कई हफ्तों तक चलता है, इसलिए ये अस्पतालों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है क्योंकि कोविड-19 रोगियों और अन्य रोगियों को जिन्हें म्यूकरमाइकोसिस होता है, उन्हें अस्पताल के अलग वार्ड में रखने की आवश्यकता होती है। सर्जरी को भी विवेकपूर्ण तरीके से करने की जरूरत है, क्योंकि इस सर्जरी के कोविड-19 रोगियों पर प्रतिकूल परिणाम हो सकते हैं।

स्रोत और संदर्भ: 
https://twitter.com/COVIDNewsByMIB/status/1397101512883535875
https://twitter.com/COVIDNewsByMIB/status/1397091170350628866
https://twitter.com/COVIDNewsByMIB/status/1397089266602184704

अस्वीकरण नोट: यह लेख दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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