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अब आया येलो फंगस: ब्लैक और व्हाइट फंगस से काफी खतरनाक, जानिए लक्षण से लेकर बचाव तक के उपाय

Mon, 24 May 2021 03:01 PM IST
प्रकाश चंद जोशी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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yellow fungus (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock
डॉ. राजन गांधी
फिजिशियन

Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi

देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने पहले से ही काफी तबाही मचा रखी है। हर दिन संक्रमितों से लेकर मरने वालों की काफी संख्या सामने आ रही है। यही नहीं, ब्लैक और व्हाइट फंगस से भी लोग त्रस्त हैं। लेकिन अब देश में येलो फंगस ने दस्तक दे दी है, क्योंकि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में इससे जुड़ा पहला मामला सामने आया है। एक मरीज इस येलो फंगस का शिकार हुआ है, और अभी गाजियाबाद के एक अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। लेकिन शायद आप येलो फंगस और इसके कारण और लक्षणों के बारे में नहीं जानते होंगे। तो चलिए इस बारे में जानते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
इसके होने का कारण क्या है?
  • दरअसल, येलो फंगस होने के पीछे कारण भी गंदगी और नमी ही है। ठीक वैसे ही जैसे ब्लैक और व्हाइट फंगस में होता है। देश में येलो फंगस का ये पहला मामला है जो गाजियाबाद से सामने आया है, इससे पहले अब तक इस फंगस से संक्रमित हुए लोग सामने नहीं आए हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
ये हैं लक्षण

-सुस्ती आना
-वजन कम होना
-भूख का कम होना या बिल्कुल भी भूख न लगने जैसे शुरुआती लक्षण।

वहीं, जबकि गंभीर मामलों में घावों में धीमी गति से ठीक होना, कुपोषण, मवाद आना, अंगों का काम करना बंद कर देना, और आखों का अंदर धंसने जैसे लक्षण शामिल हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
बचने के उपाय
  • जैसा कि येलो फंगस गंदगी और नमी की वजह से होता है। ऐसे में आपको अपने घर के अंदर और घर के आसपास सफाई रखनी चाहिए, पुराने खाद्य पदार्थों को हटा दें ताकि बैक्टीरिया और फंगस विकसित न हो पाए, घर में नमी होने का ध्यान रखना और इसे दूर करना, घर की नमी को 30-40 प्रतिशत से ज्यादा न होने देना। साथ ही बासी खाना खाने से बचना चाहिए, ताकि इस येलो फंगस से बचा जा सके।
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ब्लैक फंगस (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
कितना खतरनाक येलो फंगस?
  • कहा जा रहा है कि ब्लैक और व्हाइट फंगस के मुकाबले ये येलो फंगस काफी खतरनाक है। इसके पीछे कारण बताया जा रहा है कि ये बीमारी शरीर के अंदर शुरू होती है और काफी बाद में जाकर इसके लक्षण बाहर देखने को मिलते हैं। इसलिए अगर आपको इसके लक्षण दिखाई देते हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, ताकि समय रहते इसका इलाज किया जा सके।

नोट: डॉ. राजन गांधी अत्याधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में  डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह आईसीएचएच से वह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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