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सावधान: हैप्पी हाइपोक्सिया है 'साइलेंट किलर', इन लक्षणों को नजरअंदाज करेंगे तो जा सकती है जान

Mon, 10 May 2021 12:03 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi

डॉ. राजन गांधी

जनरल फिजिशियन, चाइल्डकेयर हॉस्पिटल, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, डिप्लोमा सी.एच
अनुभव- 25 वर्ष 


कोरोना महामारी की दूसरी लहर बेहद ही खतरनाक है। इसमें कई नई चीजें भी निकल कर सामने आई हैं, जिसमें से एक है हैप्पी हाइपोक्सिया। इस बार युवाओं में कोरोना के घातक होने की सबसे बड़ी वजह हैप्पी हाइपोक्सिया को ही माना जा रहा है। यह कोरोना की जानलेवा स्थिति है, जिसका पता मरीज को समय रहते नहीं चल पाता है। यही वजह है कि हैप्पी हाइपोक्सिया को 'साइलेंट किलर' भी कहा जा रहा है। आइए जानते हैं इस हैप्पी हाइपोक्सिया का मतलब क्या है और यह कैसे कोरोना मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है? 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हैप्पी हाइपोक्सिया का मतलब होता है कि खून में ऑक्सीजन के स्तर का बहुत कम हो जाना और मरीज को इसका पता भी नहीं चल पाना। दरअसल, कोरोना मरीजों में शुरुआती स्तर पर कोई लक्षण नहीं दिखता या फिर हल्का लक्षण दिखता है, वे बिल्कुल ठीक और 'हैप्पी' नजर आते हैं, लेकिन अचानक से उनका ऑक्सीजन सेचुरेशन घटकर 50 फीसदी तक पहुंच जा रहा है, जो जानलेवा साबित हो रहा है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
हैप्पी हाइपोक्सिया का कारण क्या है? 
  • विशेषज्ञों के मुताबिक, हैप्पी हाइपोक्सिया का प्रमुख कारण फेफड़ों में खून की नसों में थक्के जम जाने को माना जाता है। इसकी वजह से फेफड़ों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और खून में ऑक्सीजन सेचुरेशन कम होने लगता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाइपोक्सिया की वजह से दिल, दिमाग, किडनी जैसे शरीर के प्रमुख अंग काम करना बंद कर सकते हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोरोना मरीज हैप्पी हाइपोक्सिया को कैसे पहचानें? 
  • इसमें होठों का रंग बदलने लगता है यानी होंठ हल्के नीले होने लगते हैं। इसके अलावा त्वचा का रंग भी लाल या बैंगनी होने लगता है। अगर गर्मी न हो तो भी लगातार पसीना आता है। ये सभी खून में ऑक्सीजन सेचुरेशन कम होने के लक्षण हैं। इसलिए लक्षणों पर लगातार ध्यान देना पड़ता है और जरूरत पड़ने में तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
युवाओं में क्यों ज्यादा हो रही है ये परेशानी? 
  • विशेषज्ञ कहते हैं कि युवाओं की इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और अन्य लोगों के मुकाबले उनकी सहनशक्ति भी ज्यादा होती है, ऐसे में ऑक्सीजन सेचुरेशन अगर 80-85 फीसदी तक भी आ जाए तो उन्हें कुछ महसूस नहीं होता है, जबकि बुजुर्गों का ऑक्सीजन सेचुरेशन इतना हो जाए तो उन्हें काफी परेशानी होने लगती है। यही वजह है कि युवाओं का ऑक्सीजन सेचुरेशन जब काफी नीचे चला जाता है तब उन्हें इसका अहसास होता है, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी होती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
हैप्पी हाइपोक्सिया से कैसे बचें? 
  • डॉक्टर और विशेषज्ञ लगातार ये सलाह देते आए हैं कि कोरोना मरीजों को समय-समय पर शरीर के ऑक्सीजन लेवल की जांच करते रहनी चाहिए। हैप्पी हाइपोक्सिया से बचने का यही सबसे अच्छा तरीका भी है। इसलिए बेहतर है कि आप किसी खुशफहमी में न रहें कि आपको तो सांस लेने में कोई दिक्कत महसूस नहीं हो रही है तो हम ऑक्सीजन लेवल की जांच क्यों करें, बल्कि यह बेहद ही जरूरी है। किसी भी तरह की समस्या होने पर आप डॉक्टर से सलाह जरूर लें। 
नोट: डॉ. राजन गांधी अत्यधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल, कानपुर में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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