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दुनियाभर में कोरोना से 15 फीसदी मौतों का संबंध वायु प्रदूषण से, शोध में सामने आई ये बात

Tue, 27 Oct 2020 05:49 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण के बीच इस वायरस की प्रकृति से लेकर प्रभाव के बारे में कई तरह के शोध अध्ययन सामने आते रहे हैं। इसी कड़ी में एक नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि दुनियाभर में कोविड-19 से हुई करीब 15 फीसदी मौतों का संबंध प्रदूषण से है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना से होने वाली कुल मौतों की औसतन 15 फीसदी लंबे समय तक वायु प्रदूषण वाले माहौल में रहने के कारण हुई हैं। इतना तो सभी जानते हैं कि कोरोना वायरस के कारण सांस में तकलीफ और फेफड़ों में संक्रमण होता है। वायु प्रदूषण के कारण भी सांस लेने में तकलीफ होती है। ऐसे में दोनों के अंतर्संबंध को लेकर वैज्ञानिकों ने यह अध्ययन किया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया है कि यूरोप में कोविड-19 से हुई मौतों में करीब 19 फीसदी, उत्तरी अमेरिका में हुई मौतों में से 17 फीसदी और पूर्वी एशिया में हुई मौतों के करीब 27 फीसदी का संबंध वायु प्रदूषण से है। जर्मनी के मैक्स प्लांक रसायन विज्ञान संस्थान के शोधकर्ता भी इस अध्ययन में शामिल थे। मेडिकल जर्नल ‘कार्डियोवस्कुलर' में प्रकाशित अध्ययन में कोरोना वायरस से हुई मौतों के संबंध में विश्लेषण किया गया और दुनिया के विभिन्न देशों में वायु प्रदूषण से संबंध का पता लगाया गया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अध्ययन करने वाली टीम ने कहा कि कोविड-19 से जितनी मौत हुई और इसमें वायु प्रदूषण की वजह से आबादी पर बढ़े खतरों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने कहा कि निकाला गया अनुपात वायु प्रदूषण और कोविड-19 मृत्यु दर के बीच सीधे जुड़ाव को नहीं दिखाता है।  

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हालांकि, वायु प्रदूषण के कारण बीमारी की गंभीरता बढ़ने और स्वास्थ्य संबंधी अन्य जोखिमों के बीच प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष संबंधों को देखा गया। शोधकर्ताओं ने वायु प्रदूषण और कोविड-19 के संबंध में अमेरिका और चीन के पूर्व के अध्ययनों का इस्तेमाल किया। साल 2003 में सार्स बीमारी से जुड़े आंकड़ों का भी इसमें इस्तेमाल किया गया। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अध्ययन करने वाली टीम ने हवा में पीएम 2.5 जैसे अति सूक्ष्म कणों की मौजूदगी वाले माहौल में ज्यादा समय तक रहने के संबंध में एक मॉडल का विश्लेषण किया। महामारी के बारे में जून 2020 के तीसरे सप्ताह तक के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया और शोधकर्ताओं ने कहा कि महामारी खत्म होने के बाद इस बारे में व्यापक विश्लेषण करने की जरूरत होगी।
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