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क्या मास्क आपको कोरोना वायरस के संक्रमण से बचा सकता है, बेहतर विकल्प क्या है?

Fri, 24 Apr 2020 04:38 PM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
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- फोटो : PTI/Amarujala
इंसानों को जानवरों से अलग करने वाली चीजों में एक चीज ये भी है कि बीमारियों के फैलने की स्थिति में इंसान अपनी सुरक्षा के लिए चिंतित रहते हैं। इंसान अकेली एक ऐसी जाति है जो कि बिना जाने अपने हाथों से चेहरे छूने के लिए जानी जाती है। उसकी यह आदत नए कोरोना वायरस (कोविड-19) जैसी बीमारियों को फैलने में मदद करती है। लेकिन हम ये क्यों करते हैं और क्या हम अपनी इस आदत को रोक सकते हैं?

हम सब दिन में कई बार अपना चेहरा छूते हैं। साल 2015 में ऑस्ट्रेलिया के मेडिकल की पढ़ाई करने वाले युवाओं पर एक अध्ययन किया गया। इसमें ये सामने आया कि मेडिकल स्टूडेंट्स भी खुद को इससे नहीं बचा सके। शायद मेडिकल स्टूडेंट्स को इससे पैदा होने वाले खतरों को लेकर ज्यादा जाग्रत रहना चाहिए था।

लेकिन उन्होंने भी कम से कम एक घंटे में 23 बार अपने चेहरे को छुआ। इसमें मुंह, नाक और आंखें शामिल हैं। सामाजिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाएं और पेशेवर जिसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन भी शामिल हैं, कहती हैं कि ये मुंह छूने की आदत खतरनाक है। कोविड-19 से जुड़ी सलाह में हाथों को साफ रखना और उन्हें धुलने पर जोर दिया गया है।
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कोरोना से बचने के लिए मास्क लगाए लोग - फोटो : पीटीआई
किन-किन देशों में मास्क पहनना है जरूरी
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अब तक मास्क पहनने को बाध्यकारी बनाने को लेकर कोई सलाह नहीं दी है लेकिन ये जरूर कहा है कि अगर आप बीमार हैं तो दूसरों को संक्रमित न करें इसके लिए जरूरी है कि आप घर से बाहर निकलने पर मास्क पहनें।

मार्च 18 को चेक गणराज्य ने सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनना बाध्यकारी कर दिया था। इसके बाद स्लोवाकिया ने 25 मार्च को लोगों को घर से बाहर निकलने पर मास्क पहनने के लिए कहा। इसके बाद बोस्निया और हर्जेगोविना ने भी 29 मार्च को लोगों के लिए सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनना जरूरी कर दिया। अप्रैल 6 को ऑस्ट्रिया में कुछ दुकानों को खोलने की इजाजत दी गई है लेकिन सरकार ने कहा कि दुकानों पर जाने वालों के लिए मास्क पहनना बाध्यकारी होगा। 
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अपने बचाव के लिए मास्क पहने लोग। - फोटो : PTI
मोरक्को ने मार्च के मध्य में ही संपूर्ण लॉकडाउन लागू कर दिया गया था जिसके बाद अप्रैल 7 को यहां घर पर और घर से बाहर निकलने पर मास्क पहनना जरूरी बना दिया गया। अब तक पुलिस ने मास्क न पहनने के लिए पचास हजार से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। अप्रैल 7 को तुर्की ने भी अपने नागरिकों से सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनने को कहा।

जर्मनी की चांसलर एंगेल मर्केल ने 20 अप्रैल को घोषणा की कुछ देश में लॉकडाउन में राहत तो नहीं दी जाएगी लेकिन इस बीच छोटी दुकानों को खोलने की सरकार इजाजत देगी। इसके बाद जर्मनी के कई राज्यों ने सार्वजनक जगहों पर नाक और मुंह ढकना जरूरी बना दिया। अब जर्मनी ने कोरोना फैलने से रोकने के लिए पूरे देश में लोगों के लिए मास्क पहनना जरूरी कर दिया है।

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लेकिन हम ऐसा क्यों करते हैं?
इंसान और कुछ स्तनपायी जीव खुद को ऐसा करने से नहीं रोक पाते हैं। ऐसा लगता है कि ये हमारे विकास के क्रम का हिस्सा है। चूंकि कुछ जातियां अपने चेहरों को छूकर कीड़ों को हटाने की कोशिश करते हैं। लेकिन हम और दूसरे अन्य स्तनपायी जीव दूसरे कारणों की वजह से भी ऐसा करते हैं।

अमरीका स्थित यूसी बार्कले यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफेसर डाचर केल्टनर बताते हैं, "कभी-कभी ये एक तरह से खुद को सहलाने जैसा काम होता है। वहीं, कभी-कभी हम अंजाने में अपने हाथों से मुंह छूकर अपने हाथों का इस्तेमाल कुछ इस तरह करते हैं जैसे कि एक थिएटर के स्टेज पर पर्दे को इस्तेमाल किया जाता है। जिसमें एक पहलू से होकर दूसरे पहलू में जाने के लिए पर्दा डालते और हटाते हैं।"

बिहेवियरल साइंस के क्षेत्र से जुड़े दूसरे विशेषज्ञ मानते हैं कि खुद को छून अपने भावों को नियंत्रित करने और ध्यान खींचने से जुड़ा होता है। जर्मनी की लिपजिग यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिक मार्टन ग्रनवाल्ड कहते हैं कि ये हमारी जाति का मूल व्यवहार है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
ग्रनवाल्ड ने बीबीसी को बताया, "खुद को छूना अपने आप के नियमन जैसी हरकतें होती है। ये सामान्य तौर पर संवाद करने के लिए बनीं हरकतें नहीं होती हैं और बिना जाने ही इन हरकतों को अंजाम दिया जाता है। ये हरकतें सभी भावनात्मक और संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाती हैं। ये सभी लोगों में होती हैं।"

खुद को छूने से समस्या ये होती है कि इससे हर तरह की खराब चीज हमारी आँखों, नाक और मुंह से होते हुए हमारे शरीर के अलग-अलग अंगों में पहुंचती हैं। उदाहरण के लिए, कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति के मुंह से निकले पानी के छींटों से होकर दूसरे लोगों में पहुंचता है।

लेकिन अगर हम किसी ऐसी चीज को छूते हैं जिस पर वायरस गिरा हो तो इससे भी वायरस संक्रमित कर सकता है। विशेषज्ञ अभी भी वायरस के इस नये स्ट्रेन पर शोध कर रहे हैं। लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि कोरोना वायरस किसी जगह पर गिरने के बाद 9 दिनों तक जिंदा रहते हैं।
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वायरस की लंबी उम्र का खतरा
वायरस के इतने दिनों तक जिंदा रहने की वजह से हमारा अपने चेहरे को छूना खतरनाक हो जाता है। साल 2012 में अमरीका और ब्राजील के शोधार्थियों ने पाया कि आम लोग सार्वजनिक जगहों पर चीजों को एक घंटे में तीन से ज्यादा बार छूते हैं।

ये लोग अपने हाथों को अपने मुंह और नाक तक हर घंटे में 3।6 बार ले गए। ये ऑस्ट्रेलियाई मेडिकल स्टूडेंट्स पर किए गए अध्ययन से काफी कम था क्योंकि मेडिकल छात्रों पर जब अध्ययन किया गया तब वे एक क्लास में बैठे थे। और ये संभव है कि ऐसा इसी वजह से हुआ हो क्योंकि बाहर आपके भटकाव की तमाम चीजें मौजूद होती हैं।

कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, बार-बार मुंह छूना फेस मास्क पहनने की बड़ी वजह है। क्योंकि इस तरह से आपको एक तरह का सुरक्षाकवच मिलता है। लीड्स यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर स्टेफेन ग्रिफिन समझाती हैं, "मास्क पहनने से लोगों के अपने चेहरों को छूने की संभावनाएं कम हो जाती हैं और गंदे हाथों से चेहरों को छूना संक्रमित होने की एक बड़ी वजह है।"
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कोरोना वायरस जांच (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
हम क्या कर सकते हैं?
लेकिन वे कौन से कदम हैं जिनसे हम कम से कम अपने हाथों से चेहरे को छूने की संख्या को कम करते हैं। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के सहयोगी रहे कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और बिहेवियरल साइंस के विशेषज्ञ माइकल हॉलस्वर्थ मानते हैं कि ये कहना आसान है कि ऐसा न किया जाए लेकिन असल में इस सलाह को अमल में लाना मुश्किल है।

हॉलस्वर्थ बीबीसी को बताते हैं, "लोगों को कुछ ऐसा करने के लिए कहना जो अनजाने में होता है एक बड़ी समस्या है, इससे ज्यादा आसान ये है कि लोग अपने हाथों को बार-बार धोते रहें, ताकि वे अपने चेहरे को कम बार छू सकें। अगर आप किसी से वो काम करने को कहेंगे जो कि वो अंजाने में करता हो तो ऐसी सलाह देने से कोई फायदा नहीं होगा।"

हालांकि, हालस्वर्थ मानते हैं कि कुछ चीजें हैं जो आपकी मदद कर सकती हैं। इनमें से एक यह है कि हमें ये पता हो कि हम अपने चेहरों को कितनी बार छूते हैं। "जब यह (चेहरा छूना) खुजली मचाने की जरूरत जैसी शारीरिक मांग बन जाए तो हम सजग रहकर अपने बचाव में कदम उठा सकते हैं, जैसे कि हम अपने उल्टे हाथ का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे जोखिम कम होता है चाहें ये समस्या का समाधान हो या न हो।"

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मास्क पहनकर जातीं युवतियां - फोटो : अमर उजाला
पता करें कि चेहरा छूने की जरूरत कब होती है?
बिहेवियरल साइंस विशेषज्ञ इस बात की सलाह भी देते हैं कि हमें ये पता करना चाहिए कि हम अपने चेहरों को क्यों छूते हैं। हॉलस्वर्थ इसे समझाते हुए कहते हैं, "अगर हम उन स्थितियों को पहचान जाएं जब हमें चेहरा छूने की जरूरत महसूस होती है तो हम ऐसे मौकों पर जरूरी कदम उठा सकते हैं। जो लोग अपनी आंखों को छूते हैं, वे धूप का चश्मा पहन सकते हैं, या जब लगे कि अब वे चेहरा छूने जा रहे हैं तो हाथों को दबाया जा सकता है।

उदाहरण के लिए, हम अपने हाथों को व्यस्त रखने के तरीकों का सहारा ले सकते हैं। इसमें मुलायम गेंदों जैसे खिलौनों का इस्तेमाल कर सकते हैं जिनसे हाथ व्यस्त रहते हैं। लेकिन आपको उन्हें अक्सर कीटाणुरहित करना पड़ सकता है।

इसके साथ-साथ आप खुद को याद दिलाने के लिए नोट भी बना सकते हैं। हॉलस्वर्थ मानते हैं, "अगर कोई जानता है कि उनकी एक आदत ऐसी है जिसे वे चाहकर भी नहीं रोक पाते हैं तो वे अपने दोस्तों या रिश्तेदारों को ऐसा करने पर टोकने के लिए कह सकते हैं।"
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लॉकडाउन के दौरान ड्यूटी पर दस्ताने पहनती महिला पुलिसकर्मी(File Photo) - फोटो : PTI
दस्ताने कैसे विकल्प हैं?
लेकिन एक सवाल ये उठता है कि क्या खुद को याद दिलाने के लिए दस्ताने पहने जाने चाहिए? इसका आसान जवाब है कि ये एक गलत तरीका है, जब तक कि दस्तानों को बार-बार साफ करके कीटाणुमुक्त ना किया जाए, नहीं तो वे भी हानिकारिक बन जाएंगे।

हाथ धोना सबसे बेहतर विकल्प
आखिर में सही ढंग से हाथ धोने से अच्छा विकल्प कोई नहीं होता है। और इसके साथ-साथ सजगता भी जरूरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडहोम गेब्येयियस ने बीती 28 फरवरी को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हमें टीकों और चिकित्सा विज्ञान के लिए इंतजार करने की जरूरत नहीं है, इन चीजों की मदद से हर व्यक्ति खुद की और दूसरों की सुरक्षा कर सकता है।"
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