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Coronavirus Prevention Tips: क्या हर 15 मिनट के अंतराल पर पानी पीने से कम हो जाएगा कोरोना वायरस का खतरा?

Mon, 22 Jun 2020 05:59 PM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस से बचाव - फोटो : सोशल मीडिया
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच इसके दवाई और वैक्सीन पर भी लगातार रिसर्च जारी है। हालांकि, ट्रायल के लंबा प्रोसेस होने के कारण वैक्सीन को बाजार में आने में टाइम लगेगा। इसके साथ ही दूसरी तरफ इस घातक वायरस से जुड़े कई तरह के टिप्स भी वायरल हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक दावा ये भी किया जा रहा है कि हर 15 मिनट में पानी पीने से कोरोना वायरस का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा। आइए जानते हैं इसके बारे में...
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
सोशल मीडिया के जरिए वायरल हो रहे मैसेज में कहा जा रहा है कि हमें अपने मुंह और गले को हमेशा गीला रखना चाहिए और हर 15 मिनट पर पानी पीना चाहिए। कोरोना वायरस इन्हीं रास्ते में हमारे शरीर में जाता है। इसलिए पानी पीने से हमारी ग्रासनली से वायरस नीचे हमारे पेट में चले जाएंगे और पेट में बनने वाले एसिड से मर जाएंगे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
वैज्ञानिकों की राय
लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन में एपिडेमोलॉजिस्ट कल्पना सबापैथी ने बीबीसी फ्यूचर से बातचीत में बताया है कि इसे जनरलाइज कर दिया गया है यानी कुछ ज्यादा ही सामान्य तरह से पेश कर दिया गया है। उनका कहना है कि संक्रमण किसी एक वायरल कण से नहीं होता बल्कि हजारों-लाखों पार्टिकल्स के संपर्क में आने से होता है, इसलिए केवल ग्रासनली की सफाई से बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

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पानी - फोटो : सोशल मीडिया
कल्पना सबापैथी के मुताबिक इस थ्योरी में दिक्कत यह है कि इसमें वायरस को केवल पेट तक पहुंचा कर मार सकने का दावा किया जा रहा है। लेकिन ग्रासनली से पहले ही आपकी नाक से भी वायरस आपके शरीर में प्रवेश कर चुका होगा। ऐसा ना भी हो तो आंखों से या अन्य रास्तों से वायरस प्रवेश कर सकता है। संक्रमित जगह या सतह को छूने के बाद आप अपनी आंखें छुएंगे तो वायरस आपको संक्रमित कर देगा। किसी संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकले ड्रॉपलेट्स आपकी सांसों के जरिए अंदर जाकर भी आपको संक्रमित कर सकते हैं।
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पानी - फोटो : फाइल फोटो
पेट में मौजूद अम्लीय रसों का पीएच (अम्लीयता का पैमाना) 1 से 3 के बीच में होता है, जिसमें वायरस के मरने की पूरी संभावना नहीं होती। साल 2012 में सऊदी अरब में कोरोना फैमिली का ही एक वायरस पैथोजेन आया था। इस वायरस में हल्के एसिड या पेट में मौजूद एसिड के खिलाफ प्रतिरोध करने की शक्ति थी। वैज्ञानिकों ने पाया था कि वायरस मरीजों के पेट में भी जीवित रहकर आंत की कोशिकाओं पर आसानी से हमला कर सकता है।
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कोरोना वायरस - फोटो : Pixabay
अबतक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इस नए कोरोना वायरस पर भी यह बात लागू होगी या नहीं। कोरोना वायरस में डायरिया यानी दस्त जैसे लक्षण भी बताए गए हैं। चीन के वैज्ञानिकों ने पाचनतंत्र के संक्रमित होने को भी दस्त का कारण बता चुके हैं। पिछले दिनों आई एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि कोरोना संक्रमित मरीजों के मल में भी वायरस की मौजूदगी हो सकती है।
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coronavirus - फोटो : amar ujala
वहीं बात अगर पानी पीने से कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा रोकने की है, तो इसकी अबतक कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। इससे मिलती-जुलती एक स्टडी में यह जांच की गई थी कि क्या पानी से कुल्ला करने से सांस संबंधी संक्रमण रोका जा सकता है। जापान में बेहद लोकप्रिय इस तरीके के बारे में हुई स्टडी में पाया गया था कि दिन में तीन बार कुल्ला करने वाले लोगों में ऐसा न करने वालों की तुलना में कम खतरा था। हालांकि बहुत छोटे समूह पर की गई यह स्टडी कोरोना वायरस पर लागू नहीं होती है।

पानी पीने की आदत अच्छी है, यह आदत पेट और त्वचा संबंधी कई तरह की बीमारियां नहीं होने देती, लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण रोकने के मामले में इसकी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार इस दावे पर बिना किसी पुष्टि सामने आए बिना विश्वास करना खतरनाक हो सकता है।
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