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कोरोना मरीजों को ब्रेन हैमरेज-पैरालिसिस और मिर्गी का भी डर, नसों में खून के थक्के जमना है खतरनाक

Mon, 26 Oct 2020 02:46 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोरोना से उबरने के बावजूद मरीजों की दिक्कतें पूरी तरह खत्म नहीं हो रही है। पोस्ट कोविड या लॉन्ग कोविड के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिनमें थकान, मांसपेशियों में दर्द, सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं दो महीने बाद भी बनी रह रही हैं। कोरोना संक्रमित और उससे उबरे मरीजों में कोविड कॉम्प्लिकेशन की पड़ताल में चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थानीय खबरों के मुताबिक, 50 के करीब ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें मरीजों को ब्रेन हैमरेज या पैरालिसिस की शिकायतें हुई हैं। इनमें कुछ मरीज स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि कुछ मरीजों का इलाज अभी चल ही रहा है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना के मरीजों में ब्रेन हैमरेज और पैरालिसिस के पीछे की वजह चिकित्सक और विशेषज्ञ मरीजों के शरीर के विभिन्न हिस्सों में खून का गाढ़ा होना या खून के थक्के जमना बता रहे हैं। कोरोना संक्रमण होने पर शुरुआत में फेफड़ों और गले में सूजन आती है और संक्रमित होने के तीन से पांच दिन बाद मरीज का ब्लड गाढ़ा होने लगता है। वायरस की प्रवृत्ति के कारण ऐसा होता है, जिसका पता मरीजों को नहीं चल पाता। रक्त वाहिकाओं में खून का थक्का जमने से दिक्कतें शुरू हो जाती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
विशेषज्ञ बताते हैं कि कोरोना संक्रमण के दौरान ब्रेन की ओर जाने वाली रक्त वाहिकाओं में खून का थक्का जमने से दिमाग के उस हिस्से में ब्लड की सप्लाई नहीं होती। ऐसे में दिमाग का वह हिस्सा काम करना बंद कर सकता है, जिससे मरीज को पैरालिसिस हो सकता है। इस स्थिति को ब्रेन इंफार्क्ट भी कहा जाता है। 

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay
यह जरूरी नहीं कि कोरोना संक्रमण के बाद शरीर की किसी विशेष रक्त वाहिका में ही खून का थक्का बनता हो। यह सभी प्रकार की रक्त वाहिका में बन सकता है। ब्रेन की रक्त वाहिका में खून का थक्का बनने से मरीज को पैरालिसिस, हार्ट की रक्त वाहिका में थक्का बनने से हार्ट अटैक हो सकता है। इन मरीजों को गहन चिकित्सा की जरूरत पड़ती है और विशेषज्ञ चिकित्सक ही दवाओं और सर्जरी के जरिए इलाज करते हैं। 
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post Covid, Long Covid - फोटो : Amar Ujala
कोविड संक्रमण होने पर व्यक्ति के शरीर में कोरोना वायरस केवल फेफड़ाें पर ही अटैक नहीं करता, बल्कि शरीर के दूसरे अंगों को भी संक्रमित करता है। यह शरीर में किडनी, हार्ट, लिवर संबंधी दिक्कतें भी पैदा करता है। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। कोरोना संक्रमण के कारण कई मरीजों में को मिर्गी भी आने लगती है, जो कई दिनों बाद ठीक होती है। ऐसे कई मरीज संक्रमण से उबरने के बाद भी इलाज करा रहे हैं। आईसीएमआर यानी भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने कोविड एडवाइजरी में डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, किडनी, हार्ट, ब्रेन डिजीज के मरीजों को उच्च जोखिम वर्ग में रखा है। 

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