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Coronavirus: वैक्सीन जितनी ही इम्यूनिटी देता है कोरोना वायरस का संक्रमण, नए शोध में खुलासा

Thu, 14 Jan 2021 01:45 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस के संक्रमण और वैक्सीन की इम्यूनिटी को लेकर लगातार शोध हो रहे हैं, जिसमें नई-नई बातें निकल कर सामने आ रही हैं। अब एक नए अध्ययन में यह पाया गया है कि जो लोग कोरोना से पहले संक्रमित हो चुके हैं, वो इस वायरस से उतने ही सुरक्षित हैं जितना कि लोग वैक्सीन लेने के बाद होते हैं। पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड (पीएचई) के वैज्ञानिकों द्वारा प्रारंभिक निष्कर्षों से पता चला है कि पिछले संक्रमण से कोविड-19 एंटीबॉडी वाले लोगों में संक्रमण दुर्लभ है। लेकिन साथ ही साथ विशेषज्ञों ने यह आगाह भी किया है कि निष्कर्षों का मतलब है कि 2020 के शुरुआती महीनों में यानी महामारी की पहली लहर में जो लोग संक्रमित हुए और ठीक हो गए, वो फिर से संक्रमित हो सकते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड (पीएचई) में वरिष्ठ चिकित्सा सलाहकार और अध्ययन के सह-लेखक सुसान हॉपकिंस ने कहा, 'अब हम ये जरूर जानते हैं कि जो लोग संक्रमित हुए हैं और उनके अंदर एंटीबॉडीज विकसित हैं, उनमें से अधिकांश पुन: संक्रमण से बच जाते हैं, लेकिन हम अभी तक ये नहीं जान पाए हैं कि सुरक्षा आखिर कितने समय तक के लिए मिलती है।' 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों को देखने और उनका मूल्यांकन जारी रखने की योजना बनाई है, यह देखने के लिए कि क्या प्राकृतिक प्रतिरक्षा कुछ लोगों में पांच महीने से अधिक समय तक रह सकती है। लेकिन साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि अध्ययन के अगले चरण के शुरुआती सबूत पहले से ही सुझाव देते हैं कि प्रतिरक्षा वाले कुछ लोग अभी भी वायरस दूसरों तक पहुंचा सकते हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सांस रोकने से बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा 
  • एक नए अध्ययन में यह पाया गया है कि सांस रोकने से कोरोना संक्रमण होने का खतरा बढ़ सकता है। यह शोध भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी मद्रास के शोधकर्ताओं ने किया है। इसे 'फिजिक्स ऑफ फ्लुइड्स' नामक पत्रिका में प्रकाशित भी किया गया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
इस वैक्सीन से मिलेगी एक साल तक सुरक्षा
  • हाल ही में अमेरिका की बायोटेक कंपनी मॉडर्ना ने दावा किया है कि उसकी वैक्सीन से कम से कम एक साल तक कोरोना के खिलाफ इम्यूनिटी बनी रहेगी, यानी वह कोरोना से एक साल तक सुरक्षा देगी। चूंकि इस बीच कोरोना के नए-नए स्ट्रेन भी सामने आ रहे हैं, ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या उनपर भी वैक्सीन कारगर होगी? इसपर मॉडर्ना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टीफन बैंसेल का कहना है कि कंपनी यह साबित करने वाली है कि उनकी वैक्सीन ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में मिले कोरोना के नए स्ट्रेन पर भी प्रभावी होगी। 
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