फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Coronavirus: सिर्फ मास्क पहनने से कम नहीं होगा कोरोना का खतरा, ये काम भी करना होगा, अध्ययन में खुलासा

Fri, 25 Dec 2020 01:22 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस से बचाव के लिए कई देशों में टीकाकरण अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन वैज्ञानिक यह भी कह रहे हैं कि सिर्फ वैक्सीन लेना काफी नहीं होगा बल्कि इसके साथ-साथ मास्क भी पहनना जरूरी है। अब नए अध्ययन में यह दावा किया जा रहा है कि संक्रमण से बचने के लिए केवल मास्क पहनना ही पर्याप्त नहीं हो सकता है बल्कि इसके लिए जरूरी है कि सुरक्षित शारीरिक दूरी का भी पालन किया जाए। इस शोध को फिजिक्स ऑफ फ्लूइड नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। 
विज्ञापन

2 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दरअसल, शोधकर्ताओं ने कोरोना से बचाव के लिए पांच तरह के पदार्थों से बने मास्क और खांसने-छींकने के दौरान वायरस युक्त बूंदों के फैलने पर मास्क के असर पर अध्ययन किया। उनके मुताबिक, अलग-अलग प्रकार के मास्क अलग-अलग तरीके से वायरस युक्त बूंदों को फैलने से रोकते हैं। 
विज्ञापन

3 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
शोधकर्ताओं के मुताबिक, अगर कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उससे निकली वायरस युक्त कुछ बूंदे वस्तुओं को पार कर दूसरे व्यक्ति को भी बीमार कर सकती हैं। ऐसे में वायरस से सुरक्षित रहने के लिए छह फीट की दूरी जरूरी रखनी चाहिए। 

4 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शोधकर्ताओं ने बताया कि किसी संक्रमित व्यक्ति के महज एक बार छींकने से 20 करोड़ तक वायरस के कण उसके मुंह से बाहर निकलते हैं। इन कणों का अधिकतर हिस्सा मास्क से रोका तो जा सकता है लेकिन इसके बावजूद कुछ कण ऐसे होते हैं जो मास्क को भी पार कर सकते हैं और अगर ऐसा हुआ तो पास खड़ा दूसरा व्यक्ति भी कोरोना से संक्रमित हो सकता है। 
विज्ञापन

5 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शोधकर्ताओं ने वायरस युक्त कणों को पांच तरह की वस्तुओं से बने मास्क से रोकने की कोशिश की, जिसमें सर्जिकल मास्क, सामान्य कपड़े से बने मास्क, दो परत वाले कपड़े के मास्क, दो परत वाले गीले नियमित कपड़े और एन-95 मास्क शामिल हैं। 
विज्ञापन

6 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शोधकर्ताओं ने बताया कि सभी प्रकार के मास्क बड़ी मात्रा में वायरस युक्त बूंदों को रोकने में कामयाब हुए, लेकिन आखिरकार 3.6 फीसदी बूंदें सामान्य कपड़े से बने मास्क के पार चली ही गईं, जबकि एन-95 मास्क इसमें 100 फीसदी कामयाब हुआ यानी उसने बूंदों को बाहर ही रोक दिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कैसे किया गया शोध? 

शोधकर्ताओं ने पहले एयर जेनरेटर का इस्तेमाल कर एक ऐसी मशीन बनाई, जो इंसान की छींक और खांसी की नकल कर सकती थी। इसके बाद जेनरेटर के इस्तेमाल से एक कैमरा लगे बंद ट्यूब से लेजर शीट द्वारा सूक्ष्म कणों को हवा में छोड़ा गया, जैसे कण खांसी और छींक के दौरान मुंह से निकलते हैं। इसके बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे कि वायरस को फैलने से रोकने में मास्क और सुरक्षित शारीरिक दूरी दोनों ही जरूरी हैं। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें