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Coronavirus: कोरोना के नए खतरनाक स्ट्रेन से 'आर नंबर' का क्या संबंध? कहीं महामारी और बढ़ेगी तो नहीं

Sun, 03 Jan 2021 02:51 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
एक अध्ययन में पाया गया है कि कोविड-19 का नया वैरिएंट अपने पुराने से ज्यादा संक्रामक है। इसमें बताया गया है कि वायरस का ये नया रिप्रोडक्शन (प्रजनन) नंबर या आर नंबर को 0.4 से 0.7 के बीच बढ़ा देता है। अनुमान है कि ब्रिटेन में आर नंबर 1.1 से 1.3 के बीच है। अगर यहां कोरोना वायरस के मामलों की संख्या घटानी है तो आर नंबर को 1.0 से नीचे लाना होगा। आर नंबर का मतलब है कि एक संक्रमित व्यक्ति औसतन और कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है, यानी किसी वायरस में फैलने की कितनी क्षमता है। अगर ये एक नंबर से ज्यादा है तो महामारी बढ़ेगी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इम्यूनिटी के बिना आबादी में खसरे का आर नंबर 15 है। इसका मतलब है कि खसरे से संक्रमित एक व्यक्ति औसतन 15 लोगों को संक्रमित कर सकता है। कोरोना वायरस, आधिकारिक तौर पर सार्स कोविड-2, का आर नंबर तीन के करीब है, अगर इसे रोकने के कोई उपाय न अपनाए जाएं। आर नंबर निकालने के लिए किसी वायरस से मरने वाले, अस्पताल में भर्ती या वायरस से पॉजिटिव आने वाले लोगों की संख्या का इस्तेमाल होता है और वायरस के फैलने की क्षमता का अनुमान लगाया जाता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अगर आर नंबर एक से ज्यादा है तो इसका मतलब है कि संक्रमण के मामले बढ़ेंगे, यानी कोई संक्रमित व्यक्ति कम से कम एक व्यक्ति में तो संक्रमण फैला रहा है। लेकिन, अगर आर नंबर एक से कम है तो इसका फैलाव रुक सकता है, क्योंकि तब ये किसी भी व्यक्ति में संक्रमित नहीं हो रहा होगा। लंदन के इंपीरियल कॉलेज के प्रोफेसर एक्सल गैंडी कहते हैं कि वायरस के दोनों प्रकार के बीच 'काफी ज्यादा' अंतर है। वे कहते हैं, 'वायरस का नया प्रकार कितनी आसानी से फैल सकता है, ये एक बड़ा अंतर है। जब से इस महामारी की शुरुआत हुई है, तब से सामने आया ये सबसे ज्यादा गंभीर बदलाव है।' 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
इंपीरियल कॉलेज का अध्ययन कहता है कि इंग्लैंड के नवंबर के लॉकडाउन में नए प्रकार का संक्रमण तीन गुना हो गया था और पिछले वैरिएंट का संक्रमण घटकर एक तिहाई रह गया था। दूसरी लहर के दौरान कोविड-19 के मामले तेज़ी से बढ़ने लगे और गुरुवार को एक दिन में कोरोना वायरस के नए मामलों की संख्या रिकॉर्ड पर पहुंच गई। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
सभी उम्र के लोगों में तेज संक्रमण

शुरुआती नतीजों से पता चला था कि वायरस 20 साल से कम उम्र के लोगों में ज्यादा तेजी से फैलता है। खासतौर पर माध्यमिक स्कूल की उम्र के बच्चों में। लेकिन, प्रोफेसर गैंडी के मुताबिक ताजा डेटा बताता है कि ये सभी उम्र के लोगों में तेजी से फैलता है। प्रोफेसर गैंडी शोध करने वाली टीम के सदस्य थे। प्रोफेसर कहते हैं, 'दोनों डेटा में अंतर की वजह ये हो सकती है कि शुरुआती डेटा नवंबर के लॉकडाउन के दौरान इकट्ठा किया गया था जब स्कूल खुले हुए थे और वयस्कों से जुड़े कामकाजों पर प्रतिबंध लगे थे। अब हम देख रहे हैं कि नया वायरस हर उम्र के लोगों के बीच फैल रहा है।' 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कड़े प्रतिबंधों की जरूरत

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जिम नाएस्मिथ कहते हैं कि उन्हें लगता है कि नई जानकारियों को देखते हुए जल्द ही कड़े प्रतिबंध लगाने की जरूरत होगी। वो कहते हैं, 'इंपीरियल का डेटा आज तक का सबसे बेहतरीन विश्लेषण है जो संकेत करता है कि अब तक हमने जो उपाय अपनाए हैं वो वायरस के नए प्रकार के सामने आर नंबर को एक से नीचे लाने में कामयाब नहीं होंगे।' प्रोफेसर नाएस्मिथ के मुताबिक, 'आसान शब्दों में कहें तो जब तक हम कुछ अलग नहीं करते हैं तब तक वायरस का नया प्रकार फैलता रहेगा, ज्यादा संक्रमण होंगे, ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती होंगे और ज्यादा मौतें होंगी।'  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
इस शोध की सबसे डरावनी बात ये है कि इंग्लैंड में नवंबर में जो लॉकडाउन लगाया गया था, भले ही वो कई लोगों के लिए सख्त हो, लेकिन वो कोरोना वायरस के नए प्रकार को फैलने से नहीं रोकेगा। उन प्रतिबंधों में जहां पुराने वायरस के मामले घटकर एक तिहाई हो गए वहीं नए प्रकार के मामले तीन गुने हो गए। यही वजह है कि देश में अचानक नए प्रतिबंध क्यों लगाए गए हैं। ये साफ नहीं है कि मौजूदा प्रतिबंध क्या वायरस के नए प्रकार को नियंत्रित कर पाएंगे। ये देखते हुए कि वायरस के पुराने प्रकार को रोकने के लिए दो लॉकडाउन की जरूरत पड़ी थी। कई वैज्ञानिकों को डर है कि नए प्रकार के लिए और सख्ती की जरूरत होगी। पर्याप्त लोगों को वैक्सीन मिलने पर संक्रमण का स्तर कम होना शुरू हो जाएगा, लेकिन तब तक लोगों के लिए पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है कि वो सोशल डिस्टेंसिंग के दिशा-निर्देशों का पालन करें, मास्क पहनें और अपने हाथ धोते रहें। 

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay
क्या वैक्सीन होगी प्रभावी

नया साल अगले कुछ महीनों में जीवन सामान्य होने की उम्मीद लेकर आया है, लेकिन वायरस के इस नए प्रकार से हमें आने वाले दिनों और हफ्तों में लड़ना होगा। वॉरविक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर लॉरेंस योंग कहते हैं कि शुरुआती संकेतों से पता चलता है कि वायरस के इस प्रकार पर वैक्सीन प्रभावी होगी। वह कहते हैं, 'वायरस के प्रकार महामारी की शुरुआत से ही रहे हैं और ये प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें वायरस विकसित होता है और अपने मेजबान शरीर के अनुकूल बनता है। वायरस में हुए अधिकतर बदलावों का उसी प्रकृति पर कोई असर नहीं पड़ता है, लेकिन कभी-कभी ये बदलाव संक्रमित करने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता से लड़ने की वायरस की क्षमता को बढ़ा देते हैं।'  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
यह समझने के लिए और शोध की जरूरत है कि वायरस का नया प्रकार इतनी तेजी से क्यों फैल रहा है, लेकिन शुरुआती संकेत हैं कि वैक्सीन इसपर प्रभावी होनी चाहिए। कोविड-19 का ये नया प्रकार नवंबर में सामने आया था और माना जा रहा है कि इसकी शुरुआत दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड में सितंबर में हुई थी। इस बात के कोई प्रमाण नहीं है कि ये ज्यादा घातक है, लेकिन ये मामलों की संख्या को बढ़ाएगा जिससे देश की स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव बढ़ेगा। वायरस का ये नया प्रकार उत्तरी आयरलैंड के अलावा पूरे ब्रिटेन में पाया गया है, लेकिन लंदन, दक्षिण-पूर्वी और पूर्वी इंग्लैंड में इसका ज्यादा प्रभाव है। 
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