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कोविड 19 से उबरने के दोबारा संक्रमण से बचने की कितनी संभावना? बंदरों पर हुआ शोध

Sun, 24 May 2020 11:56 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
अमेरिका में हुए एक शोध में सामने आया है कि इन रिसर्च में सामने आया कि बंदरों में दोबारा संक्रमण होने पर वायरस से लड़ने वाली एंटीबॉडी पैदा हो जाती हैं। यह शोध उन्होंने यह जानने के लिए किया कि क्या कोरोना महामारी से ठीक होने के बाद दोबारा संक्रमण से बचने के लिए इंसानों में इम्यूनिटी विकसित हो जाती है? शोधकर्ताओं ने पाया कि ऐसा संभव है, क्योंकि बंदरों में तो ऐसा हो रहा है। 
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Research
अमेरिका के बेथ डिकेनस मेडिकल सेंटर में यह शोध किया गया। शोधकर्ता और वायरस विशेषज्ञ डॉ. डेन बेरुच के मुताबिक, दोबारा कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए शरीर में कुदरती एंटीबॉडी असर दिखाती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शोधकर्ताओं ने पहले नौ कोरोना संक्रमित बंदरों पर अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि एक बार रिकवर होने के बाद दोबारा कोरोना वायरस से संक्रमित करने की कोशिश की गई, लेकिन वे बीमार नहीं हुए। बंदरों के शरीर में संक्रमण से लड़ने वाली एंटीबॉडी विकसित हुईं। 

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बंदर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
शोधकर्ताओं ने बंदरों पर दूसरी रिसर्च भी की। इस बार 25 बंदरों को शामिल किया गया। उनमें से आठ बंदरों को हाल में तैयार छह तरह की वैक्सीन (प्रोटोटाइप) दी गईं और प्रभाव देखा गया। शोधकर्ताओं के मुताबिक, जिन बंदरों को वैक्सीन दी गईं वे सुरक्षित रहे और जिन्हें वैक्सीन नहीं मिली, उनकी नाक और फेफड़े में कोरोना वायरस मिले।
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फाइल फोटो - फोटो : PTI
शोधकर्ताओं का कहना है कि बंदरों के ब्लड में एंटीबॉडी का स्तर ज्यादा था। शोध में स्पष्ट हुआ कि एंटीबॉडी कोरोना के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। हालांकि शोधकर्ताओं के मुताबिक यह शुरुआती परिणाम हैं। अभी कुछ नहीं कहा सकता कि यह इंसानों पर भी ऐसे ही प्रभाव पड़े। 
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