प्रतीकात्मक तस्वीर
डॉक्टर मुलियलि बताते हैं कि ऐसी बीमारियों के मामले में एक सामान्य लॉकडाउन वायरस के प्रसार की रफ्तार धीमी कर सकता है। लेकिन लॉकडाउन खुलने के बाद संक्रमण तेजी से बढ़ते हैं। वो कहते हैं, "इस स्थिति में हमें लोगों के मरने की संख्या को घटाना है और मौतों की संख्या घटाने का बस एक तरीका लोगों को बेहतर इलाज मुहैया कराना है।"
- क्या अब कुछ नहीं हो सकता?
विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से आई इस जानकारी के बाद लोगों में निराशा का भाव है। लेकिन डॉक्टर मुलियलि बताते हैं कि अभी भी उम्मीद की एक किरण शेष है। वो कहते हैं, "जब जनसंख्या में रोग प्रतिरोधक क्षमता 60 फीसदी के आसपास पहुंच जाती है तो कुछ समय के लिए इस बीमारी का संक्रमण रुक जाएगा। लेकिन ये कहीं जाएगा नहीं। ये उसी तरह हमारे बीच रहेगा जैसे मीजल्स है। जैसे चिकन पॉक्स है। अब इस पैंडेमिक के दौरान वे बीमारियां कहीं चली नहीं गई हैं। वे हमारे बीच मौजूद हैं। बस धीमे-धीमे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में पहुंच रही हैं। इसे ही बीमारी का एन्डेमिक स्टेज कहते हैं।"