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Coronavirus: घर में अगर किसी को छींक आ रही है तो कोरोना की जांच कब कराएं? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

Sun, 22 Nov 2020 10:54 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
दुनियाभर में अब तक पांच करोड़ 84 लाख से भी अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि मरने वालों की संख्या भी 13 लाख 86 हजार के पार हो गई है। भारत की अगर बात करें तो यहां अब तक 90 लाख से अधिक लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। वहीं एक लाख 33 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि खुशी की बात ये है कि अब तक 85 लाख से अधिक लोग संक्रमण से ठीक भी हो चुके हैं। इससे निपटने के लिए दुनियाभर में वैक्सीन बनाने का काम तेजी से चल रहा है। आइए जानते हैं कोरोना वायरस और उसके लिए बन रही वैक्सीन से जुड़े कुछ सवालों के जवाब, जो सभी के लिए बेहद ही महत्वपूर्ण हैं। 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
घर में अगर किसी को छींक आ रही है तो कोरोना की जांच कब कराएं?  
  • वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रमन आर. गंगाखेडकर बताते हैं, 'आज के समय में कोरोना और सामान्य सर्दी में अंतर करना मुश्किल है, इसलिए अगर किसी में लक्षण हैं तो जरूरी नहीं है कि वो खुद बाहर गया हो, बल्कि हो सकता है परिवार के किसी अन्य सदस्य, जो एसिम्प्टोमेटिक है, के जरिए संक्रमित हो गया हो। इसलिए लापरवाही न बरतें, तुरंत जांच करा लें।'
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
दिल्ली में रोक के बावजूद छठ पर भीड़ जमा हुई, इस लापरवाही पर क्या कहेंगे? 
  • डॉ. रमन आर. गंगाखेडकर के मुताबिक, 'ये बहुत बड़ी लापरवाही है, लोग मास्क नहीं लगा रहे हैं और ऊपर से भीड़ में जमा हो रहे हैं। लोग इस बीमारी को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इसी वजह से दिल्ली के अस्पतालों में अब बेड भरने लगे हैं। हर रोज सात हजार के करीब केस आ रहे हैं। सरकार, स्वास्थ्य विभाग सभी चिंतित हैं। इसलिए आस्था को बनाए रखने के लिए पूजा करें, लेकिन भीड़ में नहीं। घर में रहकर पूजा करें। शादी का मौसम शुरू हो रहा है, जहां जरूरत न हो वहां न जाएं। अगर जरूरी है तो मास्क लगाकर जाएं और दूरी बनाकर रखें।' 

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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
फाइजर, मॉडर्ना वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां इम्यूनिटी के अलग-अलग दावे कर रही हैं, ऐसा क्यों? 
  • डॉ. रमन आर. गंगाखेडकर बताते हैं, 'दोनों वैक्सीन से जितनी अपेक्षा थी, वो उससे ज्यादा कामयाब निकली हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि अगर 50 प्रतिशत में सफल हुई तो उसे ले लेंगे। ये वैक्सीन अगर 100 लोगों को दी जा रही है तो 90 को वायरस से बचा रही है। इन वैक्सीन को बनाने में एचआरए का प्रयोग किया जा रहा है, जो पहले कभी नहीं किया गया है। ऐसे में अगर नई चीज से बना रहे हैं, तो जरूरी है कि इससे किसी को नुकसान न हो। फिलहाल इसके कोई साइड-इफेक्ट नहीं पाए गए हैं। आगे साइड-इफेक्ट होंगे या नहीं, अभी कुछ नहीं कह सकते।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
आम जनता तक वैक्सीन कब तक पहुंचने की उम्मीद है? 
  • डॉ. रमन आर. गंगाखेडकर के मुताबिक, 'हमारे देश की जनसंख्या बहुत ज्यादा है और वैक्सीन के उत्पादन की एक सीमा है। इसलिए जब वैक्सीन आएगी तो पहली प्राथमिकता डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों को दी जाएगी। उसके बाद बुजुर्गों को, जिनका ज्यादा खतरा है। मई-जून तक 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन मुहैया कराने की बात की जा रही है। इसके अलावा करीब आठ महीने से संक्रमण है तो कम से कम 20-25 प्रतिशत लोगों को ये बीमारी हो चुकी है या हो सकती है। ऐसे में हम हर्ड इम्यूनिटी की ओर बढ़ रहे हैं। अगर एक वैक्सीन के प्रोडक्शन में समय लगा तो हम कई दूसरी वैक्सीन को भी लाकर प्रयोग कर सकते हैं।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
वैक्सीन को कितने डिग्री तापमान पर रखा जाता है? 
  • डॉ. रमन आर. गंगाखेडकर बताते हैं, 'फाइजर की वैक्सीन को माइनस 70 डिग्री तापमान के फ्रिज में रखा जाता है, जिसकी व्यवस्था हमारे यहां नहीं है। मॉडर्ना वैक्सीन के साथ ऐसी कंडीशन नहीं है। इसके अलावा हमारे देश में जो वैक्सीन बन रही है, उसमें सीरम की वैक्सीन को सामान्य तापमान पर रख सकते हैं। भारत बायोटेक की वैक्सीन भी ऐसी ही है। फिलहाल वैक्सीन को लेकर परेशान मत हों, सरकार सबको वैक्सीन पहुंचाएगी और एक बार देने के बाद लोग लंबे समय तक के लिए सुरक्षित रह सकते हैं।' 
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